लखनऊ

दलित-ईबीसी वोट बैंक पर मची होड़, चंद्रशेखर आजाद-अखिलेश यादव के PDA के लिए नई चुनौती

UP Politics News: चंद्रशेखर आजाद 2 जून से यूपी की सभी 403 सीटों पर 'सत्ता परिवर्तन यात्रा' शुरू करेंगे। दलित, मुस्लिम और EBC वोट बैंक पर ASP की नजर ने अखिलेश यादव के PDA फॉर्मूले के लिए नई मुश्किल खड़ी कर दी है।
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Updated: 29 Apr 2026, 8:46 PM IST
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क्या 2027 में PDA का खेल बिगाडेंगे चंद्रशेखर रावण, PC- Patrika

लखनऊ: उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले विपक्षी खेमे में नई हलचल शुरू हो गई है। आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और नगीना लोकसभा सांसद चंद्रशेखर आजाद 2 जून 2026 से पूरे प्रदेश में व्यापक ‘सत्ता परिवर्तन यात्रा’ शुरू करने जा रहे हैं। पार्टी का दावा है कि यह यात्रा सभी 403 विधानसभा सीटों को कवर करेगी और ASP इस बार अकेले दम पर चुनाव लड़ने की तैयारी में है।

ASP नेताओं ने स्पष्ट किया कि पार्टी का मुख्य फोकस दलित, मुस्लिम और अति पिछड़े वर्ग (EBC) पर रहेगा। पार्टी कम से कम 100 सीटों पर EBC उम्मीदवार उतारने की योजना बना रही है। इसके अलावा, सामान्य सीटों पर भी 50 दलित उम्मीदवार उतारने का ऐलान किया गया है।

पार्टी सूत्रों के अनुसार, अल्पसंख्यकों और पिछड़े वर्गों को उनकी जनसंख्या के अनुपात में टिकट दिए जाएंगे। ASP ने मंडल और बूथ स्तर तक संगठन खड़ा कर लिया है और हर विधानसभा क्षेत्र में ‘भाईचारा संगठन’ बनाए जा रहे हैं। पार्टी पूर्वांचल से यात्रा की शुरुआत कर पूरे राज्य का भ्रमण करेगी।

अखिलेश के PDA पर सबसे बड़ा खतरा?

2024 लोकसभा चुनाव में अखिलेश यादव ने PDA (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) फॉर्मूले के सहारे अच्छा प्रदर्शन किया था। सपा-कांग्रेस गठबंधन को 43 सीटें मिली थीं। लेकिन अब चंद्रशेखर आजाद उसी वोट बैंक को लक्ष्य बना रहे हैं, जिससे सपा में चिंता बढ़ गई है।

कुछ सपा सांसदों ने अखिलेश यादव से चंद्रशेखर से बातचीत शुरू करने की अपील की थी, लेकिन अखिलेश ने इसे सिरे से खारिज कर दिया। ASP की बढ़ती लोकप्रियता, खासकर युवा दलितों और ईबीसी वोटरों में, अखिलेश के PDA को वोट विभाजन का खतरा पैदा कर सकती है।

चंद्रशेखर का तीखा जवाब

चंद्रशेखर आजाद ने कहा कि विपक्षी दलों की चिंता बेकार है। उन्होंने आरोप लगाया कि सपा और कांग्रेस जहां-तहां एक-दूसरे के खिलाफ लड़ रही हैं।

'विपक्ष कहां है? वे बंगाल, केरल, दिल्ली और हरियाणा में एक-दूसरे के खिलाफ चुनाव लड़ रहे हैं। राजनीति में कोई धन्यवाद नहीं कहता। अगर उन्हें भाजपा हराने में मदद चाहिए तो उन्हें खुद आकर बात करनी चाहिए।' चंद्रशेखर ने साफ कहा कि उनके अनुसार सहयोगी दलों के बीच वोट ट्रांसफर नहीं होता।

बसपा के गिरते ग्राफ से फायदा

बहुजन समाज पार्टी (BSP) का वोट शेयर 2017 के 22% से 2022 में घटकर 12.88% रह गया है। जाटव-रविदासी दलितों के पारंपरिक वोट बैंक में खाली जगह को भरने के लिए सपा, कांग्रेस और अब ASP में होड़ मची हुई है। ASP इस खाली जगह को अपने पक्ष में करने की कोशिश कर रही है।

कांग्रेस के कुछ नेताओं ने भी माना कि चंद्रशेखर आजाद युवा दलितों और पिछड़ों में लोकप्रिय हैं और उनके पास ऐसा कोई चेहरा नहीं है जो इस वर्ग को जोड़ सके। हाल की रैलियों में बाराबंकी समेत कई जगहों पर भारी भीड़ देखी गई।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगर ASP अकेले चुनाव लड़ी तो मुख्य रूप से सपा-कांग्रेस के वोट कट सकते हैं, जिसका फायदा भाजपा को मिल सकता है। दूसरी ओर, अगर कोई समझौता होता है तो विपक्षी गठबंधन मजबूत भी हो सकता है।

फिलहाल चंद्रशेखर आजाद पूरे यूपी में अपनी स्वतंत्र ताकत दिखाने पर अड़े हुए हैं। उनकी 2 जून से शुरू होने वाली यात्रा न सिर्फ ASP को मजबूत करेगी, बल्कि अखिलेश यादव के PDA फॉर्मूले को भी नई चुनौती देगी।

Updated on:
29 Apr 2026, 8:46 PM IST
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