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निशिकांत दुबे पर सपा का हमला, आशुतोष वर्मा ने अखिलेश यादव से माफी मांगने को कहा

SP Targets BJP MP Nishikant Dubey: लखनऊ में सपा प्रवक्ता आशुतोष वर्मा ने भाजपा सांसद निशिकांत दुबे पर तीखा हमला बोलते हुए अखिलेश यादव से माफी मांगने की मांग की और झूठे आरोपों पर सवाल उठाए।
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लखनऊ

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Ritesh Singh

Jul 07, 2026

अखिलेश यादव से माफी मांगें भाजपा सांसद (फोटो सोर्स : भाषा संवाद WhatsApp News Group)

अखिलेश यादव से माफी मांगें भाजपा सांसद (फोटो सोर्स : भाषा संवाद WhatsApp News Group)

SP Targets BJP MP Nishikant Dubey: भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सांसद निशिकांत दुबे के हालिया बयान को लेकर उत्तर प्रदेश की राजनीति में बयानबाजी तेज हो गई है। समाजवादी पार्टी (सपा) ने भाजपा सांसद पर तीखा हमला बोलते हुए उनके बयान को गैर-जिम्मेदाराना और राजनीतिक मर्यादाओं के खिलाफ बताया है। सपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता आशुतोष वर्मा ने कहा कि निशिकांत दुबे लगातार ऐसे बयान देते हैं, जिनसे विवाद पैदा होता है। उन्होंने भाजपा सांसद को सलाह देते हुए कहा कि यदि उन्होंने सपा अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव पर कोई झूठा आरोप लगाया है तो उन्हें सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी चाहिए।

भाजपा सांसद पर सपा का सीधा हमला

लखनऊ में मीडिया से बातचीत के दौरान सपा प्रवक्ता आशुतोष वर्मा ने निशिकांत दुबे पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा, "निशिकांत दुबे एक ऐसे व्यक्ति हैं, जिनका मुंह जब खुलता है, तब गड़बड़ ही निकलती है। उनसे इससे अधिक उम्मीद नहीं की जा सकती।"

उन्होंने आगे कहा कि लोकतंत्र में जनप्रतिनिधियों को अपने शब्दों का चयन बेहद जिम्मेदारी के साथ करना चाहिए। सांसद का पद केवल राजनीतिक बयान देने का मंच नहीं है, बल्कि जनता के विश्वास और संवैधानिक गरिमा का भी प्रतीक है। ऐसे में बिना तथ्यों के किसी पर आरोप लगाना उचित नहीं माना जा सकता।

अखिलेश यादव से माफी मांगने की मांग

आशुतोष वर्मा ने भाजपा सांसद को सीधी चेतावनी देते हुए कहा कि अभी भी उनके पास अपनी गलती सुधारने का अवसर है। उन्होंने कहा, "मैं निशिकांत दुबे को साफ कहता हूं कि अभी भी समय है, अखिलेश यादव से माफी मांग लीजिए।" सपा प्रवक्ता का कहना था कि यदि किसी सांसद द्वारा देश की तीसरी सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी के नेता या सांसद पर बिना प्रमाण के आरोप लगाए जाते हैं, तो यह न केवल राजनीतिक मर्यादा का उल्लंघन है, बल्कि लोकतांत्रिक संस्थाओं की गरिमा को भी प्रभावित करता है। उन्होंने कहा कि इस तरह के मामलों में कानून और संसदीय नियमों का भी पालन होना चाहिए।

सांसदी पर भी दी चेतावनी

अपने बयान के दौरान आशुतोष वर्मा ने निशिकांत दुबे को कानूनी परिणामों की ओर भी इशारा किया। उन्होंने कहा कि झूठे आरोप लगाने की कोशिश में कहीं उनकी संसदीय सदस्यता ही संकट में न पड़ जाए। उन्होंने कहा, "किसी सांसद और देश की तीसरी सबसे बड़ी पार्टी के नेता पर झूठा आरोप लगाने के चक्कर में कहीं अपनी सांसदी न खो बैठें।"

हालांकि सपा प्रवक्ता ने यह स्पष्ट नहीं किया कि वे किस कानूनी प्रक्रिया या किस विशेष आरोप का उल्लेख कर रहे थे, लेकिन उनका बयान राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है।

राजनीतिक बयानबाजी का बढ़ता दौर

उत्तर प्रदेश की राजनीति में भाजपा और समाजवादी पार्टी के बीच आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला लगातार जारी है। लोकसभा चुनाव के बाद भी दोनों दलों के नेताओं के बीच बयानबाजी थमने का नाम नहीं ले रही है। राष्ट्रीय और प्रदेश स्तर के मुद्दों पर दोनों दल एक-दूसरे पर लगातार निशाना साध रहे हैं। राजनीतिक सूत्रों  का मानना है कि विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच बढ़ती बयानबाजी आने वाले चुनावों की रणनीति का भी हिस्सा हो सकती है। ऐसे बयान समर्थकों को संदेश देने के साथ-साथ राजनीतिक माहौल को भी प्रभावित करते हैं।

सियासी माहौल में बढ़ी गर्माहट

आशुतोष वर्मा के इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में नई बहस शुरू हो गई है। सपा नेताओं का कहना है कि विपक्ष के नेताओं पर लगातार व्यक्तिगत टिप्पणियां करना लोकतांत्रिक परंपराओं के अनुरूप नहीं है। उनका आरोप है कि भाजपा के कुछ नेता राजनीतिक लाभ के लिए अनावश्यक विवाद खड़े करते हैं। वहीं भाजपा की ओर से इस बयान पर तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। माना जा रहा है कि यदि पार्टी या सांसद निशिकांत दुबे इस पर प्रतिक्रिया देते हैं तो यह राजनीतिक बहस और तेज हो सकती है।

लोकतांत्रिक मर्यादा पर जोर

सपा प्रवक्ता ने कहा कि लोकतंत्र में वैचारिक मतभेद स्वाभाविक हैं, लेकिन राजनीतिक संवाद हमेशा तथ्यों और मर्यादा के दायरे में होना चाहिए। उन्होंने कहा कि व्यक्तिगत आरोपों और अभद्र टिप्पणियों से लोकतांत्रिक व्यवस्था कमजोर होती है और जनता के बीच गलत संदेश जाता है। उन्होंने कहा कि विपक्ष की भूमिका सरकार से सवाल पूछना और जनता के मुद्दे उठाना है, जबकि सत्ता पक्ष की जिम्मेदारी जवाब देना है। यदि राजनीतिक विमर्श व्यक्तिगत आरोपों तक सीमित रह जाएगा, तो लोकतंत्र की स्वस्थ परंपरा प्रभावित होगी।

आगे क्या होगा, इस पर नजर

सपा के इस तीखे बयान के बाद अब सभी की नजर भाजपा सांसद निशिकांत दुबे की प्रतिक्रिया पर टिकी है। यदि दोनों पक्षों के बीच यह बयानबाजी आगे बढ़ती है तो आने वाले दिनों में यह मुद्दा और अधिक राजनीतिक तूल पकड़ सकता है।