Property dealer suicide Lucknow : लखनऊ में आईपीएल मैच में लाखों रुपये हारने के बाद 35 साल के प्रॉपर्टी डीलर प्रबल जैन ने 11वीं मंजिल से कूदकर जान दी। सुसाइड नोट में सट्टे में हार का जिक्र।
लखनऊ के पॉश इलाके में स्थित जनेश्वर अपार्टमेंट की 11वीं मंजिल, गुरुवार की शाम और आईपीएल का रोमांच—सब कुछ सामान्य लग रहा था, लेकिन किसी को अंदाजा नहीं था कि स्क्रीन पर दौड़ते रनों के पीछे एक जिंदगी दम तोड़ रही है। 35 वर्षीय प्रॉपर्टी डीलर प्रबल जैन ने क्रिकेट के जुनून को जब जुए की लत में बदला, तो उसका अंत एक खौफनाक सुसाइड के रूप में हुआ।
क्रिकेट के बाजार में 'सेशन बेटिंग' को सबसे खतरनाक माना जाता है, जहां हर गेंद और हर ओवर पर दांव लगता है। रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (RCB) और गुजरात जायंट्स के बीच चल रहे मुकाबले में प्रबल इसी जाल में फंस गया। जैसे-जैसे मैच आगे बढ़ा, प्रबल की जमापूंजी हाथ से फिसलती गई। लाखों रुपये हारने के बाद जब उसे अपनी बर्बादी का अहसास हुआ, तो उसने मौत का रास्ता चुन लिया।
हादसे से चंद मिनट पहले प्रबल ने सीतापुर में मौजूद अपनी पत्नी शिवानी को फोन किया। फोन पर प्रबल के शब्द नहीं, बल्कि उसकी सिसकियाँ बोल रही थीं। उसने बस इतना कहा, "शिवानी, मैं बहुत कुछ हार गया हूँ।" पत्नी उसे ढांढस बंधाती रही, उसे संभालने की कोशिश करती रही, लेकिन हार का बोझ इतना भारी था कि प्रबल ने फोन काट दिया और बालकनी से छलांग लगा दी।
प्रबल और शिवानी की कहानी किसी फिल्म जैसी थी। झारखंड की शिवानी और सीतापुर के प्रबल की मुलाकात इंटीग्रल यूनिवर्सिटी में पढ़ाई के दौरान हुई थी। प्यार परवान चढ़ा और सिर्फ 8 महीने पहले ही दोनों ने प्रेम विवाह किया था। पिछले साल दिवाली पर ही वे इस अपार्टमेंट में शिफ्ट हुए थे। जिस घर को दीयों से रोशन किया था, वहां साल भर के भीतर ही सट्टे के अंधेरे ने सब कुछ खत्म कर दिया।
जांच में यह भी सामने आया कि प्रबल का अतीत मानसिक संघर्षों से भरा था। उसके पिता ने भी कुछ समय पहले आत्महत्या की थी और मां का भी निधन हो चुका था। परिवार के नाम पर उसके पास शिवानी ही थी, लेकिन सट्टे की लत ने उसे अपनों से भी दूर कर दिया।
एसीपी गाजीपुर अनिंद्य विक्रम सिंह के अनुसार, पुलिस को मौके से एक सुसाइड नोट मिला है। इसमें प्रबल ने अपनी हार स्वीकार की है और अपने परिवार व पत्नी से माफी मांगी है। पुलिस अब प्रबल के बैंक स्टेटमेंट और सट्टे के नेटवर्क की जांच कर रही है ताकि उन लोगों तक पहुंचा जा सके जो युवाओं को इस दलदल में धकेलते हैं।