
UP Bijli Vibhag: गोमती नगर जोन के चिनहट पावर हाउस क्षेत्र के अंतर्गत जुग्गौर में बिजली कनेक्शन को लेकर उपभोक्ता ने विभागीय कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। उपभोक्ता का आरोप है कि कनेक्शन के लिए आवेदन करने और संबंधित प्रक्रिया में आगे बढ़ने के बावजूद अब तक साइट विजिट नहीं की गई। उपभोक्ता के मुताबिक उसने विभागीय कर्मचारी टीजी-2 विवेक यादव को कई बार फोन कर यह जानकारी दी कि वह मौके पर मौजूद है और साइट विजिट के लिए उपलब्ध है, लेकिन इसके बावजूद मौके पर निरीक्षण नहीं हुआ।
बताया जा रहा है कि संबंधित बिजली कनेक्शन की प्रक्रिया अवर अभियंता हरेंद्र की आईडी पर दर्ज है। ऐसे में उपभोक्ता ने सवाल उठाया है कि आवेदन के बाद आगे की कार्रवाई में देरी क्यों हो रही है और साइट विजिट की प्रक्रिया अब तक पूरी क्यों नहीं की गई। मामले को लेकर उपभोक्ता विभाग से स्पष्ट जवाब और समयबद्ध कार्रवाई की मांग कर रहा है।
उपभोक्ता के अनुसार बिजली कनेक्शन के लिए निर्धारित प्रक्रिया के तहत आवेदन किया गया था। इसके बाद उसे उम्मीद थी कि विभागीय कर्मचारी मौके पर पहुंचकर आवश्यक जांच और साइट विजिट की कार्रवाई पूरी करेंगे। लेकिन आरोप है कि संबंधित कर्मचारी को कई बार फोन करने के बावजूद निरीक्षण नहीं किया गया। उपभोक्ता का कहना है कि उसने टीजी-2 विवेक यादव को फोन पर यह भी बताया कि वह मौके पर मौजूद है और साइट विजिट के लिए उपलब्ध है। इसके बावजूद मौके पर विभागीय कर्मचारी के नहीं पहुंचने से कनेक्शन प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी। इससे उपभोक्ता को यह समझने में परेशानी हो रही है कि आवेदन की वर्तमान स्थिति क्या है और कनेक्शन के लिए अब उसे आगे क्या करना होगा।
मामले में सबसे अहम बात यह बताई जा रही है कि संबंधित कनेक्शन अवर अभियंता हरेंद्र की आईडी पर है। इसी आधार पर उपभोक्ता ने सवाल उठाया है कि आवेदन के बाद होने वाली कार्रवाई की निगरानी किस स्तर पर की जा रही है। यदि कनेक्शन की प्रक्रिया संबंधित अवर अभियंता के स्तर पर दर्ज है तो साइट विजिट और आगे की प्रक्रिया समय पर पूरी कराने की जिम्मेदारी किस अधिकारी की है, यह भी स्पष्ट किया जाना जरूरी है। उपभोक्ता का कहना है कि उसे केवल यह जानना है कि उसका आवेदन किस स्थिति में है और बिजली कनेक्शन की प्रक्रिया कब तक पूरी होगी। विभागीय स्तर से यदि किसी दस्तावेज, निरीक्षण या अन्य औपचारिकता की जरूरत है तो इसकी जानकारी भी उपभोक्ता को स्पष्ट रूप से दी जानी चाहिए।
बिजली कनेक्शन की प्रक्रिया में साइट विजिट का अपना महत्व होता है। मौके की स्थिति, कनेक्शन से संबंधित आवश्यकताओं और अन्य तकनीकी पहलुओं की जांच के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाती है। ऐसे में यदि साइट विजिट लंबित रहती है तो कनेक्शन प्रक्रिया भी प्रभावित हो सकती है। उपभोक्ता का आरोप है कि वह विभागीय कर्मचारी से संपर्क कर अपनी उपलब्धता बता चुका है, लेकिन इसके बावजूद निरीक्षण नहीं हुआ। इससे सवाल उठ रहा है कि आवेदन से संबंधित फाइल किस स्तर पर लंबित है और उसकी निगरानी कौन कर रहा है। यदि कोई तकनीकी या प्रशासनिक कारण है तो विभाग को उपभोक्ता को इसकी जानकारी देनी चाहिए, ताकि अनावश्यक भ्रम की स्थिति न बने।
मामले में उपभोक्ता ने सुविधा शुल्क दिए जाने से जुड़े कथित आरोपों की जांच की मांग भी उठाई है। उपभोक्ता की ओर से ‘मोटा लिफाफा’ जैसे आरोप लगाए गए हैं। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और न ही उपलब्ध जानकारी के आधार पर यह कहा जा सकता है कि किसी अधिकारी या कर्मचारी ने अवैध भुगतान की मांग की। ऐसे में इस तरह के आरोपों की वास्तविकता सामने लाने के लिए विभागीय जांच जरूरी होगी। यदि शिकायतकर्ता के पास किसी तरह का दस्तावेज, रिकॉर्डिंग, संदेश या अन्य साक्ष्य है तो उसकी जांच की जा सकती है। वहीं, संबंधित कर्मचारियों और अधिकारियों का पक्ष भी लिया जाना आवश्यक होगा, ताकि पूरे मामले की तस्वीर स्पष्ट हो सके।
उपभोक्ता ने गोमती नगर जोन की कार्यप्रणाली को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए हैं। उसका आरोप है कि क्षेत्र में बिजली से जुड़ी सेवाओं को लेकर उपभोक्ताओं को अनावश्यक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। हालांकि, यह आरोप शिकायतकर्ता के हैं और इनकी स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है। चिनहट पावर हाउस क्षेत्र में आने वाले जुग्गौर के इस मामले ने यह सवाल जरूर खड़ा किया है कि बिजली कनेक्शन से संबंधित आवेदनों की निगरानी किस स्तर पर की जाती है। उपभोक्ताओं को आवेदन की स्थिति की जानकारी देने और निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार समय पर कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए विभागीय व्यवस्था कितनी प्रभावी है, इसकी समीक्षा की जरूरत महसूस होती है।
उपभोक्ता ने बिजली विभाग में लागू वर्टिकल व्यवस्था का हवाला देते हुए भी सवाल उठाया है कि यदि जिम्मेदारियां अलग-अलग स्तर पर तय हैं तो फिर आवेदन के बाद साइट विजिट जैसी प्रक्रिया लंबित कैसे रह गई। व्यवस्था का उद्देश्य कार्यों की जिम्मेदारी और निगरानी को स्पष्ट करना है, ऐसे में किसी आवेदन के लंबित रहने पर संबंधित स्तर पर जवाबदेही तय होना जरूरी है। हालांकि, किसी भी प्रशासनिक व्यवस्था की प्रभावशीलता का आकलन एक अकेले मामले के आधार पर नहीं किया जा सकता। इसके लिए विभागीय रिकॉर्ड और अन्य शिकायतों की भी समीक्षा आवश्यक होगी। इस मामले में भी यह देखना होगा कि आवेदन कब किया गया, किस स्तर पर लंबित है और साइट विजिट क्यों नहीं हो सकी।
मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि उपभोक्ता को उसके आवेदन की वर्तमान स्थिति की स्पष्ट जानकारी कब मिलेगी। यदि आवेदन में कोई कमी है तो विभाग उसे बताकर उसे पूरा कराने का अवसर दे सकता है। यदि प्रक्रिया विभागीय स्तर पर लंबित है तो संबंधित अधिकारी को उसका कारण स्पष्ट करना चाहिए। पारदर्शिता के लिहाज से उपभोक्ता को आवेदन संख्या, वर्तमान स्थिति और आगे की संभावित प्रक्रिया की जानकारी उपलब्ध कराना महत्वपूर्ण है। इससे न केवल उपभोक्ता की परेशानी कम होगी बल्कि विभागीय व्यवस्था पर भी भरोसा कायम रहेगा।
जांच से ही सामने आएगी वास्तविक स्थिति
जुग्गौर में सामने आए इस मामले में अब विभागीय अधिकारियों की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है। यदि उपभोक्ता की शिकायत सही पाई जाती है तो जिम्मेदारी तय कर आवश्यक कार्रवाई की जानी चाहिए। वहीं, यदि लगाए गए आरोप तथ्यहीन पाए जाते हैं तो विभाग को भी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
विशेष रूप से सुविधा शुल्क से जुड़े आरोपों की निष्पक्ष जांच होने पर ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि शिकायत में लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है। इसके साथ ही आवेदन और साइट विजिट से संबंधित विभागीय रिकॉर्ड की जांच से यह भी पता चल सकता है कि देरी किस स्तर पर हुई। फिलहाल जुग्गौर के इस बिजली कनेक्शन मामले में उपभोक्ता विभागीय कार्रवाई और स्पष्ट जवाब का इंतजार कर रहा है। अब देखना यह है कि गोमती नगर जोन और चिनहट पावर हाउस के जिम्मेदार अधिकारी शिकायत की जांच किस स्तर पर कराते हैं और आवेदन की प्रक्रिया को लेकर स्थिति कब तक स्पष्ट होती है।