
Encounter Politics UP: उत्तर प्रदेश के गाजीपुर में चर्चित विनीत राय हत्याकांड के आरोपी कमलेश के पुलिस एनकाउंटर के बाद प्रदेश की राजनीति एक बार फिर गरमा गई है। जहां विपक्षी दल इस एनकाउंटर को जाति और धर्म के नजरिए से जोड़ते हुए सरकार पर सवाल उठा रहे हैं, वहीं योगी सरकार इसे अपराध और माफिया के खिलाफ अपनी ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति का हिस्सा बता रही है।
कमलेश के एनकाउंटर के बाद न केवल विपक्ष ने सरकार को घेरना शुरू कर दिया है, बल्कि मृतक विनीत राय के परिवार की ओर से भी इस कार्रवाई पर सवाल उठाए जा रहे हैं। परिवार का कहना है कि आरोपी को गिरफ्तार कर न्यायिक प्रक्रिया के तहत सजा दिलाई जानी चाहिए थी। वहीं सरकार और पुलिस का दावा है कि अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई कानून के दायरे में की जा रही है और प्रदेश में अपराध नियंत्रण के लिए सख्त कदम उठाना जरूरी है।
उत्तर प्रदेश में एनकाउंटर की राजनीति कोई नई बात नहीं है। योगी आदित्यनाथ सरकार बनने के बाद से अपराधियों और माफियाओं के खिलाफ लगातार सख्त कार्रवाई की जा रही है। सरकार का दावा है कि इससे प्रदेश में अपराध का ग्राफ कम हुआ है और आम जनता में सुरक्षा का माहौल बना है। हालांकि, विपक्ष लगातार इन कार्रवाइयों की निष्पक्षता और कानूनी प्रक्रिया पर सवाल उठाता रहा है।
गाजीपुर एनकाउंटर के बाद समाजवादी पार्टी समेत कई विपक्षी दलों ने आरोप लगाया कि सरकार कानून-व्यवस्था के नाम पर एनकाउंटर की राजनीति कर रही है। विपक्ष का कहना है कि लोकतंत्र में हर आरोपी को न्यायिक प्रक्रिया के तहत सुनवाई का अधिकार मिलना चाहिए।
योगी सरकार के कार्यकाल में कई चर्चित एनकाउंटर हुए हैं, जिन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियां बटोरीं। इनमें सबसे चर्चित नाम कानपुर के गैंगस्टर विकास दुबे का रहा, जिसे 10 जुलाई 2020 को पुलिस मुठभेड़ में मार गिराया गया था। इसके अलावा बाराबंकी में टिंकू कपाला, लखनऊ में हमजा, झांसी में माफिया अतीक अहमद के बेटे असद और मेरठ में अनिल दुजाना जैसे अपराधियों के एनकाउंटर भी चर्चा में रहे।
सरकार इन कार्रवाइयों को अपराध और माफिया नेटवर्क के खिलाफ निर्णायक अभियान के रूप में प्रस्तुत करती रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ कई मंचों से यह स्पष्ट कर चुके हैं कि प्रदेश में अपराधियों के लिए कोई जगह नहीं है और कानून-व्यवस्था से खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।
सरकार अपने दावों के समर्थन में राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के आंकड़ों का भी हवाला दे रही है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2017 की तुलना में 2024 तक प्रदेश में कई गंभीर अपराधों में कमी दर्ज की गई है।
हत्या के मामलों में 2017 में जहां 4,324 घटनाएं दर्ज हुई थीं, वहीं 2024 में यह संख्या घटकर 3,215 तक पहुंच गई। अपहरण के मामलों में भी उल्लेखनीय गिरावट देखने को मिली है। वर्ष 2017 में 19,921 मामले दर्ज हुए थे, जबकि 2024 में यह आंकड़ा 11,773 रहा। इसी प्रकार फिरौती, बलात्कार, चोरी और डकैती जैसे अपराधों में भी कमी दर्ज की गई। सरकार का कहना है कि सख्त पुलिसिंग, गैंगस्टर एक्ट, माफियाओं की संपत्तियों पर बुलडोजर कार्रवाई और लगातार निगरानी के कारण अपराधियों में भय का माहौल बना है, जिसका असर अपराध दर पर दिखाई दे रहा है।
मार्च 2017 से मई 2026 तक के आंकड़ों के अनुसार मेरठ जोन प्रदेश में सबसे अधिक एनकाउंटर वाला क्षेत्र रहा है। यहां कुल 4,813 एनकाउंटर हुए, जिनमें 97 अपराधी मारे गए, जबकि 3,513 घायल हुए और 8,921 अपराधियों को गिरफ्तार किया गया।
इसके बाद आगरा और वाराणसी जोन का स्थान आता है। आगरा जोन में 2,494 एनकाउंटर हुए, जबकि वाराणसी जोन में 1,292 मुठभेड़ दर्ज की गईं। पुलिस विभाग का दावा है कि इन कार्रवाइयों से संगठित अपराध और माफिया नेटवर्क पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित हुआ है।
एनकाउंटर को लेकर विपक्ष लगातार जाति और धर्म के आधार पर सवाल उठा रहा है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक 31 मार्च 2017 से 5 सितंबर 2024 तक कुल 207 अपराधी पुलिस मुठभेड़ों में मारे गए। इनमें विभिन्न जातियों और धर्मों के लोग शामिल हैं। आंकड़ों के अनुसार 67 मुस्लिम, 20 ब्राह्मण, 18 ठाकुर, 16 यादव, 17 गुर्जर-जाट, 14 अनुसूचित जाति, 3 अनुसूचित जनजाति, 2 सिख और अन्य जातियों के अपराधी एनकाउंटर में मारे गए।
सरकार का कहना है कि कार्रवाई केवल अपराध के आधार पर की जाती है, जबकि विपक्ष इसे चयनात्मक कार्रवाई करार देता रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मुद्दा आने वाले समय में और अधिक राजनीतिक रंग ले सकता है।
योगी सरकार ने कानून-व्यवस्था को अपनी प्रमुख उपलब्धियों में शामिल किया है। बुलडोजर कार्रवाई, माफियाओं की संपत्तियों पर कब्जा, गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई और अपराधियों के खिलाफ लगातार अभियान सरकार की पहचान बन चुके हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ कई बार यह कह चुके हैं कि प्रदेश में अपराधियों और माफियाओं के लिए कोई स्थान नहीं है। सरकार का दावा है कि इसी सख्त नीति के कारण निवेश का माहौल बेहतर हुआ है और जनता में सुरक्षा की भावना मजबूत हुई है।