Lucknow Airport: घने कोहरे और खराब मौसम के कारण रविवार तड़के लखनऊ एयरपोर्ट पर उड़ान संचालन प्रभावित रहा। दम्माम से आ रही फ्लाइनेस की अंतरराष्ट्रीय फ्लाइट को कम दृश्यता के चलते लखनऊ में लैंडिंग की अनुमति नहीं मिली और उसे दिल्ली डायवर्ट करना पड़ा। विमान में लगभग 200 यात्री सवार थे।
Dense Fog Disrupts Air Travel: उत्तर भारत में लगातार बने खराब मौसम और घने कोहरे का असर अब हवाई यातायात पर भी साफ दिखाई देने लगा है। रविवार सुबह लखनऊ के चौधरी चरण सिंह अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे पर कम दृश्यता के कारण अंतरराष्ट्रीय उड़ानों का संचालन प्रभावित हुआ। दम्माम (सऊदी अरब) से लखनऊ आ रही फ्लाइनेस एयरलाइन की फ्लाइट को लैंडिंग की अनुमति नहीं मिल सकी और अंततः उसे दिल्ली डायवर्ट करना पड़ा। विमान में लगभग 200 यात्री सवार थे, जिन्हें तय समय पर लखनऊ पहुँचने के बजाय लंबी देरी और असुविधा का सामना करना पड़ा।
एयरपोर्ट सूत्रों के अनुसार, फ्लाइट ने लखनऊ एयरपोर्ट के ऊपर करीब 25–30 मिनट तक होल्डिंग पैटर्न में चक्कर लगाए। पायलट ने कई बार लैंडिंग की कोशिश की, लेकिन घने कोहरे के कारण रनवे की दृश्यता न्यूनतम सुरक्षा मानकों से नीचे बनी रही। ऐसी स्थिति में विमान को उतारना यात्रियों और क्रू की सुरक्षा के लिहाज़ से जोखिम भरा होता है। एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) ने मौसम की स्थिति का लगातार आकलन किया, लेकिन दृश्यता में अपेक्षित सुधार न होने पर विमान को वैकल्पिक हवाई अड्डे की ओर मोड़ने का निर्णय लिया गया।
रविवार सुबह लखनऊ और आसपास के इलाकों में घना कोहरा छाया रहा। मौसम विभाग के अनुसार, सर्दी के इस दौर में हवा की नमी और कम तापमान के कारण ज़मीन के पास धुंध की परत गहरी हो जाती है, जिससे रनवे की दृश्यता (Runway Visual Range) काफी घट जाती है। एटीसी के नियमों के अनुसार, यदि दृश्यता निर्धारित सीमा से नीचे चली जाए तो विमान की लैंडिंग रोक दी जाती है, भले ही विमान तकनीकी रूप से आधुनिक नेविगेशन सिस्टम से लैस हो। विशेषज्ञों का कहना है कि अंतिम निर्णय हमेशा यात्री सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए लिया जाता है।
एटीसी के निर्देश पर फ्लाइट को दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे की ओर डायवर्ट किया गया। दिल्ली एयरपोर्ट पर मौसम अपेक्षाकृत बेहतर था, जिससे विमान सुरक्षित रूप से उतारा जा सका। एयरलाइन ने यात्रियों को आगे लखनऊ पहुँचाने के लिए वैकल्पिक इंतजाम किए। कुछ यात्रियों को कनेक्टिंग फ्लाइट से भेजने की तैयारी की गई, जबकि अन्य के लिए बस सेवा की व्यवस्था पर भी विचार किया गया। हालाँकि, इससे यात्रियों की यात्रा अवधि कई घंटे बढ़ गई।
विमान में सवार अधिकांश यात्री खाड़ी देशों से अपने घर लौट रहे प्रवासी भारतीय थे। अचानक डायवर्जन की सूचना मिलने से यात्रियों में चिंता और बेचैनी देखी गई। एक यात्री ने बताया कि “हम लखनऊ के ऊपर काफी देर तक घूमते रहे। पायलट ने बताया कि कोहरे की वजह से उतरना संभव नहीं है। बाद में दिल्ली भेज दिया गया, जिससे आगे की यात्रा मुश्किल हो गई। हालाँकि, कई यात्रियों ने यह भी माना कि सुरक्षा सर्वोपरि है और खराब मौसम में जोखिम लेने से बेहतर है वैकल्पिक हवाईअड्डे पर उतरना।
एयरपोर्ट अधिकारियों का कहना है कि सर्दियों में कोहरे के कारण उड़ानों के डायवर्जन की घटनाएं असामान्य नहीं हैं। लखनऊ एयरपोर्ट पर कैटेगरी-I इंस्ट्रूमेंट लैंडिंग सिस्टम (ILS) उपलब्ध है, जो कम दृश्यता में मदद करता है, लेकिन अत्यधिक घने कोहरे में यह भी पर्याप्त नहीं होता। अधिकारियों ने बताया कि ATC ने सभी मानकों का पालन करते हुए निर्णय लिया। किसी भी प्रकार की जल्दबाजी या दबाव में लैंडिंग की अनुमति नहीं दी गई।
दिसंबर से फरवरी के बीच उत्तर भारत के कई एयरपोर्ट-विशेषकर लखनऊ, वाराणसी, अमृतसर और पटना को कोहरे के कारण नियमित रूप से परिचालन चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। सुबह और देर रात की उड़ानें सबसे अधिक प्रभावित होती हैं। एविएशन विशेषज्ञों का कहना है कि पायलटों को ऐसी परिस्थितियों में विशेष प्रशिक्षण दिया जाता है, लेकिन जब दृश्यता अत्यधिक कम हो, तो डायवर्जन ही सबसे सुरक्षित विकल्प होता है।
एयरलाइन और एयरपोर्ट प्रबंधन ने यात्रियों को सलाह दी है कि सर्दियों में यात्रा से पहले उड़ान की स्थिति की जानकारी अवश्य लें। मौसम खराब होने पर देरी या डायवर्जन की संभावना बनी रहती है।