गुरुवार को राजधानी में विश्वेश्वरैया प्रेक्षागृह में राजकीय संस्कृत परिषद के मेधावी छात्रों के सम्मान समारोह का आयोजन हुआ।
लखनऊ. गुरुवार को राजधानी में विश्वेश्वरैया प्रेक्षागृह में राजकीय संस्कृत परिषद के मेधावी छात्रों के सम्मान समारोह का आयोजन हुआ। इस कार्यक्रम में शामिल हुए सीएम योगी ने पूर्व की सरकारों पर हमला किया। उन्होंने पिछली सरकारों के दौरान शिक्षा व्यवस्था की बदहाली पर बात करते हुए और शिक्षा व्यवस्था को दुरुस्त करने की अपनी प्रतिबद्धता के बारे में बताया।
सीएम योगी का पिछली सरकारों पर हमला-
सीएम योगी ने मेधावी छात्रों को सम्मानित किया। इसके साथ ही उन्होंने 18 बालिका छात्रावास, 19 राजकीय उच्च विद्यालय, 16 राजकीय उच्चतर विद्यालय का लोकार्पण भी किया। इस दौरान सीएम योगी ने प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था को लेकर पिछली सरकारों पर जमकर हमला बोला। सीएम योगी ने कहहा कि पहले परीक्षा में दो महीने व रिजल्ट में एक महीने लगते थे। जिससे रिजल्ट में देरी से तमाम बच्चे विश्वविद्यालयों में प्रवेश से वंचित रह जाते थे। हमने नकलविहीन परीक्षा तो कराई ही साथ ही शिक्षकों की कमी भी नहीं होने दी। उन्होंने आरोप लगाया कि पहले नकल के ठेके होते थे। शिक्षा विभाग नकल उद्योग बन गया था। पिछली सरकारों में नकल माफिया हाबी था। पहले प्रतिभा के साथ खिलवाड़ होता था। सीएम योगी ने आगे कहा कि प्रदेश में जब शिक्षा विभाग ने ठान ली कि मेधावियों के साथ अन्याय नहीं होने देंगे, तो नकलविहीन परीक्षाएं कराकर दिखा दिया गया।
दुनिया ने दखा इतने बड़े बोर्ड में नकलविहीन परीक्षा हुई-
सीएम योगी ने कहा कि दुनिया भर ने ये देखा कि इतने बड़े बोर्ड में नकलविहीन परीक्षा हुई हैं। जो लोग शिक्षा पर ध्यान नहीं दे सके, उनसे समाज के लिए क्या उम्मीद करें। 2001 से संस्कृत शिक्षा परिषद का गठन लंबित था। पिछली सरकारें 17 साल से असमंजस में थी। जो लोग शिक्षा पर ध्यान नहीं दे सके, उनसे समाज के लिए क्या उम्मीद की जाए। हमारी सरकार में इसे प्राथमिकता से लिया गया।
"भारत को समझना है तो संस्कृत की शरण में जाना होगा"-
योदी आदित्यनाथ ने आगे कहा कि संस्कृत के साथ उपेक्षा की पराकाष्ठा थी। अगर भारत को समझना है तो संस्कृत की शरण में जाना होगा। संस्कृत के छात्र ही ये बता सकते हैं कि भारत एक वैदिक राष्ट्र है। भारत का स्वाभिमान ना लगे इसलिये संस्कृत की उपेक्षा होती रही है। परंपरा को लेकर चलना अच्छी बात है। संस्कृत को सीमित दायरे तक नहीं रखना चाहिए, इसे आधुनिक बनाना चहिए। संस्कृत को आधुनिक बनाना होगा।