
Ayodhya Ram Mandir,patrika photo
Ram Mandir Ayodhya- अयोध्या के श्री राम मंदिर में दान चोरी की जांच कर रही स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) की शुरुआती रिपोर्ट में अहम खुलासे हुए हैं। रिपोर्ट में बताया गया है कि मंदिर में चोरी की 70 घटनाएं हुईं। न तलाशी का सिस्टम ठीक था और न ही प्रोटोकॉल का पालन किया गया। दान राशि की गिनती में भी कमियां पाई गईं। एसआईटी ने अपनी रिपोर्ट में सुपरविज़न, CCTV मॉनिटरिंग और नकद गिनने के तरीकों में कमियों को उजागर किया है।
SIT रिपोर्ट में कहा गया है कि दान पेटियों की नंबरिंग और दान राशि की गिनती का कोई प्रभावी सिस्टम नहीं था। बॉक्स-वाइज़ रिकॉर्डिंग और गिनती के लिए प्रक्रिया तय तो की लेकिन असल में, गिनती से पहले अलग-अलग हुंडियों का सामान एक साथ मिला दिया जाता था।
SIT ने कहा कि मंदिर में सिक्योरिटी प्रोटोकॉल का पालन नहीं किया गया। बिना किसी लिखित आधिकारिक निर्देश के कई लोग दान पेटी की चाबियां रखते थे या एक्सेस से जुड़े अरेंजमेंट को मैनेज कर रहे थे। आरोपी रामशंकर यादव उर्फ टीनू भी इसमें शामिल है, जो चंपत राय का करीबी माना जाता है। रिपोर्ट में काउंटिंग इंचार्ज और दान पेटी खोलने की निगरानी करने वाले ऑफिसर आरोपी सुभाष श्रीवास्तव को इसके लिए ज़िम्मेदार ठहराया गया।
सुरक्षा व्यवस्था में कई कमियों की वजह से कथित चोरियां पकड़ में नहीं आईं। काउंटिंग रूम में अंदर या बाहर जाते समय स्टाफ की ठीक से तलाशी नहीं ली गई, तय ड्रेस कोड का भी सख्ती से पालन नहीं किया गया पर्सनल सामान पर असरदार तरीके से रोक नहीं लगाई गई।
CCTV सर्विलांस और रिकॉर्ड रखने में बड़ी लापरवाही की गई। काउंटिंग रूम में कैमरे लगाए गए थे पर ट्रस्ट के लोग कथित तौर पर लाइव फुटेज को असरदार तरीके से मॉनिटर करने में फेल रहे।
सीसीटीवी की रिकॉर्डिंग सिर्फ़ 45 दिनों के लिए रखी गईं 27 अप्रैल से 6 जून तक — जबकि ऑडिट में फुटेज 180 दिनों तक रखने की सलाह दी गई थी। इसी अवधि में एसआईटी ने कथित चोरी या गबन के 70 मामलों की पहचान की।
फुटेज में बार-बार कुछ कर्मचारी अपने कपड़ों, जेबों, जूतों या दूसरी छिपी हुई जगहों के अंदर नोटों के बंडल और खुले कैश छिपाकर गिनते हुए दिखे। रिपोर्ट में कहा गया है कि कई मामलों में दूसरे कर्मचारी मदद करते या कवर देते दिखे।
SIT ने खराब ओवरसाइट की ओर भी इशारा किया, यह देखते हुए कि काउंटिंग के दौरान ट्रस्ट और बैंक दोनों के रिप्रेजेंटेटिव मौजूद होने के बावजूद ये कमियां जारी रहीं। एक्स-ट्रस्टी अनिल मिश्रा ने सितंबर 2024 का अरेंजमेंट और बैंक के साथ फरवरी 2025 का SOP बनाते समय ट्रस्ट को रिप्रेजेंट किया था, उनसे यह पक्का करने की उम्मीद थी कि सेफगार्ड लागू किए जाएं। रिपोर्ट में कहा गया है कि लगातार निगरानी, रेगुलर रिव्यू या असरदार सुपरविज़न के बहुत कम सबूत मिले हैं।
SIT ने चढ़ावे के तीनों तरीकों (हुंडी, काउंटर, पवित्र जगह) में कैश और कीमती सामान को संभालने के लिए तय प्रोसेस का भी बड़े पैमाने पर उल्लंघन पाया, जिसमें खराब डॉक्यूमेंटेशन, चढ़ावे का मिक्स होना और कमजोर चेन-ऑफ-कस्टडी कंट्रोल शामिल हैं।
एसआईटी ने श्रीराम मंदिर में कई गंभीर सुपरवाइज़री गलतियों को चिन्हित किया। जांच अधिकारियों ने कहा कि इससे आपराधिक कामों के लिए अच्छे हालात बन गए।
Updated on:
07 Jul 2026 01:24 pm
Published on:
07 Jul 2026 01:16 pm
