UP Power Crisis उत्तर प्रदेश में बढ़ती बिजली कटौती पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सख्त हो गए हैं। सीएम आवास पर ऊर्जा विभाग की उच्चस्तरीय बैठक में बिजली व्यवस्था सुधारने को लेकर मंथन हुआ।
UP Power Crisis Yogi high level Meeting: उत्तर प्रदेश में लगातार बढ़ रही बिजली कटौती और उससे उपजे जनाक्रोश के बीच मुख्यमंत्री Yogi Adityanath ने सख्त रुख अपनाया है। राजधानी लखनऊ स्थित मुख्यमंत्री आवास पर ऊर्जा विभाग की उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई, जिसमें प्रदेश की बिगड़ती बिजली व्यवस्था, लगातार हो रही कटौती और जनता की शिकायतों को लेकर गहन मंथन किया गया। बैठक में ऊर्जा मंत्री A.K. Sharma, विभागीय वरिष्ठ अधिकारी, चेयरमैन आशीष गोयल और विभिन्न विद्युत वितरण कंपनियों के एमडी मौजूद रहे।
प्रदेश के कई जिलों में बिजली संकट को लेकर जनता का गुस्सा लगातार बढ़ता जा रहा है। गांवों से लेकर शहरों तक लोग घंटों की बिजली कटौती से परेशान हैं। स्थिति यह है कि कई स्थानों पर बिजली विभाग के खिलाफ विरोध प्रदर्शन भी शुरू हो गए हैं। विपक्षी दल लगातार सरकार को घेर रहे हैं, वहीं सत्ता पक्ष के कई विधायक भी अपने क्षेत्रों में बिजली संकट को लेकर नाराजगी जाहिर कर चुके हैं।
मुख्यमंत्री आवास पर आयोजित बैठक में प्रदेशभर की बिजली आपूर्ति व्यवस्था की विस्तृत समीक्षा की गई। सूत्रों के अनुसार मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अधिकारियों से साफ कहा कि जनता को अनावश्यक बिजली कटौती का सामना नहीं करना चाहिए। उन्होंने बिजली आपूर्ति में सुधार के लिए तत्काल प्रभाव से ठोस कदम उठाने के निर्देश दिए।
बैठक के दौरान विभिन्न जिलों की बिजली आपूर्ति रिपोर्ट, ट्रांसफार्मर खराब होने की घटनाएं, ओवरलोडिंग, लाइन लॉस और तकनीकी खामियों पर विस्तार से चर्चा की गई। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से पूछा कि आखिर ऐसी क्या वजह है कि प्रदेश के कई जिलों में लगातार बिजली कटौती की शिकायतें आ रही हैं। सूत्रों का कहना है कि मुख्यमंत्री ने इस दौरान अधिकारियों को चेतावनी भरे लहजे में कहा कि यदि जनता को राहत नहीं मिली तो जिम्मेदारी तय की जाएगी।
उत्तर प्रदेश में इस समय भीषण गर्मी का दौर जारी है। तापमान कई जिलों में 45 डिग्री सेल्सियस के आसपास पहुंच चुका है। ऐसे में बिजली कटौती लोगों के लिए सबसे बड़ी परेशानी बन गई है। ग्रामीण क्षेत्रों में कई-कई घंटे बिजली नहीं आने से पेयजल संकट भी गहरा गया है, जबकि शहरों में व्यापार और घरेलू कामकाज प्रभावित हो रहे हैं।
लखनऊ, कानपुर, वाराणसी, प्रयागराज, गोरखपुर, बरेली और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई जिलों से लगातार बिजली कटौती की शिकायतें सामने आ रही हैं। लोग सोशल मीडिया पर भी बिजली संकट को लेकर अपनी नाराजगी जाहिर कर रहे हैं।
कई जगहों पर स्थानीय नागरिकों ने बिजली विभाग के दफ्तरों के बाहर प्रदर्शन किए और नारेबाजी भी की। जनता का कहना है कि सरकार 24 घंटे बिजली आपूर्ति के दावे करती है, लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल अलग है।
बिजली संकट को लेकर विपक्षी दलों ने सरकार पर हमला तेज कर दिया है। समाजवादी पार्टी, कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल लगातार आरोप लगा रहे हैं कि सरकार बिजली व्यवस्था संभालने में विफल साबित हो रही है।
विपक्ष का कहना है कि भीषण गर्मी के बीच बिजली कटौती ने आम लोगों का जीवन मुश्किल कर दिया है। किसान, व्यापारी, छात्र और आम परिवार सभी परेशान हैं। विपक्षी नेताओं ने यह भी आरोप लगाया कि सरकार केवल दावे कर रही है, जबकि वास्तविक स्थिति लगातार खराब होती जा रही है। हालांकि सरकार का कहना है कि बिजली मांग में अचानक बढ़ोतरी और तकनीकी कारणों से कुछ स्थानों पर समस्याएं आई हैं, जिन्हें जल्द ठीक किया जाएगा।
इस बार बिजली संकट केवल विपक्ष का मुद्दा नहीं बना है, बल्कि सत्ता पक्ष के कई विधायक भी अपने क्षेत्रों में हो रही कटौती को लेकर नाराज बताए जा रहे हैं। सूत्रों के अनुसार कई भाजपा विधायकों ने सरकार और विभागीय अधिकारियों को अपने क्षेत्रों की समस्याओं से अवगत कराया है।
ग्रामीण इलाकों में लंबे समय तक बिजली न आने से किसानों को सिंचाई में दिक्कत हो रही है। वहीं शहरी क्षेत्रों में व्यापारिक गतिविधियां प्रभावित हो रही हैं। कई जनप्रतिनिधियों ने अधिकारियों पर लापरवाही का आरोप लगाया है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि सरकार इस मुद्दे को हल्के में नहीं लेना चाहती, क्योंकि बिजली व्यवस्था सीधे जनता की नाराजगी से जुड़ा विषय है।
बैठक में ऊर्जा मंत्री ए.के. शर्मा ने विभागीय अधिकारियों के साथ बिजली आपूर्ति व्यवस्था की समीक्षा की। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि जहां ट्रांसफार्मर खराब हैं, उन्हें तत्काल बदला जाए और लाइन फाल्ट की समस्याओं को तेजी से ठीक किया जाए।
इसके अलावा बिजली चोरी रोकने, ओवरलोडिंग कम करने और तकनीकी खामियों को दूर करने के लिए विशेष अभियान चलाने पर भी चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि जनता की शिकायतों का समयबद्ध समाधान सुनिश्चित किया जाए। बताया जा रहा है कि मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को फील्ड में जाकर वास्तविक स्थिति का जायजा लेने के निर्देश भी दिए हैं।
सूत्रों के अनुसार मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ बिजली व्यवस्था को लेकर जनता से सीधे फीडबैक भी ले रहे हैं। उन्हें विभिन्न माध्यमों से लगातार शिकायतें मिल रही थीं, जिसके बाद उन्होंने खुद स्थिति की समीक्षा शुरू की। सरकार अब जिलावार बिजली आपूर्ति की निगरानी और शिकायत निवारण व्यवस्था को और मजबूत करने की तैयारी कर रही है। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में बिजली विभाग में जवाबदेही तय करने के लिए कुछ प्रशासनिक बदलाव भी किए जा सकते हैं।
गर्मी के मौसम में बिजली की मांग रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गई है। एयर कंडीशनर, कूलर और अन्य उपकरणों के अत्यधिक इस्तेमाल के कारण बिजली खपत तेजी से बढ़ी है। ऐसे में वितरण व्यवस्था पर दबाव बढ़ना स्वाभाविक है। हालांकि विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि समय रहते पर्याप्त तैयारी नहीं होने के कारण स्थिति अधिक बिगड़ी है। कई जगह पुरानी लाइनें और कमजोर ट्रांसफार्मर भी संकट की बड़ी वजह बन रहे हैं।