लखनऊ

UP Politics: धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद यूपी में नई सियासी बहस, कुर्मी बनाम यादव की चर्चा के बीच राजभर ने अखिलेश से पूछा सवाल

Political News UP: धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद यूपी में कुर्मी बनाम यादव की राजनीतिक बहस तेज हो गई है। ओम प्रकाश राजभर ने अखिलेश यादव से बड़ा सवाल पूछते हुए नया सियासी विवाद खड़ा कर दिया।
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Jul 30, 2026
Dharmendra Pradhan Resignation OP Rajbhar Akhilesh Yadav
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर नई सियासत

Dharmendra Pradhan Resignation: केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद उत्तर प्रदेश की राजनीति में नया सियासी विमर्श शुरू हो गया है। विपक्ष जहां इसे छात्रों के आंदोलन और पेपर लीक जैसे मुद्दों से जोड़कर देख रहा है, वहीं सत्तापक्ष के कुछ नेता इसे जातीय राजनीति के नजरिए से भी पेश कर रहे हैं। इसी कड़ी में सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और प्रदेश सरकार में मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव पर निशाना साधा है।

राजभर ने अखिलेश यादव से पूछा सवाल

ओम प्रकाश राजभर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर पोस्ट करते हुए अखिलेश यादव से सवाल किया कि यदि धर्मेंद्र प्रधान की जाति कुर्मी के बजाय यादव होती, तब भी क्या वह उनके इस्तीफे की मांग करते या उनका बचाव करते। राजभर ने अपने पोस्ट में लिखा कि उन्हें इस सवाल के जवाब का इंतजार रहेगा।

जातीय राजनीति को लेकर तेज हुई चर्चा

धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद प्रदेश की राजनीति में यह चर्चा भी तेज हो गई है कि क्या इस पूरे घटनाक्रम को 'कुर्मी बनाम यादव' के राजनीतिक विमर्श की ओर मोड़ने की कोशिश हो रही है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह बहस आने वाले विधानसभा चुनावों के मद्देनजर पिछड़े वर्ग के वोट बैंक को प्रभावित करने की रणनीति का हिस्सा भी हो सकती है।

पेपर लीक आंदोलन की भी रही पृष्ठभूमि

नीट समेत विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक के मुद्दे पर छात्रों के विरोध प्रदर्शन के दौरान विपक्षी दलों, खासकर समाजवादी पार्टी और कांग्रेस ने आंदोलन का समर्थन किया था। अब धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद राजनीतिक बयानबाजी नए मोड़ पर पहुंच गई है।

2027 चुनाव से पहले OBC वोट बैंक पर नजर

उत्तर प्रदेश में कुर्मी और यादव दोनों ही प्रभावशाली पिछड़ी जातियां हैं और विधानसभा चुनावों में इनकी भूमिका अहम रहती है। ऐसे में इस मुद्दे के जरिए दोनों समुदायों के बीच राजनीतिक संदेश देने की कोशिशें तेज हो सकती हैं।

2024 लोकसभा चुनाव में मिला था सपा को फायदा

पिछले लोकसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी ने कुर्मी समुदाय के बीच अपनी पकड़ मजबूत की थी। इसका असर चुनावी नतीजों में भी देखने को मिला और पार्टी के टिकट पर कुर्मी समाज से कई उम्मीदवार सांसद चुने गए। ऐसे में माना जा रहा है कि आगामी चुनावों से पहले इस सामाजिक समीकरण को लेकर राजनीतिक दलों की सक्रियता और बढ़ सकती है।

Updated on:
30 Jul 2026 08:40 am
Published on:
30 Jul 2026 08:40 am