Biggest Political Show On April 14: 14 अप्रैल को बड़ा पॉलिटिकल शो होने जा रहा है। जानिए, PM नरेंद्र मोदी, अखिलेश यादव और मायावती तक पार्टियों का 'गेमप्लान' क्या है?
Biggest Political Show On April 14: उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव 2027 को देखते हुए सियासी हलचल तेज हो गई है। 14 अप्रैल को डॉ. भीमराव आंबेडकर की जयंती के मौके पर सभी प्रमुख राजनीतिक दल दलित वोट बैंक को साधने के लिए बड़े स्तर पर रणनीति बना रहे हैं। मेरठ समेत पूरे प्रदेश में इस दिन को लेकर राजनीतिक गतिविधियां चरम पर हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) वेस्ट यूपी में लगातार सक्रिय हैं। 2 महीनों के भीतर यह उनकी तीसरी बड़ी रैली होगी। 14 अप्रैल को सहारनपुर में दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे के उद्घाटन के साथ एक विशाल जनसभा प्रस्तावित है। इस रैली को केवल विकास परियोजना के उद्घाटन तक सीमित नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे दलित वोट बैंक को साधने की बड़ी रणनीति के रूप में देखा जा रहा है। इससे पहले PM फरवरी में मेरठ और मार्च में जेवर में भी जनसभाएं कर चुके हैं।
BJP ने 12 अप्रैल तक ‘गांव चलो, बस्ती चलो’ अभियान चलाने का फैसला लिया है। इस अभियान के तहत कार्यकर्ता दलित बस्तियों में रात्रि विश्राम करेंगे और सामाजिक समरसता का संदेश देंगे। इस पहल का मकसद जमीनी स्तर पर संपर्क बढ़ाकर दलित समुदाय के बीच अपनी पकड़ मजबूत करना है।
कांग्रेस पार्टी ने भी आंबेडकर जयंती को लेकर व्यापक योजना तैयार की है। पार्टी ने सभी 75 जिलों में कार्यक्रम आयोजित करने के निर्देश दिए हैं। कांग्रेस का फोकस संविधान, सामाजिक न्याय और दलित अधिकारों पर रहेगा। पार्टी दलित समुदाय को यह संदेश देने की कोशिश करेगी कि वह उनके अधिकारों की सच्ची संरक्षक है। चर्चा है कि इसके साथ ही BJP सरकार पर दलित विरोधी नीतियों के आरोप भी लगाए जाएंगे।
बहुजन समाज पार्टी (BSP) की प्रमुख मायावती (Mayawati) ने आंबेडकर जयंती को बड़े शक्ति प्रदर्शन के रूप में मनाने की रणनीति बनाई है। लखनऊ में सभी 75 जिलों और 18 मंडलों का संयुक्त कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। यह आयोजन सिर्फ जयंती तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसे 2027 चुनाव के बिगुल के रूप में देखा जा रहा है। बसपा अपने पारंपरिक दलित वोट बैंक को फिर से मजबूत करने की कोशिश में है।
आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) भी इस दिन को बड़े स्तर पर मनाने जा रही है। पार्टी ‘समानता दिवस’ के रूप में आंबेडकर जयंती मनाएगी। “संवैधानिक अधिकार बचाओ, भाईचारा बनाओ” जैसे अभियानों के जरिए दलित, पिछड़े और अल्पसंख्यक समुदाय को जोड़ने की रणनीति बनाई गई है। बूथ और गांव स्तर तक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) ने आंबेडकर जयंती को गांव-गांव तक मनाने का आह्वान किया है। सपा इस दिन को सामाजिक एकता और जागरूकता अभियान के रूप में पेश करना चाहती है। पार्टी कार्यकर्ताओं को निर्देश दिए गए हैं कि वे संविधान बचाने और सामाजिक न्याय का संदेश लोगों तक पहुंचाएं।
सियासी गलियारों में चर्चा है कि आंबेडकर जयंती इस बार केवल एक श्रद्धांजलि कार्यक्रम नहीं, बल्कि राजनीतिक ताकत दिखाने का बड़ा मंच बनती जा रही है। सभी दल अपने-अपने तरीके से दलित समाज के बीच पैठ बनाने की कोशिश कर रहे हैं। 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले दलित वोट बैंक को लेकर सियासी मुकाबला और तेज हो सकता है।