लखनऊ

बैरिकेड्स पर चढ़े कार्यकर्ता, कई नेता हिरासत में: जानिए लखनऊ में क्यों बिगड़े हालात?

Congress Gyanesh Kumar Against Protest: मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कांग्रेस का विरोध उत्तर प्रदेश में तेज है। लखनऊ में पुतला फूंका गया, जबकि आगरा में भी कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन किया।
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Sep 28, 2026
ज्ञानेश कुमार के खिलाफ यूपी में कांग्रेस का प्रदर्शन, लखनऊ से आगरा तक विरोध और इस्तीफे की मांग (फोटो सोर्स : Ritesh Singh )
ज्ञानेश कुमार के खिलाफ यूपी में कांग्रेस का प्रदर्शन, लखनऊ से आगरा तक विरोध और इस्तीफे की मांग (फोटो सोर्स : Ritesh Singh )

Congress Gyanesh Kumar Against Protest Lucknow to Agra :मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कांग्रेस का विरोध उत्तर प्रदेश में लगातार तेज होता दिखाई दे रहा है। चुनाव प्रक्रिया और मतदाता सूची को लेकर कांग्रेस की ओर से लगाए जा रहे कथित अनियमितताओं के आरोपों के बीच पार्टी कार्यकर्ताओं ने लखनऊ से लेकर आगरा तक विरोध प्रदर्शन किए। कांग्रेस मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग कर रही है और इन प्रदर्शनों को ‘वोट चोरी’ के अपने राजनीतिक अभियान से जोड़ रही है।

हजरतगंज में प्रदर्शन, पुतला फूंका

लखनऊ में 25 सितंबर को जिला और प्रदेश कांग्रेस के कार्यकर्ता मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर सड़कों पर उतरे। हजरतगंज और उसके आसपास प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने नारेबाजी की और ज्ञानेश कुमार का पुतला फूंका। प्रदर्शनकारियों ने चुनाव प्रक्रिया और मतदाता सूची को लेकर अपनी आपत्तियां दर्ज कराईं। भारी बारिश के बावजूद कांग्रेस कार्यकर्ता प्रदर्शन पर डटे रहे।

कांग्रेस कार्यकर्ता प्रदेश कांग्रेस कार्यालय से विधानसभा और मुख्यमंत्री आवास की ओर बढ़ रहे थे। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को बैरिकेडिंग लगाकर रोक दिया। इसके बाद कुछ प्रदर्शनकारी बैरिकेडिंग पर चढ़ गए और पुलिस के साथ उनकी धक्का-मुक्की हुई। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने कई नेताओं और कार्यकर्ताओं को हिरासत में लेकर ईको गार्डन पहुंचाया। रिपोर्टों के अनुसार प्रदर्शन में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय, प्रदेश प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम और कांग्रेस विधायक दल की नेता आराधना मिश्रा समेत कई नेता मौजूद रहे।

‘वोट चोरी’ के आरोपों पर सियासी टकराव

कांग्रेस का कहना है कि चुनाव प्रक्रिया और मतदाता सूची से संबंधित कुछ मामलों को लेकर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। पार्टी ने इन मुद्दों को ‘वोट चोरी’ के आरोपों के साथ जोड़ते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग तेज कर दी है। प्रदर्शन के दौरान ‘वोट चोर, गद्दी छोड़’ जैसे नारे भी लगाए गए।

आगरा में मुख्य चुनाव आयुक्त के आवास के बाहर प्रदर्शन करते कांग्रेस कार्यकर्ता। (फोटो सोर्स : Ritesh Singh )   

कांग्रेस नेताओं ने विशेष रूप से मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर को लेकर सवाल उठाए हैं। पार्टी का आरोप है कि मतदाता सूची में बदलाव की प्रक्रिया में कई अनियमितताएं हुई हैं। दूसरी ओर, चुनाव आयोग ने विभिन्न मौकों पर मतदाता सूची से संबंधित प्रक्रिया और आपत्तियों के निस्तारण को लेकर अपना पक्ष रखा है। इसलिए कांग्रेस के आरोपों और निर्वाचन आयोग की प्रक्रिया को अलग-अलग संदर्भों में देखना जरूरी है।

पुलिस से हुई झड़प, कई कार्यकर्ता हिरासत में

लखनऊ में प्रदर्शन के दौरान पुलिस और कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच हुई धक्का-मुक्की ने भी राजनीतिक विवाद को बढ़ा दिया। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को निर्धारित मार्ग से आगे बढ़ने से रोकने के लिए बैरिकेडिंग की थी। प्रदर्शनकारी बैरिकेडिंग पार करने की कोशिश कर रहे थे, जिसके बाद पुलिस ने उन्हें रोका। बाद में कई कार्यकर्ताओं और नेताओं को हिरासत में लेकर ईको गार्डन ले जाया गया। कांग्रेस ने इसे लोकतांत्रिक विरोध की आवाज दबाने का आरोप लगाया, जबकि प्रशासन की ओर से कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए सुरक्षा व्यवस्था किए जाने की बात सामने आई। प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में पुलिस बल और पीएसी की तैनाती की गई थी।

आगरा में भी सामने आया था विरोध

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के आगरा स्थित आवास को लेकर भी कांग्रेस का विरोध पहले सामने आ चुका है। 18 अगस्त 2025 को कांग्रेस कार्यकर्ता आगरा के विजय नगर स्थित उनके आवास के बाहर प्रदर्शन करने पहुंचे थे। प्रदर्शनकारियों के हाथों में ‘वोट चोर’ और ‘आगरा छोड़ो’ जैसे संदेश लिखी तख्तियां थीं। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को आवास से कुछ दूरी पर रोकने की कोशिश की, जिसके दौरान नोकझोंक और धक्का-मुक्की की स्थिति बनी। रिपोर्टों के अनुसार उस प्रदर्शन में कार्यकर्ताओं ने आवास के बाहर विरोध दर्ज कराने की कोशिश की थी। पुलिस ने उन्हें आगे बढ़ने से रोककर स्थिति नियंत्रित की। कांग्रेस की ओर से उस समय भी चुनाव प्रक्रिया और मतदाता सूची को लेकर गंभीर आरोप लगाए गए थे।

प्रदेश में बढ़ता राजनीतिक तापमान

लखनऊ और आगरा की घटनाएं ऐसे समय में सामने आई हैं, जब उत्तर प्रदेश में चुनावी राजनीति पहले से सक्रिय है। कांग्रेस लगातार निर्वाचन प्रक्रिया से जुड़े सवालों को राजनीतिक मुद्दा बना रही है। पार्टी नेताओं का कहना है कि मतदाता सूची में पारदर्शिता और चुनावी प्रक्रिया में निष्पक्षता लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए जरूरी है।

मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ कांग्रेस का यह अभियान केवल उत्तर प्रदेश तक सीमित नहीं है। देश के अलग-अलग हिस्सों में कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों की ओर से निर्वाचन आयोग तथा एसआईआर की प्रक्रिया को लेकर विरोध प्रदर्शन हुए हैं। बिहार की मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर भी विपक्ष और निर्वाचन आयोग के बीच राजनीतिक बहस तेज रही है।

आरोपों पर आयोग का पक्ष भी महत्वपूर्ण

कांग्रेस के आरोपों के बीच निर्वाचन आयोग की ओर से सामने रखी गई प्रक्रिया और स्पष्टीकरण भी इस पूरे विवाद का महत्वपूर्ण हिस्सा है। मतदाता सूची में नाम जोड़ने, हटाने या संशोधन के लिए निर्धारित प्रक्रिया के तहत दावे और आपत्तियां दर्ज कराने का प्रावधान है। ऐसे में किसी भी राजनीतिक आरोप का अंतिम निष्कर्ष संबंधित दस्तावेजों, प्रक्रिया और जांच के आधार पर ही निकाला जा सकता है। राजनीतिक दलों के बीच चुनाव आयोग की भूमिका को लेकर मतभेद कोई नया विषय नहीं है, लेकिन मौजूदा विवाद में आरोपों की तीव्रता ने इसे राष्ट्रीय राजनीतिक बहस का प्रमुख मुद्दा बना दिया है।

इस्तीफे की मांग पर अड़ी कांग्रेस

कांग्रेस नेताओं ने साफ किया है कि मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग को लेकर उनका आंदोलन जारी रहेगा। पार्टी कार्यकर्ताओं ने लखनऊ में प्रदर्शन के दौरान ‘ज्ञानेश कुमार इस्तीफा दो’ और ‘वोट चोर, गद्दी छोड़’ जैसे नारे लगाए। कांग्रेस का कहना है कि जब तक उसके द्वारा उठाए गए चुनावी प्रक्रिया और मतदाता सूची से जुड़े सवालों का संतोषजनक जवाब नहीं मिलता, तब तक विरोध जारी रहेगा।
वहीं, इस पूरे विवाद का अगला चरण कांग्रेस के आंदोलन और निर्वाचन आयोग के जवाब के बीच राजनीतिक टकराव को और बढ़ा सकता है। फिलहाल लखनऊ से आगरा तक सामने आए विरोध प्रदर्शनों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि चुनाव प्रक्रिया और मतदाता सूची से जुड़े मुद्दे आने वाले दिनों में उत्तर प्रदेश की राजनीति में भी प्रमुख चर्चा का विषय बने रहेंगे।