लखनऊ

Iran Israel War: ईरानी सुप्रीम लीडर की मौत के बाद लखनऊ में सड़कों पर उतरे शिया मुसलमान, मुर्दाबाद के लगे नारे

ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की अमेरिका और इजरायल के हवाई हमलों में मौत के बाद लखनऊ में विरोध प्रदर्शन हुए।

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Mar 01, 2026
शिया समुदाय ने प्रदर्शन किया

Iran Israel War: ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद भारत में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन देखने को मिल रहे हैं। अमेरिका और इजरायल के संयुक्त हमलों में खामेनेई की मौत की खबर ने शिया मुस्लिम समुदाय को गहरा सदमा पहुंचाया है। कश्मीर से लेकर लखनऊ तक लोग सड़कों पर उतर आए हैं और अमेरिका-इजरायल के खिलाफ गुस्सा जाहिर कर रहे हैं।

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खामेनेई की मौत

ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत 28 फरवरी 2026 को अमेरिका और इजरायल के बड़े हवाई हमलों में हुई। ईरानी मीडिया ने 1 मार्च को इसकी पुष्टि की। खामेनेई अपने दफ्तर में काम कर रहे थे, तभी हमला हुआ। उनकी उम्र 86 साल थी। ईरान ने इसे शहादत बताया है और 40 दिनों का राष्ट्रीय शोक घोषित किया है। इस घटना ने पूरे मध्य पूर्व में तनाव बढ़ा दिया है।

भारत में विरोध प्रदर्शन

भारत में शिया मुस्लिम समुदाय ने खामेनेई की मौत पर गहरा दुख जताया है। कश्मीर के श्रीनगर, सोनावारी, बंदीपोरा और रामबन जैसे इलाकों में लोग सड़कों पर निकले। प्रदर्शनकारियों ने खामेनेई की तस्वीरें हाथ में लीं और अमेरिका-इजरायल के खिलाफ नारे लगाए। श्रीनगर के लाल चौक पर बड़ी संख्या में लोग जमा हुए। महिलाएं और पुरुष दोनों शामिल थे।

लखनऊ में सड़कों पर मुस्लमान

लखनऊ में भी शिया मुसलमानों ने बड़े पैमाने पर विरोध जताया। सड़कों पर उतरकर उन्होंने खामेनेई जिंदाबाद के नारे लगाए। अमेरिका और इजरायल मुर्दाबाद के नारे गूंजे। महिलाएं छाती पीटकर रो रही थीं। एक महिला ने जोर से कहा कि जिनकी नस्लों में धोखा और गद्दारी है, उन्होंने खामेनेई को धोखे से मारा। खामेनेई मेरा शेर था, कयामत तक रहेगा। एक मरेगा, हजार खामेनेई आएंगे। लानत है अमेरिका और इजरायल पर। इनकी नस्लें गद्दार और धोखेबाज हैं।

शिया धर्मगुरु मौलाना कल्बे जवाद ने हमले की कड़ी निंदा की। उन्होंने कहा कि ट्रंप और नेतन्याहू ने अपनी मौत का वारंट साइन कर लिया है। उन्होंने तीन दिनों का शोक मनाने और शाम को कैंडल मार्च निकालने का ऐलान किया।

आखिर क्यों हो रहा है प्रदर्शन?

ये प्रदर्शन दिखाते हैं कि भारत में शिया समुदाय ईरान के साथ गहरा जुड़ाव महसूस करता है। खामेनेई को वे मजलूमों के समर्थक और इस्लाम के मजबूत नेता मानते थे। लोग इसे धोखे से हत्या बता रहे हैं और बदला लेने की बात कर रहे हैं। कश्मीर और लखनऊ जैसे जगहों पर शांतिपूर्ण तरीके से विरोध हुआ, लेकिन गुस्सा साफ दिख रहा था।

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Updated on:
01 Mar 2026 11:11 am
Published on:
01 Mar 2026 11:09 am
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