लखनऊ

लखनऊ में बुलडोजर एक्शन: सरकारी जमीन पर बनी मस्जिद हटाई, हाई कोर्ट आदेश पर कार्रवाई

Bulldozer Action: लखनऊ के बीकेटी क्षेत्र में सरकारी जमीन पर बनी मस्जिद को प्रशासन ने हाई कोर्ट के आदेश पर बुलडोजर से हटाया। कार्रवाई सुबह कड़ी सुरक्षा के बीच पूरी की गई।

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Apr 02, 2026
मस्जिद पर चला बुलडोजर: हाई कोर्ट के आदेश के बाद प्रशासन की बड़ी कार्रवाई (फोटो सोर्स : भाषा WhatsApp News Group)

Bulldozer Action in Lucknow: राजधानी लखनऊ में गुरुवार तड़के प्रशासन ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए सरकारी जमीन पर बनी एक मस्जिद को बुलडोजर से ध्वस्त कर दिया। यह कार्रवाई बक्शी का तालाब (बीकेटी) क्षेत्र के बस्ती गांव में भारी पुलिस बल और प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी में सुबह करीब 4 बजे अंजाम दी गई। पूरे अभियान को बेहद सख्ती और सुरक्षा व्यवस्था के बीच महज एक घंटे में पूरा कर लिया गया।

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 तड़के 3 बजे पहुंची टीम, एक घंटे में कार्रवाई पूरी

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, प्रशासन की टीम सुबह लगभग 3 बजे बुलडोजर और आवश्यक उपकरणों के साथ मौके पर पहुंची। क्षेत्र को पहले ही पुलिस छावनी में तब्दील कर दिया गया था, ताकि किसी भी प्रकार की अव्यवस्था या विरोध की स्थिति से निपटा जा सके। इसके बाद करीब एक घंटे के भीतर मस्जिद को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया गया और मलबा हटाने का काम भी शुरू कर दिया गया।

 हाई कोर्ट के आदेश के बाद उठाया कदम

यह कार्रवाई इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच के आदेश के अनुपालन में की गई। अदालत ने 25 मार्च 2026 को इस मामले में सुनवाई करते हुए मस्जिद पक्ष की याचिका को खारिज कर दिया था और प्रशासन को आवश्यक कार्रवाई करने की अनुमति दी थी। कोर्ट के आदेश के छह दिन बाद प्रशासन ने नोटिस जारी कर कब्जा हटाने के निर्देश दिए थे। हालांकि, निर्धारित समय सीमा के भीतर निर्माण नहीं हटाया गया, जिसके बाद प्रशासन ने सख्त कदम उठाते हुए बुलडोजर कार्रवाई को अंजाम दिया।

क्या है पूरा मामला

यह मामला वर्ष 2024 से जुड़ा हुआ है, जब बीकेटी तहसीलदार ने संबंधित भूमि को सरकारी खलिहान बताते हुए मस्जिद को अवैध घोषित किया था। प्रशासन की ओर से नोटिस जारी कर कहा गया था कि इस जमीन पर अवैध कब्जा कर धार्मिक ढांचा बनाया गया है।

इस नोटिस को मोहम्मद साहिबाद और लाल मोहम्मद ने चुनौती दी थी, जिसके बाद मामला एडीएम कोर्ट तक पहुंचा। एडीएम कोर्ट ने मस्जिद पक्ष की याचिका को खारिज कर दिया। इसके बाद मामला हाई कोर्ट पहुंचा, जहां भी याचिका को बेबुनियाद मानते हुए खारिज कर दिया गया।

 60 साल पुरानी बताई जा रही थी मस्जिद

स्थानीय लोगों का दावा है कि यह मस्जिद लगभग 60 साल पुरानी थी और लंबे समय से यहां धार्मिक गतिविधियां संचालित हो रही थीं। हालांकि, प्रशासन का कहना है कि चाहे निर्माण कितना भी पुराना क्यों न हो, यदि वह सरकारी जमीन पर अवैध रूप से बना है, तो उसे हटाना कानूनन आवश्यक है।

प्रशासन का पक्ष

तहसीलदार शरद कुमार के अनुसार, जिस जमीन पर मस्जिद बनाई गई थी, वह सरकारी खलिहान की भूमि है। इस पर अवैध कब्जा कर निर्माण किया गया था। उन्होंने बताया कि पहले इस मामले में 36 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया था, जिसे बाद में हाई कोर्ट ने निरस्त कर दिया। प्रशासन का कहना है कि यह कार्रवाई पूरी तरह न्यायालय के आदेश और कानून के तहत की गई है। साथ ही, पूरे अभियान के दौरान शांति व्यवस्था बनाए रखने पर विशेष ध्यान दिया गया।

सुरक्षा के कड़े इंतजाम

संवेदनशीलता को देखते हुए प्रशासन ने मौके पर भारी पुलिस बल तैनात किया था। आसपास के क्षेत्र में निगरानी बढ़ा दी गई थी और किसी भी प्रकार के विरोध को रोकने के लिए अतिरिक्त सुरक्षा इंतजाम किए गए थे। कार्रवाई के दौरान प्रशासन ने यह सुनिश्चित किया कि कोई अप्रिय घटना न हो और पूरी प्रक्रिया शांतिपूर्ण ढंग से पूरी की जाए। स्थानीय लोगों से भी शांति बनाए रखने की अपील की गई।

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