Lucknow University: लखनऊ विश्वविद्यालय के शोध अध्यादेश 2025 से स्नातक कॉलेज शिक्षकों को पीएचडी निर्देशन से वंचित करने के फैसले के खिलाफ लुआक्टा ने आंदोलन का ऐलान किया है। 26 अगस्त को सामूहिक अवकाश, राजभवन मार्च, गिरफ्तारी, 5 सितंबर को काला दिवस और 10 सितंबर को दीक्षांत समारोह विरोध सहित चरणबद्ध आंदोलन की योजना बनाई गई है।
LU Teachers to Protest: लखनऊ विश्वविद्यालय (लविवि) की अकादमिक काउंसिल द्वारा यूजीसी की गाइडलाइन को अक्षरशः मंजूरी देने के बाद संबद्ध स्नातक डिग्री कॉलेजों के शिक्षकों से पीएचडी का अधिकार छिन गया है। अब ऐसे कॉलेजों के मास्टर शोध निर्देशन नहीं कर सकेंगे। इस निर्णय के खिलाफ लखनऊ विश्वविद्यालय एसोसिएटेड कॉलेज टीचर्स एसोसिएशन (लुआक्टा) ने आंदोलन का ऐलान किया है।
लविवि से संबद्ध डिग्री कॉलेजों के शिक्षकों का कहना है कि अकादमिक काउंसिल ने बिना विरोध यूजीसी की गाइडलाइन को पास कर दिया, जिससे स्नातक शिक्षकों को शोध कार्य से बाहर कर दिया गया है। कुलपति मनुका खन्ना पर आरोप लगाया गया कि उन्होंने शिक्षक संगठनों की आपत्तियों को अनदेखा कर निर्णय को लागू किया। लुआक्टा ने घोषणा की है कि कुलपति के खिलाफ मोर्चा खोला जाएगा और कार्य परिषद की बैठक के दिन धरना-प्रदर्शन किया जाएगा।
लुआक्टा का कहना है कि नए अध्यादेश के लागू होने के बाद पूरे प्रदेश के सिर्फ गिने-चुने डिग्री कॉलेज ऐसे होंगे जहाँ के शिक्षकों को शोध का अवसर मिलेगा।
इस विवाद में अब राजनीतिक स्वर भी जुड़ गया है। शिक्षक संगठनों के प्रदर्शन को देखते हुए कई बड़े नेताओं को ज्ञापन दिया जाएगा। राजनाथ सिंह, बृजेश पाठक, डॉ. दिनेश शर्मा, रजनी तिवारी और राहुल गांधी जैसे नेताओं के समक्ष यह मामला पहुंचाने की तैयारी है। लुआक्टा का दावा है कि यदि विश्वविद्यालय ने निर्णय वापस नहीं लिया तो आंदोलन और तेज होगा।
आने वाले दिनों में यह मुद्दा उच्च शिक्षा क्षेत्र की सबसे बड़ी बहस बन सकता है। यदि विश्वविद्यालय ने अपने निर्णय पर पुनर्विचार नहीं किया तो 5 सितंबर (काला दिवस) और 10 सितम्बर (दीक्षांत समारोह विरोध) जैसे चरण इस आंदोलन को और उग्र बना सकते हैं।