
Naimish Nagar scheme: लखनऊ विकास प्राधिकरण की वरुण विहार और नैमिष नगर आवासीय योजनाओं के भूमि पूजन के साथ जहां राजधानी के विस्तार की नई तस्वीर सामने आई, वहीं इन योजनाओं के लिए अपनी जमीन देने वाले किसानों के अनुभव भी चर्चा में रहे। किसानों ने बताया कि सहमति के आधार पर भूमि देने के बाद उन्हें मुआवजे की राशि प्राप्त हुई, जिसका इस्तेमाल उन्होंने अपनी जरूरत और भविष्य की योजनाओं के मुताबिक किया। किसी किसान ने दूसरी जगह जमीन खरीदी तो किसी ने मकान बनवाया। कुछ परिवारों ने बच्चों की शिक्षा के लिए भी धनराशि को सुरक्षित रखा है।
LDA की दोनों योजनाएं लखनऊ के विस्तार से जुड़ी बड़ी आवासीय परियोजनाओं के रूप में विकसित की जा रही हैं। वरुण विहार योजना आगरा एक्सप्रेसवे के आसपास और नैमिष नगर योजना सीतापुर रोड क्षेत्र में विकसित की जा रही है। हालिया रिपोर्टों के अनुसार दोनों योजनाओं में हजारों आवासीय भूखंड प्रस्तावित हैं और इनके माध्यम से राजधानी के नए क्षेत्रों में आवासीय एवं बुनियादी ढांचे का विस्तार किया जाना है।
वरुण विहार योजना के लिए जमीन देने वाले किसानों के अनुसार भूमि के बदले मिली धनराशि ने उन्हें अपनी संपत्ति को नए तरीके से व्यवस्थित करने का अवसर दिया है। ग्राम दोना के मुलेश्वर सिंह ने बताया कि योजना के अंतर्गत उनकी जमीन ली गई और उन्होंने अपनी सहमति से भूमि दी। मुआवजे के रूप में प्राप्त राशि का इस्तेमाल उन्होंने अलग-अलग स्थानों पर जमीन खरीदने में किया है। उनका कहना है कि नई योजना के विकसित होने से उनके गांव और आसपास के क्षेत्र में भी विकास की संभावनाएं बढ़ी हैं। किसान परिवारों के लिए भूमि केवल संपत्ति नहीं, बल्कि आय और भविष्य की सुरक्षा का साधन होती है। ऐसे में मुआवजे की राशि का उपयोग नई जमीन, मकान और परिवार की जरूरतों के लिए किया जाना उनके लिए महत्वपूर्ण है।
ग्राम रेवरी की रामदेई ने भी योजना के लिए अपनी जमीन दिए जाने और मुआवजा मिलने की बात कही। उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनकी जमीन योजना में गई और उन्हें अच्छा मुआवजा प्राप्त हुआ। रामदेई ने सरकार की प्रक्रिया के प्रति संतोष जताते हुए कहा कि जमीन के बदले मिली धनराशि परिवार के लिए उपयोगी साबित होगी। किसानों के इन अनुभवों के बीच एलडीए की भूमि खरीद प्रक्रिया में आपसी सहमति और निर्धारित प्रक्रिया का उल्लेख भी सामने आया है। एलडीए के बोर्ड दस्तावेज में वरुण विहार और नैमिष नगर योजनाओं से आच्छादित गांवों में सहमति के आधार पर भूमि क्रय के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) को मंजूरी दिए जाने का उल्लेख है।
ग्राम दोना के किसान कमलेश कुमार का अनुभव इस पूरी प्रक्रिया में खास रहा। उनके अनुसार वरुण विहार योजना के लिए उन्होंने एक हेक्टेयर जमीन सहमति के आधार पर एलडीए को दी। इसके बदले उन्हें 2.80 करोड़ रुपये का मुआवजा मिला। कमलेश कुमार ने बताया कि प्राप्त धनराशि से उन्होंने उन्नाव जिले में जमीन खरीदी और अपना मकान भी बनवाया। कमलेश का कहना है कि उनके लिए जमीन के बदले मिली राशि ने भविष्य को नए सिरे से व्यवस्थित करने का अवसर दिया। उन्होंने यह भी कहा कि जिस क्षेत्र में उनकी जमीन थी, वहां आवासीय योजना के विकसित होने से आसपास के इलाके में भी विकास की गतिविधियां बढ़ने की उम्मीद है। सड़क, आवास और दूसरी सुविधाओं के विस्तार से ग्रामीण क्षेत्र के शहरी क्षेत्र से जुड़ने की प्रक्रिया भी तेज हो सकती है।
नैमिष नगर योजना के लिए जमीन देने वाले किसानों ने भी मुआवजे की प्रक्रिया को लेकर अपने अनुभव साझा किए। बख्शी का तालाब निवासी सुषमा सिंह ने बताया कि कमलाबाद स्थित उनकी जमीन नैमिष नगर योजना के अंतर्गत एलडीए को दी गई। उनके अनुसार उन्हें 2.90 करोड़ रुपये का मुआवजा मिला।
सुषमा सिंह ने मुआवजे की प्रक्रिया को पारदर्शी बताते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रति आभार व्यक्त किया। उनका कहना है कि जमीन के बदले मिली धनराशि परिवार के लिए महत्वपूर्ण है और इससे भविष्य की आर्थिक योजनाओं को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी। नैमिष नगर योजना को सीतापुर रोड क्षेत्र में विकसित किया जा रहा है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार योजना में अलग-अलग आकार के आवासीय भूखंड प्रस्तावित हैं। योजना का उद्देश्य राजधानी के विस्तार के साथ नए आवासीय क्षेत्र को विकसित करना है।
नैमिष नगर योजना के तहत ग्राम सैदापुर में जमीन देने वाली नमरा फातिमा की कहानी भी अलग है। हाल ही में 12वीं कक्षा पास करने वाली नमरा नीट की तैयारी कर रही हैं। उनके अनुसार उनकी जमीन एलडीए को दिए जाने के बाद उन्हें 70 लाख 58 हजार रुपये की राशि एकमुश्त डीडी के माध्यम से प्राप्त हुई।
नमरा ने बताया कि मुआवजे की राशि प्राप्त करने में उन्हें किसी विशेष कठिनाई का सामना नहीं करना पड़ा। उन्होंने इस धनराशि का एक हिस्सा जमीन खरीदने में इस्तेमाल किया है, जबकि भविष्य में यह रकम उनकी मेडिकल शिक्षा के काम आएगी। उनके लिए जमीन का मुआवजा केवल संपत्ति के बदले मिली राशि नहीं, बल्कि उच्च शिक्षा और करियर की तैयारी के लिए आर्थिक आधार भी बन रहा है। नमरा का मानना है कि नैमिष नगर के विकसित होने से क्षेत्र में रोजगार और आवासीय सुविधाओं का विस्तार होगा। नई सड़कें, आवासीय क्षेत्र और दूसरी सुविधाएं विकसित होने के साथ आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में भी आर्थिक गतिविधियां बढ़ने की उम्मीद है।
बख्शी का तालाब के ओम प्रकाश अवस्थी ने भी नैमिष नगर योजना के लिए अपनी जमीन दी। उनके अनुसार करीब डेढ़ बीघे से अधिक जमीन के बदले उन्हें 1.96 करोड़ रुपये प्राप्त हुए। ओम प्रकाश अवस्थी ने बताया कि मुआवजा हासिल करने के लिए उन्हें बार-बार कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़े। उनके मुताबिक संकल्प पत्र भरने के करीब 15 दिन बाद उन्हें फोन के माध्यम से रजिस्ट्री के लिए बुलाया गया। इसके बाद डीडी के माध्यम से मुआवजे की राशि प्राप्त हुई और अगले दिन रकम उनके बैंक खाते में पहुंच गई। उन्होंने बताया कि प्राप्त मुआवजे से उन्होंने सीतापुर के बिसवां रोड पर 16 बीघे जमीन खरीदी है, जबकि शेष राशि बैंक में जमा कर दी है। ओम प्रकाश अवस्थी के लिए यह प्रक्रिया इसलिए भी महत्वपूर्ण रही क्योंकि उन्होंने अपनी मूल जमीन के बदले मिली राशि को फिर से भूमि में निवेश किया। इससे उनकी संपत्ति का स्वरूप बदला, लेकिन जमीन से जुड़ी उनकी आर्थिक सुरक्षा बनी रही। उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रति सम्मान जताते हुए सरकार को धन्यवाद दिया।
वरुण विहार और नैमिष नगर योजनाओं का विकास लखनऊ के विस्तार से भी सीधे जुड़ा है। वरुण विहार आगरा एक्सप्रेसवे क्षेत्र के निकट विकसित की जा रही है, जबकि नैमिष नगर सीतापुर रोड क्षेत्र में प्रस्तावित है। रिपोर्टों के अनुसार वरुण विहार में 2,847 और नैमिष नगर में 1,679 भूखंडों के पंजीकरण की व्यवस्था की गई है। दोनों योजनाओं के जरिए राजधानी के बढ़ते आवासीय दबाव को नए क्षेत्रों की ओर ले जाने की कोशिश की जा रही है। इसके साथ ही सड़कों, आवासीय सुविधाओं, व्यावसायिक गतिविधियों और अन्य बुनियादी सुविधाओं के विस्तार की संभावना है। ऐसे में योजनाओं से जुड़े गांवों के किसानों के लिए भूमि मुआवजा और उसके बाद धनराशि का इस्तेमाल एक महत्वपूर्ण आर्थिक पहलू बनकर सामने आया है।
इन किसानों की कहानियों में मुआवजे के इस्तेमाल के अलग-अलग तरीके दिखाई देते हैं। किसी ने नई जमीन खरीदी, किसी ने घर बनवाया और किसी ने बच्चों की पढ़ाई के लिए रकम को भविष्य की पूंजी के रूप में देखा। इससे यह भी सामने आता है कि भूमि अधिग्रहण या भूमि खरीद के बाद मिलने वाली राशि किसान परिवारों के लिए केवल तत्काल आर्थिक लाभ नहीं होती, बल्कि आगे की पीढ़ियों के लिए निवेश का माध्यम भी बन सकती है।