Free Smart Meter UP: उत्तर प्रदेश पावर कारपोरेशन लिमिटेड लखनऊ में पुराने बिजली मीटरों को मुफ्त स्मार्ट मीटर से बदल रहा है। कर्मचारी शुल्क मांगें तो उपभोक्ता तुरंत शिकायत कर सकते हैं।
Smart Meter Lucknow: लखनऊ में बिजली व्यवस्था को आधुनिक और पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से उत्तर प्रदेश पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड ने पुराने बिजली मीटरों को स्मार्ट मीटर से बदलने का अभियान तेज कर दिया है। इस योजना के तहत दूसरे चरण में शहर के कई इलाकों में पुराने मीटरों को हटाकर स्मार्ट मीटर लगाए जा रहे हैं। खास बात यह है कि इस पूरी प्रक्रिया में उपभोक्ताओं से किसी भी प्रकार का शुल्क नहीं लिया जाएगा।
बिजली विभाग ने स्पष्ट किया है कि यदि मीटर बदलने के नाम पर कोई कर्मचारी या एजेंसी उपभोक्ताओं से पैसे की मांग करता है, तो इसकी तुरंत शिकायत की जा सकती है। अधिकारियों ने उपभोक्ताओं से अपील की है कि वे ऐसे मामलों में सतर्क रहें और किसी भी प्रकार का भुगतान न करें।
बिजली विभाग के अधिकारियों के अनुसार राजधानी लखनऊ में पुराने मीटरों को बदलकर स्मार्ट मीटर लगाने का काम तेजी से चल रहा है। इस कार्य की जिम्मेदारी इंटेली स्मार्ट कंपनी को दी गई है। कंपनी के कर्मचारी बिजली विभाग के निर्देशों के अनुसार घर-घर जाकर पुराने मीटर हटाकर नए स्मार्ट मीटर लगा रहे हैं। लखनऊ मध्य जोन के अधीक्षण अभियंता (वाणिज्य) मुकेश त्यागी ने बताया कि स्मार्ट मीटर लगाने की प्रक्रिया पूरी तरह निशुल्क है। उपभोक्ताओं को इसके लिए किसी भी प्रकार का शुल्क देने की आवश्यकता नहीं है।
विभाग द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार राजधानी के कई प्रमुख क्षेत्रों में यह अभियान चलाया जा रहा है। जिन क्षेत्रों में पुराने मीटरों को बदलकर स्मार्ट मीटर लगाए जा रहे हैं, उनमें प्रमुख रूप से ऐशबाग, राजाजीपुरम, चौक, ठाकुरगंज, अमीनाबाद, रेजिडेंसी, राजभवन खंड और हुसैनगंज शामिल हैं।
इन क्षेत्रों में बड़ी संख्या में उपभोक्ताओं के घरों और प्रतिष्ठानों पर पुराने मीटर लगे हुए हैं, जिन्हें अब नई तकनीक से लैस स्मार्ट मीटर से बदला जा रहा है। बिजली विभाग का लक्ष्य है कि आने वाले समय में पूरे शहर में स्मार्ट मीटर की व्यवस्था लागू की जाए, जिससे बिजली आपूर्ति और बिलिंग व्यवस्था अधिक पारदर्शी और सुविधाजनक बन सके।
स्मार्ट मीटर लगने के बाद उपभोक्ताओं को कई तरह की सुविधाएं मिलेंगी। इन मीटरों की मदद से बिजली खपत का सटीक आंकलन संभव होगा और बिलिंग प्रक्रिया भी अधिक पारदर्शी हो जाएगी। स्मार्ट मीटर की खासियत यह है कि इसमें बिजली की खपत का डेटा सीधे बिजली विभाग के सर्वर तक पहुंच जाता है। इससे मीटर रीडिंग लेने के लिए किसी कर्मचारी को घर-घर जाने की जरूरत नहीं पड़ती। इसके अलावा उपभोक्ता अपने मोबाइल या ऑनलाइन माध्यम से भी अपनी बिजली खपत की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। इस व्यवस्था से गलत बिल आने की समस्या में भी काफी हद तक कमी आने की उम्मीद है। साथ ही बिजली चोरी पर भी प्रभावी नियंत्रण लगाया जा सकेगा।
अधीक्षण अभियंता (वाणिज्य) मुकेश त्यागी ने बताया कि स्मार्ट मीटर लगाने के लिए बिजली विभाग द्वारा कंपनी को सभी आवश्यक उपकरण उपलब्ध कराए गए हैं। इनमें स्मार्ट मीटर, केबल, क्लैंप, नट-बोल्ट और अन्य तकनीकी उपकरण शामिल हैं। उन्होंने कहा कि चूंकि ये सभी उपकरण विभाग की ओर से मुफ्त उपलब्ध कराए गए हैं, इसलिए उपभोक्ताओं से किसी भी प्रकार का शुल्क लेने का कोई औचित्य नहीं है। यदि कोई कर्मचारी उपभोक्ताओं पर पैसे देने का दबाव बनाता है तो यह पूरी तरह से गलत और नियमों के विरुद्ध है।
बिजली विभाग के अधिकारियों को हाल ही में कुछ शिकायतें प्राप्त हुई हैं कि कुछ कर्मचारी मीटर बदलने के दौरान उपभोक्ताओं से मीटर या केबल के नाम पर पैसे मांग रहे हैं। इस पर विभाग ने कड़ा रुख अपनाते हुए स्पष्ट किया है कि ऐसी गतिविधियों में शामिल कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। विभाग ने उपभोक्ताओं से अपील की है कि यदि कोई कर्मचारी मीटर बदलने के बदले पैसे मांगता है तो उसकी जानकारी तुरंत विभाग को दें।
उपभोक्ताओं की सुविधा के लिए बिजली विभाग ने शिकायत दर्ज कराने के कई विकल्प उपलब्ध कराए हैं। यदि किसी उपभोक्ता से कर्मचारी पैसे मांगता है, तो वह संबंधित अधिकारी को मोबाइल नंबर के माध्यम से इसकी सूचना दे सकता है, इसके अलावा जिले भर के उपभोक्ता बिजली विभाग के कंट्रोल रूम नंबर 1912 पर भी कॉल करके शिकायत दर्ज करा सकते हैं। शिकायत मिलने के बाद विभागीय अधिकारी मामले की जांच करेंगे और दोषी पाए जाने पर संबंधित कर्मचारी या एजेंसी के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
बिजली विभाग ने उपभोक्ताओं से अपील की है कि वे स्मार्ट मीटर लगाने के दौरान पूरी सतर्कता बरतें। मीटर बदलने आए कर्मचारियों से उनका पहचान पत्र अवश्य देखें और बिना किसी आधिकारिक रसीद के किसी भी प्रकार का भुगतान न करें। अधिकारियों का कहना है कि स्मार्ट मीटर परियोजना का उद्देश्य बिजली व्यवस्था को आधुनिक बनाना और उपभोक्ताओं को बेहतर सेवा प्रदान करना है। इसलिए किसी भी तरह की अनियमितता को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि स्मार्ट मीटर प्रणाली लागू होने से बिजली वितरण व्यवस्था में बड़ा बदलाव आएगा। इससे बिजली खपत का सटीक रिकॉर्ड मिलेगा और उपभोक्ताओं को समय पर सही बिल प्राप्त होगा।इसके साथ ही बिजली विभाग को भी लाइन लॉस और बिजली चोरी पर नियंत्रण करने में मदद मिलेगी। यही कारण है कि सरकार और बिजली विभाग इस परियोजना को तेजी से लागू करने में जुटे हुए हैं।
बिजली विभाग के अनुसार लखनऊ में स्मार्ट मीटर लगाने का अभियान चरणबद्ध तरीके से चलाया जा रहा है। पहले चरण में कई क्षेत्रों में मीटर बदलेजा चुके हैं, जबकि दूसरे चरण में अन्य इलाकों में यह काम तेजी से किया जा रहा है। आने वाले समय में पूरे शहर में स्मार्ट मीटर लगाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इससे न केवल बिजली व्यवस्था अधिक प्रभावी बनेगी, बल्कि उपभोक्ताओं को भी आधुनिक तकनीक का लाभ मिलेगा।
बिजली विभाग ने एक बार फिर स्पष्ट किया है कि मीटर बदलने की प्रक्रिया पूरी तरह मुफ्त है और यदि कोई कर्मचारी पैसे मांगता है तो उसकी तुरंत शिकायत करें, ताकि समय रहते उस पर कार्रवाई की जा सके और उपभोक्ताओं को किसी भी प्रकार की परेशानी न हो।