लखनऊ

Maha Shivratri 2018 : महाशिवरात्रि 13 को, यह है व्रत,पूजा की पूरी प्रक्रिया

Maha Shivratri 2018 : महाशिवरात्रि का पर्व 13 या 14 फरवरी 2018, को मनाया जाएगा। पूजा का समय 24:09 से 25:01 तक है मुहूर्त की अवधि 51 मिनट की है।

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Feb 12, 2018

Neeraj Patel

Maha Shivratri 2018 :महाशिवरात्रि हिन्दुओं का एक प्रमुख त्योहार है। यह भगवान शिव का प्रमुख पर्व है। महाशिवरात्रि का पर्व 13 या 14 फरवरी 2018, को मनाया जाएगा। पूजा का समय 24:09 से 25:01 तक रहेगा मुहूर्त की अवधि कुल 51 मिनट की है। साल में होने वाली 12 शिवरात्रियों में से इस महाशिवरात्रि को सबसे महत्वपूर्ण माना गया है।

मनोकामनाएं पूरी करने के लिए रखें यह व्रत

महाशिवरात्रि के दिन सभी लोग सुबह जल्दी उठें और स्नान कर भगवान शिव को भी दूध से स्नान कराएं। भोलेनाथ की पूजा करें, भोग लगाएं, और पूरे दिन भगवान शिव के भजन, कीर्तन भी गाएं और शिवशम्भू को प्रसन्न करने के लिए पूरे दिन व्रत भी रखें। जिससे भगवान शिव उनके सारे कष्टों को हर लेगें। महाशिवरात्रि के दिन भगवान शिव की पूरी कहानी सुनें। भगवान शिव का व्रत रखने से सारी मनोकामनाएं पूरी हो जाती है। जो भी अपनी सारी मनोकामनाएं पूरी करना चाहता है तो वो अपनी सारी मनोकामनाएं पूरी करने के लिए भगवान शिव का व्रत रखें और उनकी पूरी कहानी सुनें।

भूलकर भी न करें यह गलतियां

महाशिवरात्रि के दिन अगर आप व्रत रख रहे हैं तो अाप नमक, तेल, मसाले से बनी चीजों को नहीं खा सकते हैं अगर आपको व्रत के समय भूख लगती है। तो आप कुछ मीठा खा सकते हैं। और फलाहार भी कर सकते है। अगर आपने धोखे से भी नमक, तेल, मसाले से बनी चीजों को खा लीं। तो भगावन शिव आपसे नाराज हों जाएंगे जिससे आपके जीवन में कष्ट भी आ सकते हैं। इसलिए आप व्रत के समय पूरी तरह से सावधानी रखें जिससे आपके जीवन में किसी प्रकार का कोई कष्ट न आए।

मनोकामनाएं पूरी करने के लिए भगवान शिव की सुनें पूरी कहानी

एक बार नारद मुनि शिवलोक गए। वहां जाकर उन्होंने वैष्णवों में श्रेष्ठ शिव जी का यह कह कर गुणगान करना शुरु कर दिया कि आप तो भगवान श्रीकृष्ण के सबसे प्रिय हैं। आपका उनसे कोई भेद नहीं है। आप और वे एक ही हैं। आप जीवों का हर तरह से कल्याण कर सकते हैं, यहां तक कि कृष्ण-प्रेम भी दे सकते हैं। अपनी महिमा सुन कर शिव जी ने बड़ी विनम्रता से नारद जी से कहा कि मैं तो श्रीकृष्ण का तुच्छ सा सेवक हूं, ये तो उनकी अहैतुकी कृपा है कि वे अपनी सेवाएं मुझे प्रदान करते हैं।

श्रीमद् भागवत में एक और प्रसंग है कि एक बार देवताओं और दैत्यों ने मिल कर भगवान के निर्देशानुसार समुद्र मंथन की योजना बनाई ताकि अमृत प्राप्त किया जा सके। परंतु उस समुद्र मंथन के समय सबसे पहले हलाहल विष निकला था। वह विष इतना विषैला था कि उससे समस्त जगत भीषण ताप से पीड़ित हो गया था। देव-दैत्य बिना पिए उसको सूंघते ही बेसुध से हो गए।

तब भगवान ने अपनी शक्ति से उनको ठीक किया। देवों ने जब इस विष से बचने का उपाय पूछा तो भगवान ने कहा कि शिवजी से अगर आप सब लोग प्रार्थना करें तो वे इसका हल निकाल लेंगे। श्रीशिव जी महाराज ने देवताओं की प्रार्थना पर भगवान की प्रसन्नता के लिए उस हलाहल विष को पीने का निर्णय लिया। अपने हाथों में उस विष को पी गए। किंतु उसको निगला नहीं। आपने विचार किया कि मेरे हृदय में रहने वाले भगवान को यह रुचेगा नहीं। इसलिए आपने वह विष अपने गले में ही रोक लिया। जिसके प्रभाव से आपका गला नीला हो गया और आप नीलकंठ कहलाए। आपकी ऐसी अद्भुत व अलौकिक चेष्टा की याद में ही श्री शिवरात्री मनाई जाती है। इस कथा के अनुसार इसीलिए महाशिवरात्रि का पर्व मनाया जाता है।

अविवाहित लड़कियां रखें व्रत

विवाह योग्य लड़कियां उत्तम वर पाने के लिए महाशिवरात्रि का उपवास रख सकती हैं। संभव हो सके तो मौन व्रत रखकर ही शिव की आराधना करें। पंचोपचार अथवा षोडषोपचार पूजन करें। पूजन के बाद भगवान शिव से याचक भाव से उत्तम वर की प्राप्ति तथा सफल वैवाहिक जीवन के लिए प्रार्थना करें।

1. पाठात्मक: घी का दीपक भगवान शिव के सामने रखकर यथा श्रद्धा शिवाष्टक, रूद्राष्टक, शिवमहिम्न स्तोत्र, महामृत्युंज स्तोत्र, शिव सहस्त्रनामावली आदि स्तोत्र का पाठ करने से भी शिव कृपा होती है।

2. अभिषेकात्मक: भगवान शिव का स्वरूप पूजन करने से भी शिव कृपा होती है। जिसमें पंचांमृताभिषेक, रसाभिषेक, धान्याभिषेक, आदि से भगवान शिव को प्रसन्न किया जा सकता है।

3. हवानात्मक: भगवान शिव की कृपा पाने के लिए रूद्र के पूजन का हवानात्मक अनुष्ठान का उल्लेख शास्त्र में वर्णित है। यह करने से भी शिव कृपा होती है।

Updated on:
13 Feb 2018 10:34 am
Published on:
12 Feb 2018 10:53 am
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