Keshav Prasad Maurya : UP के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य का बड़ा बयान; कहा- 2004 के चुनाव में अतीक अहमद को गोली मारने का बना लिया था मन, निकाल ली थी लाइसेंसी राइफल।
लखनऊ: उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने अतीक अहमद के सवाल पर पुराना किस्सा सुनाते हुए कहा कि 'अतीक अहमद तो अल्लाह को प्यारे हो गए, उन पर क्या चर्चा करनी।' उन्होंने 2004 के विधानसभा उपचुनाव का वह घटनाक्रम याद किया जिसमें उन्होंने अतीक अहमद पर गोली चलाने का मन बना लिया था। यह चर्चा उन्होंने एक कार्यक्रम के दौरान की।
मौर्य ने बताया कि 2004 में उन्हें पहली बार विधानसभा उपचुनाव लड़ने का मौका मिला। चुनाव प्रचार के दौरान दोनों तरफ से कार्यकर्ता सक्रिय थे। अतीक के लोगों के पास अस्त्र-शस्त्र थे, जबकि उनके पास भी लाइसेंसी हथियार थे। एक जगह गाड़ी टक्कर खा गई और उनके एक कार्यकर्ता से अतीक के गुंडे की भिड़ंत हो गई। माहौल तनावपूर्ण हो गया।
केशव मौर्य ने कहा, 'मुझे लगा कि आज तो निर्णायक लड़ाई हो जाएगी। मन में आया कि अगर मरना है या मारना है तो किसी ऐसे-वैसे को क्या मारना। मैंने लाइसेंसी राइफल निकाल ली और सोचा कि अगर मारूंगा तो अतीक अहमद को ही मारूंगा। जेल जाना पड़े तो अतीक को मारकर ही जाऊंगा।'
यह घटना इलाहाबाद पश्चिम (अब प्रयागराज) या आसपास की सीट से जुड़ी बताई जाती है, जहां केशव मौर्य ने अतीक के भाई अशरफ अहमद के खिलाफ चुनाव लड़ा था। उस समय अतीक अहमद का इलाके में जबरदस्त दबदबा था।
अतीक अहमद (1962-2023) एक notorious गैंगस्टर-राजनेता थे। उन्होंने प्रयागराज क्षेत्र में कई आपराधिक मामले, हत्या, अपहरण और भूमि कब्जे में नाम कमाया। वे कई बार विधायक रहे और 2004 में फूलपुर से सांसद भी चुने गए थे। अप्रैल 2023 में पुलिस कस्टडी में उनकी और उनके भाई अशरफ की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। उनके बेटे असद का भी एनकाउंटर में मारा जाना चर्चित रहा।
इस वाकये के बाद केशव मौर्य ने भाजपा की ताकत पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी की सबसे बड़ी ताकत बूथ स्तर तक समर्पित और संगठित कार्यकर्ताओं की संरचना है। 'मेरा बूथ सबसे मजबूत' के संकल्प के साथ अभियान शुरू होता है। केवल बैठकें या भाषण पर्याप्त नहीं हर परिवार तक पहुंच बनानी पड़ती है।
उन्होंने जोर देकर कहा कि जिसके पास बूथ स्तर का संगठन है, वह बूथ जीतता है, फिर विधानसभा और सरकार बनाने की क्षमता हासिल करता है। भाजपा सरकार बनने के बाद उत्तर प्रदेश की तस्वीर बदल गई है। कानून का राज स्थापित होने से विकास की रफ्तार तेज हुई है।
यह बयान यूपी की राजनीति के दो युगों को दर्शाता है। 2000 के दशक की शुरुआत में अपराध और राजनीति का गहरा गठजोड़ था, खासकर कुछ क्षेत्रों में। माफिया-राजनेता खुलेआम चुनाव लड़ते और प्रभाव बनाए रखते थे। 2017 के बाद योगी आदित्यनाथ सरकार में “बुलडोजर राजनीति” और सख्त कानून व्यवस्था के तहत ऐसे तत्वों पर लगाम कसी गई।