
आतंकी संगठन आईएसआईएस के भारत प्रमुख हारिस फारूकी उर्फ हरीश अजमल फारुखी और उसके सहयोगी रेहान को बुधवार को असम के धुबरी जिले से एसटीएफ ने दबोचा था। भारत प्रमुख हारिस फारुखी उत्तराखंड के देहरादून का रहने वाला है। जांच में सामने आया है कि आईएसआईएस आतंकी संगठन देश के विभिन्न शहरों को धमाकों से दहलाने की साजिश रच रहा था। इसके लिए हारिस ने उत्तराखंड के हल्द्वानी में आईईडी युक्त सुतली बम का ट्रायल किया था।
हारिस ने कुछ लोगों से संपर्क साधकर हल्द्वानी में गौला नदी में सुतली बम का ट्रायल किया था। उसके बाद उसके साथी शाहनवाज आलम गिरफ्तार हो गया था। उसी के साथ ही पुलिस ने हारिस के संपर्क में आए लोगों की खोजबीन शुरू कर दी थी। अब हारिस की गिरफ्तारी के बाद उसके लोकल लिंक खंगाले जा रहे हैं।
अक्तूबर-2023 में दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने तीन आतंकियों को गिरफ्तार किया था, जो देश में कई जगह बम ब्लास्ट की फिराक में थे। पूछताछ के बाद यह बात सामने आई थी कि वे देहरादून निवासी हारिस के भी संपर्क में थे। इसके बाद तमाम एजेंसियां हारिस की तलाश में जुट गईं। हारिस के नेपाल के रास्ते भागने की बात भी सामने आई थी। इधर, उत्तराखंड की तमाम एजेंसियां ने भी उसकी तलाश की।
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हारिश का उत्तराखंड कनेक्शन
हारिस के पिता भी सिमी के प्रतिबंधित होने से पहले उससे जुड़े रहे हैं। लिहाजा इस परिवार पर खुफिया एजेंसियों की निगरानी काफी पहले से रही है। बताया जा रहा है कि उस वक्त हारिस का परिवार नेहरू कॉलोनी में एक मकान में किराये पर रहता था।
वहां बार-बार पुलिस या दूसरी एजेंसियों के पहुंचने या उनको बुलाने के कारण मकान मालिक ने हारिस के परिवार से कमरा खाली करवा दिया था। इसके बाद डालनवाला में भी ऐसा ही हुआ। वह मुस्लिम कॉलोनी गए तो वहां से भी मकान बदलना पड़ा। इसके बाद ये परिवार सिंघल मंडी में रहने लगा था।