
राष्ट्रीय लोक दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष जयंत चौधरी फोटो आईएएनएस
Jayant Chaudhary RLD West UP Campaign: उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर राष्ट्रीय लोक दल (आरएलडी) ने अपनी रणनीति तेज कर दी है। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री जयंत चौधरी के नेतृत्व में आरएलडी पश्चिमी उत्तर प्रदेश के गांव-गांव में गहन जनसंपर्क अभियान चलाने की तैयारी में है। सूत्रों के अनुसार, पार्टी का एक विशेष कारवां जल्द ही सात दिनों तक गांव-गांव घूमेगा। इसका मकसद पारंपरिक जाट वोट बैंक को मजबूत करने के साथ-साथ नए सामाजिक समीकरण साधना है।
आरएलडी ने चुनावी प्रबंधन के लिए ‘टीम आरएलडी’ का गठन किया है। यह टीम संगठन के समानांतर काम करेगी। सभी 75 जिलों में कोऑर्डिनेटर नियुक्त किए गए हैं, जबकि हर गांव और वार्ड में सक्रिय कार्यकर्ता लगाए जा रहे हैं। ये कार्यकर्ता स्थानीय मुद्दों, राजनीतिक गतिविधियों और जनभावनाओं की जानकारी सीधे पार्टी अध्यक्ष तक पहुंचाएंगे। पश्चिमी यूपी के हस्तिनापुर, ब्रज और रुहेलखंड क्षेत्रों पर विशेष फोकस है, जहां करीब 75 विधानसभा सीटें आती हैं। मोरदाबाद, अमरोहा, अलीगढ़, बिजनौर, मथुरा, हाथरस और आगरा जैसे जिलों में संगठनात्मक विस्तार तेज किया जा रहा है।
जयंत चौधरी ने कार्यकर्ताओं से अपील की है कि वे सिर्फ अपने समर्थकों तक सीमित न रहें, बल्कि गांव-गांव जाकर सभी वर्गों से संवाद करें। हाल ही में मुजफ्फरनगर में आयोजित सामाजिक समरसता सम्मेलन में उन्होंने भेदभाव खत्म करने, समानता और भाईचारे का संदेश दिया।
पारंपरिक रूप से जाट केंद्रित मानी जाने वाली आरएलडी अब अपनी छवि बदलने की कोशिश कर रही है। पार्टी संसदीय बोर्ड अध्यक्ष केसी त्यागी ने जयंत चौधरी को पश्चिमी यूपी की 29 अति पिछड़ी जातियों (एमबीसी) की सूची सौंपी है। इनमें गोसाईं, कंबोज, गड़ेरिया, दर्जी, अंसारी, बढ़ई, धीमान-लोहार, भुर्जी, कंदू, माली-सैनी, धोबी, हलवाई, जोगी, कहार, कोइरी, कुम्हार, मोची, तेली, नाई समेत कई समुदाय शामिल हैं। ये जातियां हस्तिनापुर, रुहेलखंड और ब्रज क्षेत्रों में फैली हैं और करीब 100 सीटों पर प्रभाव रखती हैं।
आरएलडी इन समुदायों को संगठन में प्रतिनिधित्व देकर अपना वोट बेस व्यापक बनाना चाहती है। बिहार मॉडल से प्रेरित इस सोशल इंजीनियरिंग का उद्देश्य जाट वोट के साथ-साथ अन्य पिछड़े वर्गों को जोड़ना है। पार्टी किसान मुद्दों, युवा रोजगार, कौशल विकास और बुनियादी ढांचे पर जोर दे रही है।
पश्चिमी यूपी में आरएलडी और समाजवादी पार्टी के बीच जातीय समीकरणों को लेकर तनातनी बनी हुई है। सपा जाट-मुस्लिम समीकरण की जगह गुर्जर-पाल-बघेल को साधने की कोशिश कर रही है, जबकि आरएलडी अपने जाट आधार को मजबूत रखते हुए नए वर्गों तक पहुंच बना रही है। जयंत चौधरी ने सपा पर आरोप लगाया है कि वह समाज को बांटने वाली राजनीति कर रही है।
एनडीए सहयोगी के रूप में आरएलडी भाजपा के साथ गठबंधन में है। पार्टी सीटों की संख्या पर खुलकर बात नहीं कर रही, बल्कि पूरक भूमिका निभाने पर जोर दे रही है। साथ ही अवध और पूर्वांचल में भी विस्तार की योजना है।
आरएलडी का यह गांव-गांव अभियान किसानों, युवाओं, अति पिछड़ी जातियों और अन्य समुदायों तक पहुंच बनाने का प्रयास है। सामाजिक समरसता, विकास और चौधरी चरण सिंह की विरासत को केंद्र में रखकर पार्टी 2027 में अपनी ताकत बढ़ाने की रणनीति पर काम कर रही है। पश्चिमी यूपी की सियासत में यह नया अध्याय चुनावी समीकरणों को प्रभावित कर सकता है।
Updated on:
24 Sept 2026 05:54 pm
Published on:
24 Sept 2026 05:54 pm
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