
CM Yogi Janta Darshan: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को मुख्यमंत्री आवास पर आयोजित जनता दर्शन में प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए लोगों की समस्याएं सुनीं। एक-एक कर फरियादियों से मुलाकात करते हुए मुख्यमंत्री ने उनके प्रार्थना पत्र लिए और संबंधित अधिकारियों को शिकायतों के त्वरित एवं समयबद्ध निस्तारण के निर्देश दिए। जनता दर्शन में पुलिस, राजस्व, प्रशासन, विद्युत समेत विभिन्न विभागों से जुड़ी शिकायतें सामने आईं। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया कि जनसमस्याओं के समाधान में किसी भी स्तर पर लापरवाही या उदासीनता बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि समाज में वैमनस्यता फैलाने वाले लोग कई बार छोटी-छोटी घटनाओं को बड़ा रूप देने का प्रयास करते हैं। ऐसे में प्रशासन और पुलिस की जिम्मेदारी और बढ़ जाती है। उन्होंने जिलाधिकारियों और पुलिस अधीक्षकों को निर्देशित किया कि अपने-अपने जिलों में होने वाली छोटी से छोटी घटना पर भी नजर रखें और सूचना मिलते ही वरिष्ठ अधिकारी स्वयं मौके पर पहुंचें। उन्होंने कहा कि किसी घटना को नजरअंदाज करने या उसके समाधान में देरी करने से स्थिति बिगड़ सकती है। इसलिए अधिकारी मौके पर पहुंचकर पीड़ित की बात सुनें, वास्तविक स्थिति की जानकारी लें और दोषियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित करें। मुख्यमंत्री ने कहा कि समय रहते की गई प्रभावी कार्रवाई से छोटी घटना को बड़ा रूप लेने से रोका जा सकता है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अधिकारियों को चेतावनी देते हुए कहा कि छोटी-छोटी घटनाओं में भी उदासीनता और लापरवाही किसी कीमत पर स्वीकार नहीं की जाएगी। उन्होंने प्रशासनिक अधिकारियों से संवेदनशीलता के साथ काम करने की अपेक्षा की। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार की प्राथमिकता आम नागरिक को सुरक्षित और न्यायपूर्ण वातावरण उपलब्ध कराना है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि किसी भी शिकायत को केवल कागजी कार्रवाई तक सीमित न रखा जाए, बल्कि उसके वास्तविक समाधान की निगरानी भी की जाए। खासकर कानून-व्यवस्था से जुड़े मामलों में तत्काल कार्रवाई के साथ यह भी सुनिश्चित किया जाए कि पीड़ित को न्याय मिलने का भरोसा हो।
जनता दर्शन के दौरान मुख्यमंत्री कुर्सियों पर बैठे फरियादियों के बीच पहुंचे और उनसे व्यक्तिगत रूप से बातचीत की। उन्होंने लोगों की समस्याओं को ध्यानपूर्वक सुना और उनके प्रार्थना पत्रों का अवलोकन किया। अधिकारियों से संबंधित शिकायतों के बारे में जानकारी लेते हुए उन्होंने समयबद्ध तरीके से कार्रवाई के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार पिछले साढ़े नौ वर्षों से बिना किसी भेदभाव के प्रत्येक पीड़ित की समस्या का उचित समाधान कराने के लिए प्रतिबद्ध है। अधिकारियों को जनशिकायतों के निस्तारण में संवेदनशीलता बरतनी चाहिए। उन्होंने कहा कि शिकायतकर्ता को बार-बार कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें, इसके लिए संबंधित अधिकारी स्वयं जिम्मेदारी लेकर प्रकरण का समाधान कराएं।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को यह भी निर्देश दिया कि जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ पात्र लोगों तक पहुंचाने में किसी प्रकार की लापरवाही न हो। जिन लोगों ने योजनाओं से संबंधित समस्याएं रखीं, उनके मामलों में पात्रता के आधार पर आवश्यक कार्रवाई करने को कहा गया। उन्होंने कहा कि गरीब और जरूरतमंद व्यक्ति सरकार की योजनाओं से वंचित न रहे। पात्र लोगों को योजनाओं का लाभ दिलाना अधिकारियों की जिम्मेदारी है। इसी तरह गंभीर रूप से बीमार लोगों के इलाज की व्यवस्था में भी संवेदनशीलता बरती जाए और जरूरतमंद मरीजों की सहायता के लिए संबंधित विभाग तत्काल कदम उठाएं।
जनता दर्शन में जमीन से जुड़े विवाद और दबंगों की शिकायतें भी मुख्यमंत्री के सामने पहुंचीं। मुख्यमंत्री ने ऐसे मामलों में राजस्व और पुलिस अधिकारियों को समन्वय के साथ कार्रवाई करने के निर्देश दिए। उन्होंने भूमाफिया और दबंग प्रवृत्ति के लोगों के खिलाफ कठोर कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि राजस्व संबंधी मामलों में अनावश्यक देरी न हो। जमीन से जुड़े विवादों का नियमानुसार और समयबद्ध निस्तारण किया जाए, ताकि शिकायतकर्ताओं को बार-बार अधिकारियों के पास न आना पड़े। कानून-व्यवस्था से जुड़े मामलों में भी संबंधित विभागों को तत्काल कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए।
जनता दर्शन में पुलिस और राजस्व विभाग से जुड़ी शिकायतों की संख्या अधिक रही। इन शिकायतों पर मुख्यमंत्री ने अधिकारियों के प्रति सख्त रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि पुलिस कमिश्नर, एडीजी, आईजी, डीआईजी और एसएसपी स्तर के अधिकारी नियमित रूप से जन समस्याओं की समीक्षा करें और जिलों में जाकर शिकायतों का निस्तारण सुनिश्चित कराएं। मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि किसी मातहत अधिकारी या कर्मचारी के स्तर पर लापरवाही की शिकायत सामने आती है तो उसकी भी जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि पीड़ित व्यक्ति को न्याय दिलाना प्रशासन और पुलिस की प्राथमिक जिम्मेदारी है। शिकायतों के निस्तारण में किसी भी स्तर पर ढिलाई मिलने पर जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि शिकायतों का निस्तारण केवल औपचारिकता के तौर पर नहीं होना चाहिए। पीड़ित व्यक्ति को यह महसूस होना चाहिए कि उसकी बात सुनी गई और समस्या का समाधान किया गया है। उन्होंने कहा कि सरकार की शीर्ष प्राथमिकताओं में पीड़ितों की संतुष्टि शामिल है।
उन्होंने प्रशासनिक मशीनरी से अपेक्षा की कि अधिकारी कार्यालयों में आने वाले लोगों के साथ संवेदनशील व्यवहार करें। फरियादियों की समस्याओं को गंभीरता से सुनते हुए उपलब्ध तथ्यों और नियमों के आधार पर उनका समाधान कराया जाए। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को यह भी कहा कि जनसमस्याओं के निस्तारण की नियमित समीक्षा की जाए।
जनता दर्शन के दौरान एक भावुक और खुशनुमा पल भी देखने को मिला। अपनी मां के साथ पहुंचे एक नन्हे बच्चे से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हालचाल पूछा। उन्होंने बच्चे से उसकी पढ़ाई के बारे में भी जानकारी ली और पूछा कि वह कहां पढ़ता है। मुख्यमंत्री ने बच्चे की ओर चॉकलेट बढ़ाई तो उसने तुरंत चॉकलेट ले ली। इसके बाद मुख्यमंत्री ने मजाकिया अंदाज में उससे चॉकलेट वापस मांगने की कोशिश की, लेकिन बच्चे ने चॉकलेट वापस करने से इनकार कर दिया। इस पर जनता दर्शन में मौजूद लोगों के चेहरे पर मुस्कान आ गई और पूरा माहौल कुछ देर के लिए खुशनुमा हो गया।
मुख्यमंत्री ने बच्चे को उसके उज्ज्वल भविष्य का आशीर्वाद दिया और मन लगाकर पढ़ाई करने के लिए प्रेरित किया। जनता दर्शन के दौरान एक ओर जहां मुख्यमंत्री ने गंभीर जनसमस्याओं पर अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए, वहीं बच्चे के साथ उनकी सहज बातचीत ने कार्यक्रम में मानवीय संवेदना का भी संदेश दिया।
जनता दर्शन में मुख्यमंत्री के निर्देशों का मुख्य जोर इस बात पर रहा कि प्रशासन और पुलिस जनता की समस्याओं को गंभीरता से लें और किसी घटना या शिकायत को शुरुआती स्तर पर ही प्रभावी तरीके से सुलझाएं। उन्होंने अधिकारियों को जमीनी स्तर पर सक्रिय रहने और शिकायतों के निस्तारण की निगरानी करने को कहा। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि कानून-व्यवस्था, राजस्व विवाद, जनकल्याणकारी योजनाओं, इलाज और अन्य सार्वजनिक समस्याओं से जुड़े मामलों में अधिकारी संवेदनशीलता के साथ काम करें। उनका कहना था कि छोटी घटना की अनदेखी आगे चलकर बड़ी समस्या का कारण बन सकती है। इसलिए प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों को हर स्तर पर सतर्क रहते हुए पीड़ित को त्वरित राहत और न्याय दिलाने की दिशा में काम करना होगा।