
पश्चिमी यूपी में आतंकी मॉड्यूल का खुलासा, शामली से छह युवक हिरासत में, जांच तेज (फोटो सोर्स : भाषा WhatsApp News Group)
Terror Module Busted in UP: उत्तर प्रदेश में सुरक्षा एजेंसियों ने एक बड़े आतंकी मॉड्यूल का खुलासा करते हुए पश्चिमी यूपी में सक्रिय संदिग्ध नेटवर्क पर शिकंजा कस दिया है। हाल ही में लखनऊ के चारबाग रेलवे स्टेशन पर संभावित धमाके की साजिश को विफल करने के बाद अब जांच का दायरा तेजी से बढ़ाया गया है। इसी कड़ी में एंटी टेररिस्ट स्क्वाड (ATS) ने शामली जिले से छह युवकों को हिरासत में लेकर गहन पूछताछ शुरू की है।
सूत्रों के अनुसार, कुछ दिन पहले एटीएस ने लखनऊ के चारबाग रेलवे स्टेशन पर एक बड़ी आतंकी साजिश को नाकाम करते हुए चार संदिग्धों को गिरफ्तार किया था। इनकी पहचान मेरठ निवासी साकिब और अरबाब तथा गौतमबुद्धनगर के लोकेश और विकास के रूप में हुई है।
इन आरोपियों के पास से संदिग्ध सामग्री बरामद की गई थी, जिससे यह संकेत मिला कि वे किसी बड़ी वारदात को अंजाम देने की योजना बना रहे थे। प्रारंभिक पूछताछ में सामने आए तथ्यों ने जांच एजेंसियों को पश्चिमी उत्तर प्रदेश की ओर ध्यान केंद्रित करने के लिए मजबूर किया।
एटीएस द्वारा गिरफ्तार आरोपियों से की जा रही पूछताछ में कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। सूत्रों के मुताबिक, इन संदिग्धों के संपर्क पश्चिमी यूपी के एक दर्जन से अधिक युवकों से जुड़े पाए गए हैं। यह भी सामने आया है कि ये सभी युवक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के माध्यम से एक-दूसरे के संपर्क में आए थे। धीरे-धीरे यह संपर्क एक संगठित मॉड्यूल का रूप लेता गया, जिसमें बाहरी तत्वों की भूमिका भी संदिग्ध बताई जा रही है।
पूछताछ में सामने आए नामों के आधार पर एटीएस ने शामली जिले में कार्रवाई करते हुए छह युवकों को हिरासत में लिया है। इन सभी से गहन पूछताछ की जा रही है ताकि यह स्पष्ट किया जा सके कि उनका इस मॉड्यूल में क्या रोल था। अधिकारियों का कहना है कि अभी जांच प्रारंभिक चरण में है और सभी तथ्यों की बारीकी से जांच की जा रही है। यदि पुख्ता साक्ष्य मिलते हैं, तो संबंधित युवकों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
जांच एजेंसियों को इस बात की भी आशंका है कि यह मॉड्यूल पाकिस्तान में बैठे हैंडलर्स के संपर्क में था। सोशल मीडिया और एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग ऐप्स के जरिए इन युवकों को निर्देश दिए जा रहे थे। सूत्रों का कहना है कि संदिग्धों के डिजिटल उपकरणों की फॉरेंसिक जांच की जा रही है, जिससे उनके संपर्कों और गतिविधियों का पूरा ब्योरा सामने आ सके।
जांच में यह भी सामने आया है कि युवकों को सोशल मीडिया के माध्यम से बहकाया गया और उन्हें धीरे-धीरे कट्टरपंथी विचारधारा की ओर प्रेरित किया गया। इसके बाद उन्हें विभिन्न गतिविधियों के लिए तैयार किया गया। विशेषज्ञों का मानना है कि सोशल मीडिया के जरिए युवाओं को इस तरह के नेटवर्क से जोड़ना एक गंभीर चुनौती बनता जा रहा है, जिस पर कड़ी निगरानी की आवश्यकता है।
इस पूरे मामले के सामने आने के बाद एटीएस और अन्य सुरक्षा एजेंसियों ने प्रदेशभर में सतर्कता बढ़ा दी है। संवेदनशील स्थानों, रेलवे स्टेशनों और भीड़भाड़ वाले इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। इसके साथ ही, संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखने के लिए खुफिया तंत्र को भी सक्रिय कर दिया गया है।
एटीएस अधिकारियों का कहना है कि हिरासत में लिए गए युवकों से पूछताछ के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि उनका इस मॉड्यूल में कितना गहरा जुड़ाव था। यदि उनके खिलाफ ठोस साक्ष्य मिलते हैं, तो उन्हें गिरफ्तार कर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
यह मामला एक बार फिर यह संकेत देता है कि आतंकी नेटवर्क अब नए-नए तरीकों से युवाओं को अपने जाल में फंसाने की कोशिश कर रहे हैं। ऐसे में सुरक्षा एजेंसियों के सामने इन नेटवर्क्स को समय रहते पहचानना और नष्ट करना एक बड़ी चुनौती है।
Published on:
09 Apr 2026 12:01 pm
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