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UP Election 2027: कौन हैं जेके आजाद? मोहम्मदाबाद गोहना सीट से बने हैं BSP के प्रत्याशी, पार्टी में शुरू हुआ विरोध

BSP Candidate JK Azad: मऊ की मुहम्मदाबाद गोहना सीट से अचानक जेके आजाद के नाम के ऐलान ने सभी को चौंका दिया है। बसपा ने जेके आजाद को गोहना सीट से प्रत्याशी घोषित किया है। जानिए कौन हैं जेके आजाद?
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लखनऊ

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Mohsina Bano

Jul 07, 2026

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जेके आजाद (फोटो- फेसबुक पेज)

Mohammadabad Gohna BSP Candidate: उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव की बिसात अभी से बिछने लगी है। बहुजन समाज पार्टी (BSP) ने मऊ जिले की एकमात्र सुरक्षित विधानसभा सीट मोहम्मदाबाद गोहना से अपना पहला दांव चल दिया है। बसपा ने जेके आजाद को यहां से अपना प्रत्याशी घोषित किया है। हालांकि, इस ऐलान के साथ ही बसपा के अंदर स्थानीय कार्यकर्ताओं में विरोध के सुर उठने लगे हैं, जिससे पार्टी की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।

कौन हैं जेके आजाद?

मोहम्मदाबाद गोहना सीट से टिकट मिलने के बाद हर कोई यह जानना चाहता है कि आखिर जेके आजाद कौन हैं, जिन पर बसपा सुप्रीमो ने इतना बड़ा दांव खेला है। बसपा के युवा प्रत्याशी जेके आजाद मूल रूप से मऊ के पड़ोसी जिले आजमगढ़ के रहने वाले हैं। उनका घर जहानागंज नगर पंचायत के वार्ड नंबर 6 में है। बता दें वे एक गैर-राजनीतिक परिवार से ताल्लुक रखते हैं और उन्होंने आजमगढ़ में बसपा संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करने का काम किया है। इससे पहले आजाद ने जहानागंज नगर पंचायत चुनाव में भी अपनी किस्मत आजमानी चाही थी लेकिन तब पार्टी से टिकट नहीं मिल पाया था।

कार्यकर्ता कर रहे बाहरी होने का विरोध

बसपा के स्थानीय कार्यकर्ता जेके आजाद को बाहरी बताकर उनके नाम का कड़ा विरोध कर रहे हैं। समर्पित कार्यकर्ताओं का सवाल है कि जब जिले में ही पार्टी के पास कर्मठ नेताओं की भरमार है तो फिर बाहर से प्रत्याशी लाने की क्या जरूरत थी। उधर मऊ बसपा जिलाध्यक्ष शैलेंद्र कुमार सिंटू ने इसे पार्टी का आंतरिक मामला बताया है। उनका कहना है कि अगर कोई विरोध है तो उसे आपस में बैठकर सुलझा लिया जाएगा और सभी मिलकर बहन जी यानी मायावती को मजबूत करने का काम करेंगे।

मायावती ने क्यों जताया भरोसा?

मोहम्मदाबाद गोहना विधानसभा सीट के समीकरणों की बात करें तो वर्तमान में यहां से समाजवादी पार्टी के राजेंद्र कुमार विधायक हैं। दलित मतदाताओं की बहुलता वाली यह सीट कभी भाजपा का मजबूत गढ़ हुआ करती थी। करीब साढ़े तीन लाख से ज्यादा मतदाताओं वाली इस सीट पर दलितों के अलावा यादव, मुस्लिम, वैश्य, चौहान, राजभर, ठाकुर, ब्राह्मण और भूमिहार मतदाता चुनाव के परिणामों का रुख मोड़ने में अहम भूमिका निभाते हैं। अब देखना दिलचस्प होगा कि बाहरी प्रत्याशी को लेकर उठ रही इस अंतर्कलह को बसपा चुनाव से पहले कैसे शांत कर पाती है।