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Dog Attack: लखनऊ में डॉग अटैक का खतरा बढ़ा, मासूम बना शिकार, जानिए अब तक कितनी घटनाएं

लखनऊ में आवारा कुत्तों का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है। मासूमों पर हमलों से दहशत का माहौल है, जबकि शेल्टर होम योजना अब भी कागजों तक सीमित बनी हुई है।

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Mar 02, 2026
डेढ़ लाख आवारा कुत्तों के बीच डर में जी रही राजधानी, सुप्रीम कोर्ट के आदेश भी बेअसर (फोटो सोर्स : भाषा WhatsApp News Group)

Dog Attack Crisis in Lucknow: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ इन दिनों आवारा कुत्तों के बढ़ते आतंक से जूझ रही है। शहर की सड़कों, कॉलोनियों और ग्रामीण इलाकों में कुत्तों के हमलों की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। हाल ही में मलिहाबाद क्षेत्र में मासूम अंशिका की दर्दनाक मौत ने पूरे शहर को झकझोर दिया है। इसके बावजूद नगर निगम की व्यवस्थाएं अभी भी कागजी योजनाओं से आगे नहीं बढ़ पाई हैं। सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद शेल्टर होम निर्माण की प्रक्रिया जमीन चिह्नित करने तक सीमित है।

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डेढ़ लाख आवारा कुत्ते, सुरक्षा व्यवस्था नाकाम

नगर निगम के अनुमान के अनुसार लखनऊ शहर में आवारा कुत्तों की संख्या करीब 1.5 लाख तक पहुंच चुकी है। तेजी से बढ़ती आबादी के कारण शहर के अधिकांश इलाकों में कुत्तों के झुंड खुलेआम घूमते दिखाई देते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि एक शेल्टर होम में अधिकतम 5000 कुत्तों को रखा जा सकता है। इस आधार पर राजधानी को कम से कम 30 शेल्टर होम की जरूरत है, लेकिन नगर निगम फिलहाल केवल दो शेल्टर होम बनाने की तैयारी कर रहा है। नगर निगम अधिकारियों का तर्क है कि सभी कुत्तों को पकड़ना संभव नहीं है और केवल हिंसक या खतरनाक कुत्तों को चिन्हित कर शेल्टर में रखा जाएगा। हालांकि विशेषज्ञ इसे अपर्याप्त कदम मान रहे हैं।

बजट मिला, लेकिन काम की रफ्तार बेहद धीमी

नए वित्तीय वर्ष के बजट में शेल्टर होम निर्माण के लिए धन आवंटित किया गया है, लेकिन धरातल पर कोई ठोस प्रगति दिखाई नहीं दे रही। स्थानीय लोगों का कहना है कि हर साल योजनाएं बनती हैं, लेकिन कुत्तों के आतंक से राहत नहीं मिलती। ऐसे में लोग खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं और रेबीज संक्रमण का खतरा भी बढ़ता जा रहा है।

मासूम अंशिका की मौत ने खोली सिस्टम की पोल

मलिहाबाद के रहीमाबाद क्षेत्र के तरौना गांव में कुत्तों के हमले में मासूम अंशिका की मौत ने प्रशासनिक तैयारियों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीण शमशाद बताते हैं कि गांव के पास बबूल के घने जंगलों में रहने वाले कुत्ते पहले मृत जानवरों को खाते थे, लेकिन अब वे इंसानों पर हमला करने लगे हैं। कुछ दिन पहले बकरी चरा रही एक महिला को भी कुत्तों ने घेर लिया था। खेतों में काम कर रहे लोगों ने मुश्किल से उसकी जान बचाई। ग्रामीण राहुल यादव के अनुसार अब लोग शाम होते ही घरों से बाहर निकलने से डरते हैं।

रात में निकलना बना खतरे से खाली नहीं

ग्रामीण क्षेत्रों के अलावा शहर की कॉलोनियों में भी हालात गंभीर हैं। बाइक सवारों, स्कूल जाने वाले बच्चों और बुजुर्गों को कुत्तों के झुंड दौड़ा लेते हैं। लोगों का कहना है कि रात में अकेले निकलना लगभग असंभव हो गया है। कई मोहल्लों में सुबह वॉक पर जाने वाले लोगों ने भी बाहर निकलना कम कर दिया है।

लगातार बढ़ रही हमलों की घटनाएं

लखनऊ में पिछले कुछ वर्षों में डॉग अटैक की कई गंभीर घटनाएं सामने आई हैं.

  • 7 फरवरी 2026- रहीमाबाद के कटरा में कल्लू पर हमला
  • 6 फरवरी 2026 - गुडंबा में 5 वर्षीय अर्नव पांडेय घायल
  • 22 जनवरी 2026 - पांडेयगंज में 5 वर्षीय पीहू पर हमला
  • 22 अक्टूबर 2025 - तरौना में 4 साल की प्रिया घायल
  • 12 अगस्त 2025 -पीजीआई व मलिहाबाद क्षेत्र में दो लोग घायल
  • 4 फरवरी 2025- इस्माइलगंज में महिला पर हमला
  • 12 जुलाई 2022 - कैसरबाग में पालतू पिटबुल ने मालकिन की जान ली
  • 7 अप्रैल 2022 -ठाकुरगंज में 7 वर्षीय बच्चे की मौत
  • ये घटनाएं बताती हैं कि समस्या लगातार गंभीर होती जा रही है।

सुप्रीम कोर्ट का सख्त रुख

आवारा कुत्तों के बढ़ते हमलों को लेकर सुप्रीम कोर्ट पहले ही नाराजगी जता चुका है। 7 नवंबर 2025 को शीर्ष अदालत ने आदेश दिया था कि स्कूल, अस्पताल, रेलवे स्टेशन, बस अड्डे और पार्क जैसे सार्वजनिक स्थानों से आवारा कुत्तों को हटाकर स्थायी शेल्टर होम में रखा जाए। 13 जनवरी 2026 की सुनवाई में कोर्ट ने चेतावनी दी कि यदि राज्य सरकारें नियंत्रण में विफल रहती हैं तो हर हमले और मौत के लिए मुआवजा देना होगा। अदालत ने यह भी कहा कि सार्वजनिक स्थानों पर कुत्तों को खाना खिलाने वाले लोग भी हमलों की जिम्मेदारी से बच नहीं सकेंगे। उन्हें कुत्तों को गोद लेने की सलाह दी गई।

रेबीज का बढ़ता खतरा

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि कुत्तों के काटने की घटनाओं के साथ रेबीज संक्रमण का खतरा भी बढ़ रहा है। सरकारी अस्पतालों में एंटी-रेबीज इंजेक्शन की मांग लगातार बढ़ी है। डॉक्टरों के अनुसार समय पर इलाज न मिलने पर रेबीज जानलेवा साबित हो सकता है।

नगर निगम की चुनौतियां

नगर निगम अधिकारियों के अनुसार सबसे बड़ी समस्या है,पर्याप्त जमीन की कमी,प्रशिक्षित स्टाफ का अभाव,नसबंदी कार्यक्रम की धीमी गति,नागरिकों द्वारा अनियंत्रित फीडिंग,हालांकि नागरिकों का कहना है कि प्रशासनिक इच्छाशक्ति की कमी भी बड़ी वजह है।

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