
लखनऊ में भाजपा अध्यक्ष नितिन नबीन के रोड शो में हनुमान वेशधारी के नृत्य पर विवाद, शिकायत से सियासी और धार्मिक बहस तेज (फोटो सोर्स : भाषा संवाद WhatsApp News Group)
BJP National President Nitin Nabin: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रदेश अध्यक्ष नितिन नबीन के स्वागत में आयोजित रोड शो के दौरान भगवान हनुमान के वेश में एक कलाकार द्वारा किए गए नृत्य को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। इस घटना पर धार्मिक भावनाएं आहत होने का आरोप लगाते हुए पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के अधिवक्ता तथा काउंसिल ऑफ लॉयर्स के चेयरमैन वासु रंजन ने चंडीगढ़ के पुलिस महानिदेशक (DGP) और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) को ईमेल के माध्यम से शिकायत भेजी है।
शिकायत में संबंधित लोगों के खिलाफ प्राथमिकी (FIR) दर्ज करने की मांग की गई है। वहीं, विश्व हिंदू परिषद (VHP) के केंद्रीय मंत्री अम्बरीश ने भी इस पूरे घटनाक्रम की कड़ी निंदा करते हुए इसे अनुचित बताया है।
जानकारी के अनुसार, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष नितिन नबीन के स्वागत के लिए लखनऊ में रोड शो आयोजित किया गया था। इस दौरान बड़ी संख्या में भाजपा कार्यकर्ता और समर्थक मौजूद थे। कार्यक्रम में सांस्कृतिक प्रस्तुतियों का भी आयोजन किया गया, जिसमें भगवान हनुमान के वेश में एक कलाकार ने संगीत की धुन पर नृत्य किया। इसी प्रस्तुति का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल होने लगा। वीडियो वायरल होने के बाद कुछ लोगों ने इसे धार्मिक आस्था से जोड़ते हुए आपत्ति जताई। सोशल मीडिया पर इस प्रस्तुति को लेकर पक्ष और विपक्ष दोनों तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आईं। कुछ लोगों ने इसे सांस्कृतिक प्रस्तुति बताया, जबकि अन्य ने इसे धार्मिक प्रतीकों की गरिमा के विरुद्ध करार दिया।
इस मामले में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के अधिवक्ता और "काउंसिल ऑफ लॉयर्स" के चेयरमैन वासु रंजन ने चंडीगढ़ के DGP और SSP को ईमेल के माध्यम से शिकायत भेजी है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि भगवान हनुमान के स्वरूप में इस प्रकार का नृत्य करोड़ों हिंदुओं की धार्मिक भावनाओं को आहत करता है। उन्होंने मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और यदि किसी स्तर पर कानून का उल्लंघन पाया जाता है तो संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध भारतीय कानून के अनुसार प्राथमिकी दर्ज कर उचित कार्रवाई की जाए। शिकायत में यह भी कहा गया है कि धार्मिक प्रतीकों और देवी-देवताओं के स्वरूप का उपयोग सार्वजनिक कार्यक्रमों में अत्यंत सावधानी और सम्मान के साथ किया जाना चाहिए।
विश्व हिंदू परिषद (VHP) के केंद्रीय मंत्री अम्बरीश ने भी इस पूरे मामले पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि भगवान हनुमान करोड़ों हिंदुओं की आस्था के केंद्र हैं और उनके स्वरूप का किसी भी प्रकार से ऐसा प्रदर्शन नहीं होना चाहिए, जिससे श्रद्धालुओं की भावनाएँ आहत हों।
अम्बरीश ने इस घटना की निंदा करते हुए कहा कि धार्मिक प्रतीकों का उपयोग करते समय आयोजकों और संबंधित लोगों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। उन्होंने कहा कि आस्था से जुड़े विषयों पर किसी भी प्रकार की लापरवाही सामाजिक विवाद का कारण बन सकती है।
घटना का वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर इस मुद्दे को लेकर व्यापक चर्चा शुरू हो गई है। एक वर्ग का कहना है कि धार्मिक पात्रों के वेश में मनोरंजनात्मक नृत्य करना उचित नहीं है और इससे धार्मिक गरिमा प्रभावित होती है। वहीं, कुछ लोगों का तर्क है कि यह केवल सांस्कृतिक प्रस्तुति थी और इसका उद्देश्य किसी की भावनाओं को ठेस पहुंचाना नहीं था। इसी बहस के बीच कई लोगों ने आयोजकों से भविष्य में इस प्रकार के आयोजनों में अधिक संवेदनशीलता बरतने की अपील भी की है।
चूंकि यह कार्यक्रम भाजपा प्रदेश अध्यक्ष नितिन नबीन के स्वागत से जुड़ा था, इसलिए मामला राजनीतिक रंग भी लेने लगा है। विपक्षी दलों के कुछ नेताओं ने इस मुद्दे को लेकर भाजपा पर सवाल उठाए हैं, जबकि भाजपा की ओर से इस विवाद पर तत्काल कोई विस्तृत आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
वरिष्ठ राजनीतिक विश्लेषक मनोज उपाध्याय का मानना है कि धार्मिक प्रतीकों से जुड़े मामलों में विवाद अक्सर राजनीतिक विमर्श का हिस्सा बन जाते हैं। ऐसे मामलों में सभी पक्षों से संयम और जिम्मेदारी की अपेक्षा की जाती है ताकि अनावश्यक तनाव की स्थिति उत्पन्न न हो।
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत जैसे विविध धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं वाले देश में सार्वजनिक कार्यक्रमों के दौरान धार्मिक प्रतीकों और देवी-देवताओं के स्वरूप का उपयोग अत्यंत सावधानी से किया जाना चाहिए। किसी भी प्रस्तुति का उद्देश्य यदि सांस्कृतिक अभिव्यक्ति हो, तब भी यह सुनिश्चित करना आवश्यक है कि उससे किसी समुदाय या श्रद्धालु की भावनाएं आहत न हों। कानूनी सूत्रों का भी कहना है कि यदि किसी मामले में धार्मिक भावनाएं आहत होने की शिकायत मिलती है, तो जांच एजेंसियां उपलब्ध तथ्यों, वीडियो और अन्य साक्ष्यों के आधार पर निष्पक्ष जांच करती हैं। जांच के बाद ही यह तय होता है कि किसी प्रकार का कानूनी अपराध बनता है या नहीं।
फिलहाल इस मामले में शिकायत भेजे जाने के बाद सभी की नजर इस बात पर है कि संबंधित पुलिस और जांच एजेंसियां क्या कदम उठाती हैं। यदि शिकायत पर संज्ञान लिया जाता है तो मामले की जांच के बाद आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।
Updated on:
07 Jul 2026 12:23 pm
Published on:
07 Jul 2026 12:20 pm
