
Financial Crisis hip surgery Treatment: आर्थिक तंगी के कारण लंबे समय से इलाज से वंचित एक मरीज को बलरामपुर चिकित्सालय में आखिरकार उपचार मिल सका। दोनों कूल्हों की गंभीर बीमारी से जूझ रहे राजेंद्र नगर निवासी मोहम्मद इमरान को पिछले करीब सात महीने से चलने-फिरने में काफी परेशानी हो रही थी। बीमारी बढ़ने के कारण उनकी रोजमर्रा की जिंदगी भी प्रभावित हो गई थी। आर्थिक स्थिति कमजोर होने और आयुष्मान कार्ड नहीं होने के कारण वह कई अस्पतालों में परामर्श लेने के बावजूद जरूरी उपचार नहीं करा पा रहे थे। ऐसे में बलरामपुर चिकित्सालय के चिकित्सकों और चिकित्सा दल के प्रयास से उनका उपचार संभव हो सका। अस्पताल में आवश्यक जांच और चिकित्सकीय तैयारियों के बाद 22 सितंबर 2026 को उनकी शल्यक्रिया सफलतापूर्वक की गई।
राजेंद्र नगर, लखनऊ निवासी मोहम्मद इमरान पुत्र मोहम्मद हारून दोनों कूल्हों के अवस्कुलर नेक्रोसिस (एवस्कुलर नेक्रोसिस) से पीड़ित थे। इस बीमारी के चलते उनके कूल्हों के जोड़ प्रभावित हो गए थे और धीरे-धीरे चलने-फिरने की क्षमता कम होती जा रही थी। करीब सात महीने से वह गंभीर परेशानी का सामना कर रहे थे। स्थिति यह थी कि सामान्य दैनिक गतिविधियां भी उनके लिए मुश्किल होती जा रही थीं। बीमारी के कारण लगातार बढ़ती तकलीफ ने उनकी दिनचर्या को पूरी तरह प्रभावित कर दिया था। चलने, उठने-बैठने और रोजमर्रा के जरूरी कामों में उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ रहा था। दर्द और शारीरिक परेशानी के बावजूद आर्थिक मजबूरियां उनके उपचार की राह में सबसे बड़ी बाधा बनी हुई थीं।
मोहम्मद इमरान ने बीमारी के उपचार के लिए अलग-अलग अस्पतालों में चिकित्सकीय परामर्श लिया। चिकित्सकों ने उनकी स्थिति को देखते हुए कूल्हे के जोड़ के प्रत्यारोपण यानी टोटल हिप रिप्लेसमेंट की सलाह दी थी। उपचार की जरूरत स्पष्ट होने के बावजूद आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण वह आगे की प्रक्रिया नहीं करा सके। परिवार के सामने इलाज के खर्च की चिंता थी। इसके अलावा उनके पास आयुष्मान कार्ड भी नहीं था, जिससे योजना के तहत उपचार का लाभ मिल सके। ऐसे में बीमारी के साथ उनका संघर्ष लगातार लंबा होता गया। उपचार न मिलने से कूल्हों की समस्या के कारण चलने-फिरने में कठिनाई भी बढ़ती गई।
लगातार बढ़ती समस्या और जीवन प्रभावित होने के बाद मोहम्मद इमरान ने बलरामपुर चिकित्सालय, लखनऊ के निदेशक एवं मुख्य चिकित्सा अधीक्षक से संपर्क किया। मरीज की स्थिति को देखते हुए अस्पताल प्रशासन की ओर से उपचार उपलब्ध कराने की दिशा में आवश्यक पहल की गई। निदेशक के मार्गदर्शन में मरीज को 9 सितंबर 2026 को बलरामपुर चिकित्सालय में भर्ती किया गया। इसके बाद चिकित्सकीय टीम ने मरीज की स्थिति का विस्तृत मूल्यांकन किया। आवश्यक जांच कराई गईं और शल्यक्रिया से पहले की सभी चिकित्सकीय तैयारियां पूरी की गईं। मरीज की स्वास्थ्य स्थिति को देखते हुए उपचार की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया गया।
मरीज के उपचार में बलरामपुर चिकित्सालय की विशेषज्ञ टीम ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। शल्यक्रिया में मुख्य सर्जन डॉ. अजय कुमार यादव के साथ मुख्य एनेस्थेटिस्ट डॉ. सुरेश चंद्र कौशल, एनेस्थेटिस्ट डॉ. देशराज, सीनियर रेजिडेंट डॉ. सचिन यादव और जूनियर रेजिडेंट डॉ. अंकित लक्षकार शामिल रहे। ऑपरेशन थिएटर की व्यवस्थाओं और शल्य क्रिया के दौरान आवश्यक तकनीकी सहयोग के लिए ओटी तकनीशियन श्री दीपक दुबे सहित चिकित्सा दल ने सहयोग किया। मरीज की स्थिति का चिकित्सकीय मूल्यांकन करने के बाद विशेषज्ञों की निगरानी में शल्य क्रिया की तैयारी पूरी की गई।
सभी आवश्यक चिकित्सकीय जांच और प्री-ऑपरेटिव तैयारियां पूरी होने के बाद 22 सितंबर 2026 को बलरामपुर चिकित्सालय में मरीज की आवश्यक शल्यक्रिया सफलतापूर्वक संपन्न की गई। ऑपरेशन के बाद मरीज की स्थिति स्थिर बताई गई है। फिलहाल वह चिकित्सकीय निगरानी में है और स्वास्थ्य लाभ कर रहा है। चिकित्सकों की टीम लगातार मरीज की स्थिति पर नजर रख रही है। शल्यक्रिया के बाद की देखभाल और चिकित्सकीय निगरानी को उपचार का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है, ताकि मरीज को आगे की रिकवरी में आवश्यक सहयोग मिल सके।
मोहम्मद इमरान का मामला यह भी सामने लाता है कि आर्थिक कठिनाइयों के कारण कई बार गंभीर बीमारी से पीड़ित मरीज उपचार के लिए अस्पतालों तक पहुंचने के बावजूद जरूरी सर्जरी नहीं करा पाते। इलाज की जरूरत और उसे वहन करने की क्षमता के बीच का अंतर ऐसे मरीजों के लिए बड़ी चुनौती बन जाता है। इस मामले में बलरामपुर चिकित्सालय के निदेशक के मार्गदर्शन और चिकित्सकों व चिकित्सा दल के प्रयासों से मरीज को आवश्यक उपचार मिल सका। लंबे समय से बीमारी की परेशानी झेल रहे इमरान के लिए यह उपचार राहत की बड़ी वजह बना है। अस्पताल की इस पहल को आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों के लिए उपचार की उम्मीद के रूप में देखा जा रहा है।
मोहम्मद इमरान लंबे समय से दोनों कूल्हों की बीमारी के कारण सामान्य जीवन जीने में कठिनाई महसूस कर रहे थे। आर्थिक अभाव के कारण उपचार में देरी होने के बावजूद बलरामपुर चिकित्सालय पहुंचने के बाद उनके इलाज की प्रक्रिया आगे बढ़ी और आवश्यक शल्यक्रिया पूरी की गई। अब ऑपरेशन के बाद मरीज चिकित्सकीय निगरानी में है। चिकित्सकीय टीम की देखरेख में उसके स्वास्थ्य में सुधार की प्रक्रिया जारी है। यह प्रकरण उन मरीजों के लिए उम्मीद का संदेश भी देता है, जो आर्थिक परिस्थितियों के कारण गंभीर बीमारियों का उपचार लंबे समय तक नहीं करा पाते। बलरामपुर चिकित्सालय में हुए इस उपचार से एक जरूरतमंद मरीज को समय पर चिकित्सकीय सहायता मिल सकी और उसके सामान्य जीवन की ओर लौटने की उम्मीद मजबूत हुई है।