लखनऊ

एक हाथ में चिता की आग, दूसरे में दुल्हन का हाथ, सेहरा सजाने से पहले बेटे ने दी पिता को मुखाग्नि

Lucknow News: लखनऊ में शादी वाले दिन पिता की मौत। बेटे ने पहले पिता का अंतिम संस्कार किया, फिर पिता की आखिरी इच्छा पूरी करने सादगी से बारात लेकर गया।

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May 07, 2026
निगोहां गांव में पिता की अर्थी के बाद उठी बेटे की बारात | फोटो सोर्स- gemini

Lucknow News: नियति का खेल भी बड़ा अजीब होता है। कभी-कभी खुशियां दरवाजे पर दस्तक दे रही होती हैं और अचानक गम का पहाड़ टूट पड़ता है। कुछ ऐसा ही मामला देखने को मिला राजधानी लखनऊ के मोहनलालगंज क्षेत्र में, जहां एक बेटे को अपनी बारात ले जाने से ठीक पहले अपने पिता की अर्थी को कंधा देना पड़ा। पिता की मौत के कुछ घंटों बाद ही भारी मन से दूल्हा बने बेटे ने न केवल अपना पुत्र धर्म निभाया, बल्कि पिता के आखिरी सपने को पूरा करने के लिए सादगी से शादी की रस्में भी अदा की।

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बारात वाले दिन ही टूट गया दुखों का पहाड़

मामला लखनऊ के निगोहां गांव का है। यहां के रहने वाले किसान भाई लाल के बेटे रिंकू कश्यप की मंगलवार को शादी थी। घर में मेहमान आए हुए थे, पकवान बन रहे थे और सब बारात जाने की तैयारी कर रहे थे। लेकिन तभी अचानक भाई लाल की तबीयत बिगड़ी और मंगलवार सुबह उनकी मौत हो गई। घर की खुशियां एक पल में मातम में बदल गई।

सेहरा सजाने से पहले दी मुखाग्नि

जिस वक्त घर में ढोल-नगाड़े बजने चाहिए थे, वहां चीख-पुकार मच गई। एक तरफ पिता का साया उठ चुका था, तो दूसरी तरफ वधू पक्ष और पिता की वो इच्छा थी कि उनका बेटा घोड़ी चढ़े। मंगलवार शाम को रिंकू ने नम आंखों से श्मशान घाट पर अपने पिता का अंतिम संस्कार किया और उन्हें मुखाग्नि दी।

बिना बैंड-बाजे के सादगी वाली शादी

अंतिम संस्कार के बाद परिवार और बुजुर्गों की सहमति से यह तय हुआ कि शादी टाली नहीं जाएगी, क्योंकि यह दिवंगत पिता का सपना था। रात करीब 8 बजे रिंकू बिना किसी शोर-शराबे, बैंड-बाजे या डीजे के, केवल कुछ करीबियों के साथ रायबरेली के बंका गढ़ पहुंचा। रायबरेली में भी जब लड़की पक्ष को इस दुखद घटना का पता चला, तो वहां भी सन्नाटा पसर गया। दोनों परिवारों ने बहुत ही शांति के साथ शादी की रस्में पूरी की।

दुल्हन आई पर ससुर का साया नहीं था

अगले दिन बुधवार की सुबह रिंकू अपनी पत्नी को लेकर घर पहुंचा। दुल्हन का गृह प्रवेश तो हुआ, लेकिन पूरे घर में सन्नाटा था। पिता की कमी हर किसी को खल रही थी। गांव के लोग रिंकू की हिम्मत की तारीफ कर रहे हैं कि उसने दुख की घड़ी में भी अपने पिता की आखिरी इच्छा को पूरा किया।

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