
Brij Bhushan Sharan Singh Case: भारतीय कुश्ती महासंघ (WFI) के पूर्व अध्यक्ष और पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने यौन उत्पीड़न मामले में अदालत से बरी होने के बाद पूरे मामले पर अपनी राय रखी है। न्यायपालिका से क्लीन चिट मिलने के बाद उन्होंने साफ-साफ कहा कि वह खुद को अपराधी नहीं मानते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि पहले दिन से लेकर आज तक उन्होंने कभी खुद को दोषी नहीं माना क्योंकि उन्हें अपनी सच्चाई पर पूरा भरोसा था जो आज सबके सामने साबित भी हो गई है।
बृजभूषण शरण सिंह ने अपने ऊपर लगे आरोपों को पूरी तरह से झूठा और एक सोची समझी साजिश करार दिया। उन्होंने कहा कि इस बड़ी साजिश में देश की कई राजनीतिक पार्टियां शामिल हो गई थीं। उनके मुताबिक यह खिलाड़ियों का आंदोलन रह ही नहीं गया था बल्कि पूरी तरह से विपक्ष का राजनीतिक आंदोलन बन गया था। उन्होंने यह भी बताया कि इस पूरे घटनाक्रम के दौरान वह कभी भी तनाव में नहीं रहे और आज न्यायपालिका ने उन्हें न्याय दिया है।
अपने खिलाफ लगे आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने कहा कि दुनिया में हर चीज के पीछे कोई न कोई कारण जरूर छिपा होता है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि देश में ऐसे हजारों लोग हैं जिन पर इस तरह के झूठे आरोप लगाए जा रहे हैं और आज यह एक चलन सा बन गया है। बृजभूषण ने कहा कि अदालत के इस फैसले से उन तमाम लोगों को एक नई ताकत मिलेगी जो झूठे मुकदमों का सामना कर रहे हैं। उन्होंने सलाह दी कि अगर किसी पर झूठे आरोप लगते हैं तो उसे डरने के बजाय डटकर उसका सामना करना चाहिए।
भारतीय कुश्ती महासंघ के पूर्व अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ इस पूरे मामले की शुरुआत जनवरी 2023 में हुई थी। तब भारत के दिग्गज पहलवानों विनेश फोगाट, साक्षी मलिक और बजरंग पूनिया ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर धरना दिया था। उन्होंने यौन उत्पीड़न का गंभीर आरोप लगाते हुए बृजभूषण को पद से हटाने की मांग की थी। तत्कालीन खेल मंत्री अनुराग ठाकुर के साथ बैठक और 23 जनवरी, 2023 को खेल मंत्रालय द्वारा निगरानी समिति के गठन के बाद प्रदर्शन कुछ समय के लिए रोक दिया गया था।
यह विरोध प्रदर्शन 28 मई, 2023 को अपने चरम पर पहुंच गया जब पहलवानों ने नई संसद की ओर मार्च करने की कोशिश की और दिल्ली पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया। इसके कुछ ही दिनों बाद पहलवान अपने मेडल गंगा में विसर्जित करने हरिद्वार पहुंच गए। हालांकि किसान नेताओं के हस्तक्षेप और केंद्रीय मंत्रियों के साथ लंबी बातचीत के बाद उन्होंने अपना प्रदर्शन स्थगित कर दिया था। 2 जुलाई, 2026 को इस मामले में अंतिम जिरह पूरी हुई। आखिरकार 3 अगस्त, 2026 को दिल्ली की अदालत ने 6 वयस्क महिला पहलवानों से जुड़े यौन उत्पीड़न मामले में बृजभूषण शरण सिंह को बरी कर दिया।