लखनऊ

CBI ने लखनऊ में फर्जी कॉल सेंटर पकड़ा, सरगना गिरफ्तार, 52 लैपटॉप और 14 लाख कैश बरामद

CBI Busts Major Fake Call Center in Lucknow: लखनऊ में CBI ने बड़ी कार्रवाई करते हुए विकासनगर स्थित फर्जी कॉल सेंटर का भंडाफोड़ किया। छापेमारी में 52 लैपटॉप, 14 लाख रुपये नकद और कई डिजिटल उपकरण बरामद हुए। सरगना विकास कुमार को गिरफ्तार कर लिया गया, जो कई राज्यों में कॉल सेंटर चलाकर बड़े पैमाने पर साइबर ठगी कर रहा था।

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Nov 25, 2025
विकासनगर से पकड़ा गया फर्जी कॉल सेंटर, 52 लैपटॉप और 14 लाख कैश बरामद (फोटो सोर्स : Police Whatsapp News Group )

CBI Lucknow Action: लखनऊ में साइबर ठगी से जुड़े एक बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश करते हुए केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने विकास नगर इलाके में चल रहे एक फर्जी कॉल सेंटर पर छापेमारी कर सरगना विकास कुमार निमार को गिरफ्तार कर लिया। लंबे समय से सक्रिय यह कॉल सेंटर विभिन्न राज्यों में फैले साइबर फ्रॉड नेटवर्क का हिस्सा बताया जा रहा है। CBI को मौके से 52 लैपटॉप, 14 लाख रुपये नकद, मोबाइल फोन, दस्तावेज़ और डिजिटल उपकरण मिले, जिनका इस्तेमाल देशभर में ठगी के लिए किया जा रहा था। यह कॉल सेंटर पिछले कई महीनों से गुप्त रूप से संचालित हो रहा था। विकास नगर के इस घर में डे-नाइट कॉलिंग ऑपरेशन के जरिए लोगों को धोखा देकर पैसे ऐंठे जा रहे थे। CBI की टीम ने बेहद सावधानीपूर्वक कार्रवाई करते हुए इस नेटवर्क को धर दबोचा।

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पांच दिन की रेकी के बाद मारी गई रेड

CBI सूत्रों के मुताबिक, गिरोह के सरगना विकास कुमार की लंबे समय से तलाश चल रही थी। पिछले साल CBI ने उसके ऊपर शिकंजा कसने की कोशिश की थी, लेकिन वह मौके से फरार हो गया था। इसके बाद से वह लगातार स्थान बदलकर अपना नेटवर्क विस्तार कर रहा था। सूचना मिलने पर CBI ने एक विशेष टीम गठित की, जिसने पांच दिनों तक विकास के घर और कॉल सेंटर की गतिविधियों पर गहन निगरानी रखी। आने-जाने वाले लोगों की पहचान,देर रात होने वाली कॉलिंग गतिविधि, संदिग्ध डिवाइसों का इस्तेमाल, अप्राकृतिक आवाजाही, इन सभी पहलुओं पर CBI की नजर बनी रही। सारी मूवमेंट्स के पुष्ट होने के बाद रात में अचानक की गई छापेमारी में विकास कुमार को गिरफ्तार किया गया और कॉल सेंटर को सील कर दिया गया।

कैसे चलता था यह फर्जी कॉल सेंटर

जांच में पता चला है कि यह कॉल सेंटर विदेशी लोगों को निशाना बनाकर टेक-सपोर्ट घोटाले (Tech Support Scam) में लिप्त था। इस प्रकार के ठगी मॉड्यूल में इंटरनेट या कंप्यूटर में वायरस बता कर लोगों को डराया जाता है,सिस्टम ठीक करने के नाम पर रिमोट एक्सेस लिया जाता है,और फिर बैंकिंग, पेमेंट या पर्सनल डेटा चुरा लिया जाता है। इसके अलावा, कई बार कस्टमर केयर बनकर,बैंक अधिकारी बनकर,ई-कॉमर्स कंपनी का कर्मचारी बनकर लोगों से KYC अपडेट, रिफंड, गिफ्ट कार्ड, पेमेंट फेल जैसे बहानों से ठगी की जाती थी। कॉल सेंटर में काम करने वाले युवाओं को स्क्रिप्ट और सॉफ्टवेयर दिए जाते थे, जिनसे वे विदेशी ग्राहकों को कॉल कर ठगी करते थे।

विकास कुमार के कई राज्यों में कॉल सेंटर का जाल

CBI की शुरुआती जांच में यह भी सामने आया है कि विकास कुमार केवल लखनऊ ही नहीं, बल्कि

  • दिल्ली
  • गुजरात
  • राजस्थान
  • मध्यप्रदेश

महाराष्ट्र में भी इसी तरह के फर्जी कॉल सेंटर चलाता था। इन केंद्रों पर काम करने वाले लोगों को मोटी कमीशन दी जाती थी। विकास खुद को व्यवसायी बताकर शहरों में किराए के फ्लैट लेता और वहां कॉल सेंटर शुरू कर देता था। पिछले साल CBI ने विकास से जुड़े गिरोह पर छापेमारी की थी, तब वह फरार हो गया और अपना संचालन भूमिगत तरीके से करता रहा।

कॉल सेंटर में मिले 52 लैपटॉप और डिजिटल सबूत

CBI की टीमें जब कॉल सेंटर में दाखिल हुईं तो वहां बड़ी संख्या में कंप्यूटर सिस्टम, हेडफोन, हाई-स्पीड इंटरनेट राउटर, VOIP कॉलिंग डिवाइस और ठगी में उपयोग होने वाले कई स्क्रिप्ट नोट्स मिले। जब्त सामान में शामिल हैं, 52 लैपटॉप,14 लाख रुपये नकद,20 से अधिक स्मार्टफोन,CRM सॉफ्टवेयर,फर्जी कस्टमर लिस्ट,इंटरनेशनल कॉलिंग एप्लिकेशन,रिमोट एक्सेस टूल,कई हार्ड डिस्क और पेन ड्राइव। जांच में सामने आया है कि लैपटॉप में ऐसे सॉफ्टवेयर इंस्टॉल थे जिनका उपयोग मुख्य रूप से ठगी और पहचान छिपाने में किया जाता है।

फर्जी कॉल सेंटर में ‘डमी ऑफिस’ बनाकर भर्ती किए जाते थे लड़के-लड़कियाँ

CBI के अनुसार विकास अपने कॉल सेंटरों के लिए खास तौर पर युवाओं की भर्ती करता था, जिनमें अधिकतर 18–25 वर्ष के छात्र शामिल थे।उन्हें रोजाना 100 से अधिक कॉल करने के टारगेट दिए जाते थे। इसके लिए उन्हें अंग्रेजी में बातचीत की ट्रेनिंग,फर्जी पहचान,और ठगी की स्क्रिप्ट बता दी जाती थी। भर्ती के दौरान उनसे झूठ बोला जाता था कि वे ‘इंटरनेशनल BPO’ में काम कर रहे हैं। कई युवक और युवतियाँ खुद भी ठगी में फँस जाते थे, क्योंकि उन्हें इसकी जानकारी नहीं होती थी कि कॉल सेंटर अवैध तौर पर चल रहा है।

हाई-टेक उपकरणों की वजह से पकड़ना मुश्किल था गिरोह

  • यह नेटवर्क बेहद हाई-टेक तरीके से संचालित होता था।
  • IP Address छिपाने के लिए VPN
  • VOIP सर्विस से विदेश कॉल
  • इन्क्रिप्टेड चैट
  • फर्जी दस्तावेजऔर बार-बार लोकेशन बदलना
  • इन सबके कारण CBI को विकास तक पहुंचने में काफी समय लगा।
  • गिरोह की गतिविधियाँ विदेशों में भी फैल चुकी थीं, जिससे इंटरनेशनल मामलों की जांच भी की जा रही है।

CBI कर रही है नेटवर्क की परतें खोलने की तैयारी

CBI ने बताया कि विकास कुमार को गिरफ्तार करने के बाद उसके नेटवर्क और पिछली गतिविधियों की विस्तार से जांच की जा रही है। अब तक मिली जानकारी के अनुसार ग्राहक डेटा लीक,बैंकिंग फ्रॉड,विदेशी नागरिकों की ठगी,और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े कई सुराग हाथ लगे हैं। टीम विकास के अन्य साथियों की तलाश भी कर रही है, जो अलग-अलग राज्यों में फर्जी कॉल सेंटर संचालित कर रहे थे।

स्थानीय पुलिस को भी मिली बड़ी सफलता

CBI की इस कार्रवाई के बाद लखनऊ पुलिस भी सतर्क हो गई है और शहर में संचालित हो रहे अन्य संदिग्ध कॉल सेंटरों की सूची तैयार कर रही है। शहर में पिछले कुछ वर्षों में साइबर अपराध तेजी से बढ़ा है, और ऐसे कई कॉल सेंटर युवाओं को गलत दिशा में ले जा रहे हैं।

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