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‘बाबा साहेब ने दिलाए संवैधानिक अधिकार’, मायावती ने बताया- बहुजन समाज को कैसे मिली राजनीतिक ताकत

UP Politics: 'दलितों के मसीहा हैं बाबासाहब', बहुजन समाज पार्टी की सुप्रीमो मायावती ने डॉक्टर भीमराव अंबेडकर के संघर्षों को याद करते हुए बड़ा बयान दिया है। मायावती ने बताया कि कैसे बाबासाहब ने दलितों को सत्ता की 'मास्टर चाबी' दिलाई और उसी पर अमल करते हुए कांशीराम ने बसपा का गठन किया। पढ़िए पूरी खबर...
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लखनऊ

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Mohsina Bano

Jul 10, 2026

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बसपा प्रमुख मायावती (फोटो: पत्रिका)

Mayawati Statement On BR Ambedkar And Kanshi Ram: बहुजन समाज पार्टी (BSP) की राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने भारतीय संविधान के निर्माता डॉक्टर भीमराव अंबेडकर और बसपा संस्थापक मान्यवर कांशीराम के संघर्षों को लेकर एक अहम बयान दिया है। मायावती ने कहा है कि बाबा साहब अंबेडकर ने ही देश के करोड़ों दलितों और उपेक्षित वर्गों को राजनीतिक सत्ता की मास्टर चाबी सौंपी थी जिस पर अमल करते हुए बहुजन समाज पार्टी का गठन किया गया था।

'दलितों के मसीहा हैं बाबासाहब'

मायावती ने अपने बयान में कहा कि यह बात पूरी दुनिया जानती है कि बाबासाहब डॉक्टर भीमराव अंबेडकर देश के करोड़ों दलितों और अन्य पिछड़े वर्गों के सच्चे मसीहा हैं। वे भारतीय संविधान के मूल निर्माता हैं। उन्होंने अपने जीवनकाल में अपनी काबिलियत और भारी सूझबूझ से समाज के दबे-कुचले लोगों के उत्थान के लिए अभूतपूर्व काम किए।

जातिवादियों के हर हथकंडे को किया फेल

बसपा सुप्रीमो ने कहा कि बाबासाहब ने उस दौर में जातिवादी मानसिकता वाले लोगों के साम, दाम, दंड और भेद जैसे हर हथकंडे का डटकर सामना किया। इन तमाम मुश्किलों को ध्यान में रखते हुए उन्होंने कमजोर वर्गों के लोगों को अपने पैरों पर खड़ा करने का संकल्प लिया। मायावती के मुताबिक, अंबेडकर ने ही इन वर्गों को अनेकों संवैधानिक और मूलभूत कानूनी अधिकार दिलाए, जिससे समाज में उन्हें बराबरी का दर्जा मिल सके।

ऐसे रखी गई बहुजन समाज पार्टी की नींव

अपने बयान में बहुजन समाज पार्टी के गठन का जिक्र करते हुए मायावती ने कहा कि बाबासाहब द्वारा दिलाए गए अधिकारों का पूरा लाभ लेने के लिए ही इन उपेक्षित वर्गों को केंद्र और राज्यों की राजनीतिक सत्ता की 'मास्टर चाबी' मिली थी। इसी मास्टर चाबी और बाबासाहब के दिखाए रास्ते पर पूरी तरह से अमल करते हुए मान्यवर कांशीराम ने बहुजन समाज पार्टी का गठन किया था ताकि शोषित समाज को उनका पूरा राजनीतिक हक मिल सके और वे सत्ता में भागीदारी कर सकें।

घड़ियाली आंसू बहाते हैं नेता

मायावती ने अपने बयान में कहा कि ये राजनीतिक दल पहले तो हिंसा, प्रदर्शन और सड़क जाम जैसी घटनाएं करवाकर समाज में अशांति फैलाते हैं। इसके बाद जब हालात बिगड़ जाते हैं तो इन्हीं दलों के नेता मौके पर पहुंचकर घड़ियाली आंसू बहाने लगते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस तरह के ड्रामे और दिखावे से पीड़ित लोगों को कभी न्याय नहीं मिल सकता। यह सब केवल अपना राजनीतिक स्वार्थ साधने के लिए किया जाता है।

कमजोर वर्गों से एकजुट होने की कि अपील

बसपा सुप्रीमो ने कहा कि इस तरह की सभी समस्याओं का एकमात्र समाधान शांतिपूर्ण और कानूनी रास्ते पर चलने में है। यह बिल्कुल वही रास्ता है जो संविधान निर्माता परमपूज्य बाबासाहब डॉक्टर भीमराव अंबेडकर ने समाज को दिखाया था। उन्होंने समाज के दबे-कुचले और कमजोर वर्गों से एकजुट होने की अपील की है ताकि वे सही दिशा में आगे बढ़ सकें।

वोट की ताकत है राजनीतिक सत्ता की मास्टर चाबी

मायावती ने कहा कि लोगों को अपनी 'वोट की ताकत' को पहचानना चाहिए। आपसी एकता और वोट की ताकत के दम पर ही राजनीतिक सत्ता को हासिल किया जा सकता है। उन्होंने राजनीतिक सत्ता को समाज की अनगिनत कठिनाइयों और समस्याओं को दूर करने वाली मास्टर चाबी बताया है। अपने बयान के अंत में मायावती ने यह भी कहा कि बहुजन समाज पार्टी बाबासाहब के बताए इसी रास्ते पर पूरी तरह से प्रतिबद्ध है और बिना भटके अपने लक्ष्य को हासिल करने के लिए लगातार काम कर रही है।