UP News: डिप्टी CM केशव प्रसाद मौर्य ने बड़ा बयान दिया। उन्होंने विभागीय अधिकारियों को कड़े निर्देश जारी किए। उन्होंने स्पष्ट किया कि विकास से जुड़े कार्य प्रदेश सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता हैं।
UP News: उत्तर प्रदेश के डिप्टी CM केशव प्रसाद मौर्य ने विकास परियोजनाओं में पारदर्शिता, समयबद्धता और गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए सख्त रुख अपनाते हुए स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि अगर किसी परियोजना में देरी पाई जाती है तो केवल ठेकेदार ही नहीं, बल्कि उससे जुड़े जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ भी कठोर कार्रवाई की जाएगी।
डिप्टी CM केशव प्रसाद मौर्य ने यह भी निर्देश दिया कि सभी निर्माणाधीन परियोजनाओं का 15 दिनों के भीतर अनिवार्य रूप से स्थलीय निरीक्षण किया जाए। डिप्टी CM द्वारा 7 जनवरी को ग्रामीण अभियंत्रण विभाग की समीक्षा बैठक में दिए गए निर्देशों का कड़ाई से अनुपालन शुरू हो गया है। इसी क्रम में विभाग ने वित्तीय वर्ष 2025-26 के व्यय की विस्तृत स्थिति पेश की। बैठक के दौरान अवगत कराया गया कि वित्तीय वर्ष 2025-26 में ग्रामीण अभियंत्रण विभाग के लिए कुल 709.88 करोड़ का बजट प्रावधान है। जिसमें 35 लाख पूंजीगत मद और 709.53 करोड़ राजस्व मद के अंतर्गत हैं।
राजस्व मद में विभागीय मांग के सापेक्ष शासन द्वारा 431.03 करोड़ की स्वीकृति दी गई है, जो कुल बजट का 60.74% है। स्वीकृत धनराशि के सापेक्ष विभागाध्यक्ष द्वारा 301.13 करोड़ का आवंटन किया गया। जिसमें से 7 जनवरी तक 215.19 करोड़ रुपए (लगभग 49.92 प्रतिशत) का व्यय किया जा चुका है।
डिप्टी CM मौर्य ने व्यय की गति तेज करने और स्वीकृत धनराशि का समयबद्ध एवं गुणवत्तापूर्ण उपयोग सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। डिप्टी CM ने कहा कि बचत धनराशि का इस्तेमाल जनहितकारी कार्यों में किया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि विकास से जुड़े कार्य प्रदेश सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता हैं। साथ ही इनमें किसी भी स्तर पर शिथिलता स्वीकार नहीं की जाएगी।
समीक्षा के दौरान उन्होंने विभागीय अधिकारियों को कड़े निर्देश जारी किए। इसके तहत मानक के अनुरूप कार्य ना करने या अनावश्यक देरी करने वाले ठेकेदारों को चिह्नित कर ब्लैकलिस्ट किया जाए। अगले 15 दिनों के भीतर सभी निर्माणाधीन परियोजनाओं का स्थलीय निरीक्षण कर रिपोर्ट शासन को भेजी जाए। सभी परियोजनाएं वित्तीय वर्ष की समाप्ति से पहले हर हाल में पूर्ण की जाएं। परियोजना में देरी की स्थिति में ठेकेदारों के साथ-साथ जिम्मेदार अधिकारियों पर भी सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।