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UP Tourism: घरेलू पर्यटन में यूपी की बड़ी छलांग, तीर्थ के साथ विरासत और गांव भी बने नए आकर्षण

UP Leads India in Domestic Overnight Travel: उत्तर प्रदेश ने  घरेलू पर्यटन में नई छलांग लगाई है। ओवरनाइट ट्रैवल में देश की सबसे बड़ी हिस्सेदारी के साथ अब तीर्थ से गांवों तक पर्यटन का विस्तार हुआ है।
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लखनऊ

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Ritesh Singh

Sep 24, 2026

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (फोटो सोर्स : Ritesh Singh )

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (फोटो सोर्स : Ritesh Singh )

UP Religious Tourism: उत्तर प्रदेश में पर्यटन अब केवल धार्मिक यात्राओं और बड़े तीर्थ स्थलों तक सीमित नहीं रह गया है। अयोध्या, काशी और प्रयागराज जैसे प्रमुख धार्मिक केंद्रों के साथ अब चित्रकूट, मिर्जापुर, नैमिषारण्य, विंध्य क्षेत्र, बुंदेलखंड और ग्रामीण अंचलों को भी पर्यटन के नए केंद्र के रूप में विकसित करने की कोशिशें तेज़ हुई हैं। राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) के घरेलू पर्यटन व्यय सर्वेक्षण 2025-26 में उत्तर प्रदेश की यह व्यापक पर्यटन क्षमता देशभर के आंकड़ों में भी दिखाई दी है।

राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय की ओर से जारी घरेलू पर्यटन व्यय सर्वेक्षण के अनुसार, जुलाई 2025 से जून 2026 के दौरान पिछले 365 दिनों में पूरी हुई घरेलू रात्रि यात्राओं में उत्तर प्रदेश की हिस्सेदारी 15.7 फीसदी रही। इस मामले में तमिलनाडु 13.4 फीसदी और राजस्थान 8 फीसदी के साथ पीछे रहे। इन आंकड़ों में राज्य के भीतर और दूसरे राज्यों से आने वाले यात्रियों को मिलाकर कुल विजिटर-ट्रिप्स को देखा गया है।

तीर्थ यात्रा के साथ बढ़ा पर्यटन का दायरा

सर्वेक्षण की एक खास बात यह है कि देश में घरेलू रात्रि यात्राओं का सबसे बड़ा हिस्सा तीर्थ और धार्मिक यात्राओं का रहा। पिछले 365 दिनों में ऐसी यात्राओं में करीब 48 फीसदी यात्राएं तीर्थ एवं धार्मिक उद्देश्यों से हुईं। इसके बाद ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य एवं चिकित्सा तथा शहरी क्षेत्रों में अवकाश, मनोरंजन और घूमने-फिरने की यात्राओं का बड़ा हिस्सा रहा।

उत्तर प्रदेश के लिए यह आंकड़ा इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि राज्य की पहचान लंबे समय से धार्मिक पर्यटन के बड़े केंद्र के रूप में रही है। अयोध्या में राम मंदिर, वाराणसी में काशी विश्वनाथ धाम, प्रयागराज में महाकुंभ और संगम क्षेत्र जैसे प्रमुख केंद्र पहले से देश-दुनिया के श्रद्धालुओं को आकर्षित करते हैं। अब पर्यटन की रणनीति इन बड़े केंद्रों से आगे बढ़ाकर उनके आसपास के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक, प्राकृतिक और ग्रामीण स्थलों तक पहुंचाने पर केंद्रित दिखाई दे रही है।

15.5 फीसदी हिस्सेदारी वाली दूसरी श्रेणी में भी यूपी आगे

एनएसओ के इसी सर्वेक्षण में पिछले 30 दिनों में कारोबार, सामाजिक यात्रा, शिक्षा-प्रशिक्षण और अन्य उद्देश्यों से हुई रात्रि यात्राओं को अलग से दर्ज किया गया। इस श्रेणी में भी उत्तर प्रदेश 15.5 फीसदी हिस्सेदारी के साथ राज्यों में सबसे ऊपर रहा। बिहार की हिस्सेदारी 10.5 फीसदी और तमिलनाडु की 9.6 फीसदी रही। इससे यह संकेत मिलता है कि उत्तर प्रदेश में यात्राओं का आधार केवल तीर्थाटन नहीं है। सामाजिक मेलजोल, कारोबार, शिक्षा, प्रशिक्षण और अन्य कारणों से होने वाली यात्राओं में भी राज्य एक प्रमुख गंतव्य के रूप में सामने आ रहा है। हालांकि इस श्रेणी में 89 फीसदी यात्राएं सामाजिक उद्देश्य से थीं, जिससे यह भी स्पष्ट होता है कि घरेलू यात्रा का एक बड़ा हिस्सा पारिवारिक और सामाजिक संपर्कों से जुड़ा है।

चित्रकूट-मिर्जापुर जैसे गंतव्यों पर बढ़ा फोकस

पर्यटन के विस्तार का असर उन जिलों में भी दिखाई दे रहा है जो लंबे समय तक प्रदेश के बड़े पर्यटन मानचित्र पर अपेक्षाकृत पीछे रहे। विभागीय आंकड़ों के अनुसार चित्रकूट में पर्यटकों की संख्या 2024 में करीब 1.18 करोड़ से बढ़कर 2025 में 3.65 करोड़ से अधिक दर्ज की गई। इसी अवधि में मिर्जापुर में पर्यटकों की संख्या करीब 1.41 करोड़ से बढ़कर 2.10 करोड़ से अधिक हुई। चित्रकूट में रामायण से जुड़ी आस्था, धार्मिक महत्व और प्राकृतिक परिवेश पर्यटन का आधार हैं, जबकि मिर्जापुर-विंध्य क्षेत्र में धार्मिक स्थलों के साथ प्राकृतिक और सांस्कृतिक आकर्षण मौजूद हैं। इन क्षेत्रों में पर्यटन सुविधाओं का विस्तार होने से स्थानीय होटल, परिवहन, खानपान, हस्तशिल्प और छोटे कारोबारों को भी लाभ मिलने की संभावना है।

थीमैटिक सर्किट से जुड़ रहे अलग-अलग पर्यटन स्थल

प्रदेश में पर्यटन नीति-2022 के तहत विभिन्न थीमैटिक सर्किट के माध्यम से पर्यटन स्थलों को एक-दूसरे से जोड़ने की रणनीति अपनाई गई है। अयोध्या, वाराणसी और प्रयागराज को जोड़ने वाला स्पिरिचुअल ट्रायंगल इसका प्रमुख उदाहरण है। इसके अलावा बाबा नीब करौरी सर्किट जैसे प्रस्तावित मार्गों के जरिए फिरोजाबाद, फर्रुखाबाद, लखनऊ और वृंदावन जैसे स्थलों को एक व्यापक पर्यटन अनुभव से जोड़ने की कोशिश की जा रही है। विंध्य धाम, चित्रकूट, नैमिषारण्य, देवीपाटन और मां शाकुंभरी देवी जैसे क्षेत्रों में अलग-अलग स्तर पर योजनाबद्ध विकास की दिशा में काम किया जा रहा है। प्रदेश सरकार के अनुसार वर्ष 2017 से अब तक 3,000 से अधिक पर्यटन परियोजनाएं करीब 10,000 करोड़ रुपये की लागत से शुरू की गई हैं।

सड़क, रेल और हवाई कनेक्टिविटी बनी आधार

पर्यटन को बढ़ावा देने में कनेक्टिविटी की भूमिका महत्वपूर्ण है। प्रदेश में एक्सप्रेसवे के विस्तार, हवाई अड्डों की संख्या में वृद्धि और रेल संपर्क में सुधार के साथ कई पर्यटन स्थलों तक पहुंच आसान हुई है। पर्यटन विभाग की ओर से बेहतर कनेक्टिविटी को पर्यटन सुविधाओं के विस्तार के साथ जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है। एनएसओ के सर्वेक्षण से भी यात्रा के साधनों की तस्वीर सामने आती है। ग्रामीण क्षेत्रों में घरेलू रात्रि यात्राओं के लिए बस प्रमुख माध्यम रही, जबकि शहरी क्षेत्रों में ट्रेन का इस्तेमाल अधिक हुआ। सर्वेक्षण के अनुसार शहरी रात्रि यात्रियों में होटल और गेस्ट हाउस सबसे पसंदीदा ठहरने के विकल्प रहे, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में गैर-वाणिज्यिक ठहराव का हिस्सा अधिक रहा।

गांवों में होमस्टे, खानपान और हस्तशिल्प को मिल रहा स्थान

पर्यटन को ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जोड़ने की दिशा में होमस्टे, स्थानीय खानपान और पारंपरिक हस्तशिल्प को पर्यटन अनुभव का हिस्सा बनाने पर जोर दिया जा रहा है। इसका उद्देश्य यह है कि किसी धार्मिक या ऐतिहासिक स्थल पर आने वाला पर्यटक केवल मुख्य स्थान देखकर वापस न लौटे, बल्कि आसपास के गांवों, स्थानीय बाजारों, खानपान और परंपराओं से भी परिचित हो। इस मॉडल से पर्यटन की आय बड़े शहरों और प्रमुख धार्मिक स्थलों तक सीमित रहने के बजाय छोटे कस्बों और गांवों तक पहुंच सकती है। स्थानीय युवाओं, कारीगरों, वाहन चालकों, होटल संचालकों और छोटे व्यापारियों के लिए भी इससे रोजगार और आय के अवसर पैदा हो सकते हैं।

महिलाओं और अकेले यात्रा करने वालों पर भी नजर

पर्यटन की बदलती प्रवृत्तियों के बीच अब अकेले यात्रा करने वाले पर्यटकों और महिलाओं के समूहों पर भी विशेष ध्यान देने की बात कही जा रही है। पर्यटन विभाग के अधिकारियों के अनुसार भरोसेमंद ठहरने की व्यवस्था, स्पष्ट जानकारी, व्यवस्थित पर्यटन अनुभव और सुविधाजनक आवागमन को मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है। यह बदलाव इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि पर्यटन का नया ग्राहक केवल पारंपरिक परिवार या धार्मिक यात्री नहीं है। युवा, महिला समूह, अकेले यात्रा करने वाले लोग और अनुभव आधारित यात्रा पसंद करने वाले पर्यटक भी पर्यटन बाजार का हिस्सा बन रहे हैं।

युवाओं को संस्कृति से जोड़ने की पहल

युवाओं को स्थानीय इतिहास और संस्कृति से जोड़ने के लिए ‘विजिट माई स्टेट’ जैसे अभियानों पर भी जोर दिया जा रहा है। उद्देश्य युवाओं को अपने ही प्रदेश के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और प्राकृतिक स्थलों को देखने तथा उनके बारे में जानकारी साझा करने के लिए प्रेरित करना है। दीपोत्सव, देव दीपावली और ब्रज रंगोत्सव जैसे आयोजन पहले से ही धार्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन को जोड़ने का काम कर रहे हैं। अयोध्या, लखनऊ और वाराणसी में कला कार्यशालाओं तथा लखनऊ के ‘लोकधारा’ जैसे कला आयोजनों के जरिए विद्यार्थियों और युवा कलाकारों को स्थापित कलाकारों से जोड़ने की योजना भी इसी व्यापक सोच का हिस्सा है।

सारनाथ को विश्व धरोहर का दर्जा, बौद्ध पर्यटन को नया आधार

उत्तर प्रदेश के पर्यटन मानचित्र के लिए वर्ष 2026 की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि सारनाथ का यूनेस्को विश्व धरोहर सूची में शामिल होना भी है। यूनेस्को की 48वीं विश्व धरोहर समिति के सत्र में ‘Ancient Buddhist Site of Sarnath’ को जुलाई 2026 में विश्व धरोहर सूची में शामिल किया गया। इसके साथ भारत में विश्व धरोहर स्थलों की संख्या 45 हो गई। सारनाथ को भगवान बुद्ध के प्रथम उपदेश से जुड़ा महत्वपूर्ण बौद्ध तीर्थ स्थल माना जाता है। यूनेस्को के अनुसार यहां प्राचीन स्तूपों, विहारों और अन्य पुरातात्विक अवशेषों का महत्वपूर्ण समूह मौजूद है। यह मान्यता उत्तर प्रदेश के बौद्ध पर्यटन को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान देने की क्षमता रखती है।

तीर्थ से आगे बढ़ती पर्यटन अर्थव्यवस्था

उत्तर प्रदेश की पर्यटन कहानी अब केवल बड़े धार्मिक स्थलों पर आने वाली भीड़ की कहानी नहीं रह गई है। आंकड़े बताते हैं कि राज्य देश के घरेलू यात्रा मानचित्र पर एक प्रमुख गंतव्य बना हुआ है। चुनौती अब इस बढ़ती आवाजाही को लंबे प्रवास, स्थानीय रोजगार, ग्रामीण अर्थव्यवस्था और बेहतर पर्यटक अनुभव में बदलने की है। एनएसओ के सर्वेक्षण के मुताबिक देश में करीब 80 फीसदी घरेलू रात्रि यात्रियों का ठहराव पांच दिन या उससे कम रहा। ऐसे में उत्तर प्रदेश के लिए अगला अवसर यह है कि अयोध्या, वाराणसी या प्रयागराज आने वाला पर्यटक आसपास के विरासत स्थलों, गांवों, प्रकृति स्थलों, स्थानीय बाजारों और सांस्कृतिक आयोजनों तक भी पहुंचे।

यही विस्तार उत्तर प्रदेश के पर्यटन को बड़े तीर्थ केंद्रों से आगे ले जाकर एक ऐसे व्यापक पर्यटन मॉडल की दिशा में ले जा सकता है, जिसमें धर्म के साथ विरासत, संस्कृति, प्रकृति, खानपान, हस्तशिल्प और ग्रामीण जीवन भी पर्यटक अनुभव का हिस्सा बनें। बेहतर कनेक्टिविटी के साथ यदि इन अनुभवों को सुविधाजनक और भरोसेमंद तरीके से जोड़ा जाता है, तो पर्यटन का लाभ प्रदेश के बड़े शहरों से निकलकर छोटे जिलों और गांवों तक पहुंचने की संभावनाएं और मजबूत होंगी।