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Ram Mandir Donation: राम मंदिर दान विवाद पर कांग्रेस का हमला, SIT रिपोर्ट के बाद पारदर्शिता पर गंभीर सवाल उठे

Congress Targets Ram Mandir Donation:अयोध्या राम मंदिर में दान राशि की कथित अनियमितताओं को लेकर कांग्रेस ने SIT रिपोर्ट के आधार पर सरकार और मंदिर प्रबंधन पर सवाल उठाए तथा पारदर्शी जांच की मांग की।
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लखनऊ

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Ritesh Singh

Jul 07, 2026

राम मंदिर दान विवाद: SIT रिपोर्ट के बाद कांग्रेस ने उठाए बड़े सवाल, पारदर्शिता की मांग तेज (फोटो सोर्स : भाषा संवाद WhatsApp News Group)

राम मंदिर दान विवाद: SIT रिपोर्ट के बाद कांग्रेस ने उठाए बड़े सवाल, पारदर्शिता की मांग तेज (फोटो सोर्स : भाषा संवाद WhatsApp News Group)

Congress Targets Ram Mandir Donation Theft: राम मंदिर में चढ़ावे की राशि में कथित अनियमितताओं को लेकर गठित विशेष जांच दल (SIT) की रिपोर्ट सामने आने के बाद उत्तर प्रदेश की राजनीति एक बार फिर गरमा गई है। कांग्रेस ने इस रिपोर्ट को आधार बनाते हुए सरकार और मंदिर प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता सुरेंद्र राजपूत ने कहा कि दान राशि की गिनती में सामने आई अनियमितताएं वही हैं, जिनकी ओर कांग्रेस पहले से ध्यान दिलाती रही है। उनका कहना है कि यह मामला केवल गिने गए धन तक सीमित नहीं है, बल्कि उन दान राशियों की भी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए, जिनके बारे में अब तक स्पष्ट जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है।

SIT रिपोर्ट पर कांग्रेस की प्रतिक्रिया

लखनऊ में मीडिया से बातचीत के दौरान कांग्रेस प्रवक्ता सुरेंद्र राजपूत ने कहा कि SIT की रिपोर्ट ने यह स्पष्ट कर दिया है कि दान की गिनती में अनियमितताओं के आरोप पूरी तरह निराधार नहीं थे। उन्होंने कहा, "देखिए, गिनती में खुलासा हुआ। यही हम शुरू से कह रहे थे कि जो पैसे गिने गए हैं, उनकी अनियमितता तो सामने आ ही जाएगी। लेकिन असली सवाल उन रुपयों का है, जो बिना गिने या जिनके संबंध में पूरी जानकारी सामने नहीं आई। उनकी भी जांच होनी चाहिए।"

राजपूत ने कहा कि यदि श्रद्धालुओं द्वारा अर्पित दान का पूरा और पारदर्शी लेखा-जोखा रखा जाता, तो इस तरह के विवाद पैदा ही नहीं होते। उन्होंने कहा कि करोड़ों लोगों की आस्था से जुड़े किसी भी धार्मिक संस्थान में वित्तीय पारदर्शिता सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।

कुंभ और चढ़ावे के आंकड़ों पर उठाए सवाल

सुरेंद्र राजपूत ने अपने बयान में कुंभ मेले के दौरान आने वाले श्रद्धालुओं और मंदिर में जमा चढ़ावे के आंकड़ों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि यदि कुंभ के दौरान लगभग 16 करोड़ श्रद्धालु आए और मंदिर के कोष में केवल 84 करोड़ रुपये का चढ़ावा दर्ज हुआ, तो यह आंकड़ा कई सवाल खड़े करता है।

उन्होंने कहा, "अगर 16 करोड़ श्रद्धालुओं में प्रत्येक व्यक्ति ने औसतन सिर्फ 100 रुपये भी दान दिए होते, तो करीब 1600 करोड़ रुपये की राशि जमा होनी चाहिए थी। ऐसे में यह समझना जरूरी है कि वास्तविक दान राशि कितनी थी और उसका पूरा हिसाब सार्वजनिक क्यों नहीं किया गया।" कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि यह केवल गणित का सवाल नहीं, बल्कि श्रद्धालुओं की भावनाओं और उनके विश्वास से जुड़ा विषय है। इसलिए पूरे मामले की निष्पक्ष और व्यापक जांच कराई जानी चाहिए।

पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग

कांग्रेस ने इस पूरे मामले में दान व्यवस्था को पूरी तरह पारदर्शी बनाने की मांग की है। पार्टी का कहना है कि मंदिरों और धार्मिक संस्थानों में आने वाले चढ़ावे का डिजिटल रिकॉर्ड, नियमित ऑडिट और सार्वजनिक लेखा-जोखा उपलब्ध कराया जाना चाहिए ताकि किसी भी प्रकार की आशंका या विवाद की स्थिति उत्पन्न न हो।

सुरेंद्र राजपूत ने कहा कि करोड़ों श्रद्धालु अपनी श्रद्धा और विश्वास के साथ दान करते हैं। ऐसे में यह सुनिश्चित करना सरकार और संबंधित प्रबंधन की जिम्मेदारी है कि प्रत्येक रुपये का सही उपयोग हो और उसका पूरा हिसाब सार्वजनिक रूप से उपलब्ध रहे।

राजनीतिक माहौल हुआ गर्म

राम मंदिर से जुड़ा यह मुद्दा सामने आने के बाद प्रदेश की राजनीति में भी हलचल तेज हो गई है। कांग्रेस लगातार इस विषय को लेकर सरकार पर हमलावर है, जबकि भारतीय जनता पार्टी और संबंधित पक्षों की ओर से पहले भी आरोपों को खारिज किया जाता रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आस्था से जुड़े इस संवेदनशील मुद्दे पर आने वाले दिनों में राजनीतिक बयानबाजी और तेज हो सकती है।

विपक्ष का कहना है कि यदि SIT रिपोर्ट में किसी स्तर पर अनियमितता की पुष्टि हुई है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। वहीं, भाजपा का पक्ष रहा है कि किसी भी प्रकार की जांच कानून के दायरे में निष्पक्ष रूप से पूरी की जाएगी और तथ्यों के आधार पर ही निर्णय लिया जाएगा।

श्रद्धालुओं का भरोसा सर्वोपरि

धार्मिक संस्थानों में आने वाला दान करोड़ों लोगों की आस्था और विश्वास का प्रतीक होता है। ऐसे में किसी भी प्रकार की वित्तीय अनियमितता का आरोप स्वाभाविक रूप से लोगों के बीच चिंता पैदा करता है। विशेषज्ञों का मानना है कि आधुनिक तकनीक के माध्यम से दान व्यवस्था को अधिक पारदर्शी बनाया जा सकता है, जिससे श्रद्धालुओं का विश्वास और मजबूत होगा तथा भविष्य में इस प्रकार के विवादों की संभावना कम होगी।

फिलहाल कांग्रेस द्वारा उठाए गए सवालों और SIT रिपोर्ट को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि जांच एजेंसियां आगे क्या कदम उठाती हैं और संबंधित पक्ष इन आरोपों पर किस प्रकार का विस्तृत जवाब देते हैं। यह मामला केवल राजनीतिक विवाद तक सीमित नहीं है, बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था, पारदर्शिता और जवाबदेही से भी जुड़ा हुआ है। ऐसे में आने वाले दिनों में इस विषय पर और अधिक तथ्य सामने आने की संभावना बनी हुई है।