
पीएम सूर्य घर योजना: यूपी में ऊर्जा क्रांति, बिजली बिल और पर्यावरण में बड़ा बदलाव (फोटो सोर्स : WhatsApp News Group)
PM Surya Ghar Scheme: उत्तर प्रदेश ने स्वच्छ और हरित ऊर्जा के क्षेत्र में नया कीर्तिमान स्थापित कर दिखाया है। प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के चलते उत्तर प्रदेश न केवल देश के अग्रणी राज्यों में शामिल हुआ है, बल्कि यह राज्य ऊर्जा आत्मनिर्भरता और हरित विकास की दिशा में तेज़ी से अग्रसर भी हो रहा है। राष्ट्रीय पोर्टल के आंकड़ों के अनुसार अब तक देशभर में 58.36 लाख से अधिक आवेदन प्राप्त हुए हैं, जिनमें अकेले उत्तर प्रदेश में 10.94 लाख से अधिक आवेदन दर्ज किए गए हैं। यह आंकड़ा प्रदेश के आम नागरिकों की सक्रिय भागीदारी और सौर ऊर्जा के प्रति बढ़ते भरोसे को दर्शाता है।
योगी सरकार की सक्रिय नीतियों और यूपीनेडा तथा वितरण कंपनियों के समन्वित प्रयासों के चलते अब तक 3,57,879 रूफटॉप सोलर सिस्टम प्रदेश में स्थापित किए जा चुके हैं। इससे उत्तर प्रदेश की कुल स्थापित सौर क्षमता 1,227.05 मेगावाट तक पहुंच गई है। योजना के तहत उपभोक्ताओं को अब तक ₹2,440.62 करोड़ की केंद्रीय सब्सिडी और लगभग ₹600 करोड़ की राज्य सब्सिडी प्रदान की जा चुकी है।
रूफटॉप सोलर सिस्टम से उपभोक्ताओं के बिजली बिल में 60–90 प्रतिशत तक की कमी आई है। औसतन उपभोक्ता ₹1,500–3,000 प्रति माह तक की बचत कर रहे हैं। इसके साथ ही 25 वर्षों तक स्वच्छ और स्थायी बिजली का लाभ, नेट मीटरिंग के जरिए अतिरिक्त उत्पादन को ग्रिड में समायोजित करने जैसी सुविधाएँ भी मिल रही हैं।
प्रदेश में प्रतिदिन 50 लाख यूनिट से अधिक ग्रीन सोलर बिजली का उत्पादन हो रहा है। इससे वितरण कंपनियों पर पीक डिमांड का दबाव कम हुआ है और ऊर्जा आपूर्ति प्रणाली अधिक स्थिर और सक्षम बनी है। यह पहल उत्तर प्रदेश को ऊर्जा आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में मजबूत आधार तैयार कर रही है।
पीएम सूर्य घर योजना के जरिए उत्तर प्रदेश में प्रतिवर्ष लगभग 13–15 लाख टन CO₂ उत्सर्जन में कमी आ रही है। कोयला आधारित बिजली पर निर्भरता घटने से वायु प्रदूषण और ग्रीन हाउस गैसों में उल्लेखनीय कमी हुई है। यह पहल भारत के नेट-ज़ीरो 2070 लक्ष्य को मजबूती प्रदान करती है।
योगी सरकार पीएम सूर्य घर योजना को भविष्य में यूनिफाइड एनर्जी इंटरफेस (UEI) आधारित डिजिटल ऊर्जा ढांचे से जोड़ने पर काम कर रही है। इसके तहत:
को बैंकिंग और वित्तीय सिस्टम से जोड़ा जाएगा। इसका उद्देश्य ईवी चार्जिंग, ग्रीन फाइनेंसिंग, कार्बन क्रेडिट ट्रैकिंग और ऊर्जा आधारित वित्तीय उत्पादों को बढ़ावा देना है।
इस पहल से एमएसएमई और निर्यातकों की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता भी मजबूत होगी। ईयू-इंडिया एफटीए और सीबीएएम (Carbon Border Adjustment Mechanism) के संदर्भ में प्रदेश की उत्पादक इकाइयों को अधिक अवसर प्राप्त होंगे।
फिल्म, तकनीकी और ऊर्जा सेक्टरों में रोजगार के साथ-साथ स्थानीय युवाओं के लिए नए अवसर खुल रहे हैं। सौर उत्पादन, नेटवर्क प्रबंधन और निगरानी के क्षेत्र में विशेषज्ञों की मांग बढ़ेगी।
केंद्र और राज्य सरकार की सब्सिडी ने सौर उपकरण लगवाने की प्रक्रिया को आसान और किफायती बनाया।
यह सीधे आम उपभोक्ताओं के घरों और व्यवसायों में आर्थिक राहत का कारण बन रहा है।
Published on:
01 Feb 2026 04:40 am

बड़ी खबरें
View Allलखनऊ
उत्तर प्रदेश
ट्रेंडिंग
