लखनऊ

राजस्थान में BSP का दमदार प्रदर्शन, 19 पार्षद जीते; मायावती बोलीं- नतीजा और बेहतर होता

Mayawati Rajasthan Civic Polls: राजस्थान निकाय चुनाव में बसपा के 19 पार्षदों की जीत पर मायावती ने कार्यकर्ताओं को बधाई दी। उन्होंने पुनर्मतगणना में गड़बड़ी के आरोप भी लगाए।
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Sep 15, 2026
बसपा सुप्रीमो ने सोशल पर जारी किया बयान, जीत पर दी बधाई। (फोटो सोर्स : Ritesh Singh )
बसपा सुप्रीमो ने सोशल पर जारी किया बयान, जीत पर दी बधाई। (फोटो सोर्स : Ritesh Singh )

Mayawati Rajasthan Civic Polls Social: राजस्थान में हुए निकाय चुनाव के नतीजों को लेकर बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने पार्टी के प्रदर्शन पर प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि निकाय चुनाव में बसपा ने इस बार 19 सीटों पर अपने पार्षद जिताकर भेजे हैं। मायावती ने पार्टी के छोटे-बड़े पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं को इस प्रदर्शन के लिए हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दी हैं। उन्होंने यह भी दावा किया कि कई बसपा उम्मीदवार सरकारी मशीनरी की कथित गड़बड़ी के कारण दोबारा मतगणना के दौरान कम अंतर से हरा दिए गए, वरना पार्टी का परिणाम और बेहतर हो सकता था।

19 पार्षदों की जीत को बसपा ने माना अहम उपलब्धि

मायावती ने सोशल मीडिया मंच X पर जारी अपने बयान में राजस्थान के निकाय चुनाव में बसपा के प्रदर्शन का उल्लेख करते हुए कहा कि पार्टी ने 19 सीटों पर अपने पार्षद जिताए हैं। उनके मुताबिक, यह परिणाम पार्टी के कार्यकर्ताओं की मेहनत और जमीनी स्तर पर संगठन की सक्रियता को दर्शाता है। बसपा नेतृत्व की ओर से चुनाव परिणाम को संगठन के लिए उत्साह बढ़ाने वाला बताया गया है।

बसपा प्रमुख मायावती ने राजस्थान निकाय चुनाव में पार्टी के प्रदर्शन पर कार्यकर्ताओं को दी बधाई। (फोटो सोर्स : Ritesh Singh )     

राजस्थान में स्थानीय निकाय चुनावों को राजनीतिक दलों के लिए जमीनी स्तर पर अपनी पकड़ परखने का महत्वपूर्ण अवसर माना जाता है। पार्षदों के चुनाव में स्थानीय मुद्दे, वार्ड स्तर की राजनीतिक सक्रियता और प्रत्याशियों की व्यक्तिगत पकड़ भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। ऐसे में बसपा के 19 पार्षदों के जीतने को पार्टी अपने संगठनात्मक आधार के लिहाज से महत्वपूर्ण मान रही है।

पुनर्मतगणना को लेकर मायावती ने उठाए सवाल

मायावती ने अपने बयान में चुनाव प्रक्रिया के दौरान कुछ सीटों पर कथित अनियमितताओं का भी आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि काफी उम्मीदवार सरकारी मशीनरी की गड़बड़ी की वजह से दोबारा गिनती में थोड़े-थोड़े वोटों के अंतर से हरा दिए गए। उन्होंने दावा किया कि यदि ऐसा नहीं होता तो राजस्थान में बसपा का परिणाम और बेहतर हो सकता था। हालांकि, मायावती के इन आरोपों को उनके राजनीतिक बयान के रूप में देखा जाना चाहिए। संबंधित सीटों पर पुनर्मतगणना अथवा चुनाव प्रक्रिया को लेकर आधिकारिक स्तर पर क्या निर्णय हुआ, यह अलग-अलग निर्वाचन रिकॉर्ड और संबंधित अधिकारियों की जानकारी से स्पष्ट होगा। बसपा अध्यक्ष ने अपने बयान में इन कथित घटनाओं को पार्टी के प्रदर्शन पर असर डालने वाला कारण बताया है।

कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों को दी बधाई

बसपा प्रमुख ने राजस्थान में पार्टी के प्रदर्शन के लिए सभी छोटे-बड़े पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं को बधाई दी। उन्होंने कहा कि पार्टी कार्यकर्ताओं ने चुनाव में मेहनत की और अपने संगठन को मजबूत करने का प्रयास किया। मायावती का संदेश ऐसे समय आया है जब स्थानीय चुनावों के परिणामों के जरिए राजनीतिक दल आगामी चुनावों के लिए अपने संगठन और जनाधार का आकलन कर रहे हैं।

बसपा की राजनीति में बूथ और वार्ड स्तर के संगठन को खास महत्व दिया जाता है। स्थानीय निकाय चुनावों में पार्टी के प्रत्याशियों की जीत कार्यकर्ताओं को आगामी चुनावों के लिए सक्रिय करने का आधार भी बन सकती है। राजस्थान में मिली सीटों को लेकर पार्टी अब अपने संगठनात्मक विस्तार और जनसंपर्क को आगे बढ़ाने पर जोर दे सकती है।

पंजाब समेत अन्य राज्यों के स्थानीय चुनावों का भी किया जिक्र

मायावती ने अपने बयान में केवल राजस्थान के निकाय चुनाव का जिक्र नहीं किया, बल्कि पंजाब सहित देश के कुछ अन्य राज्यों में हाल में हुए स्थानीय निकाय चुनावों में पार्टी के प्रदर्शन की भी बात कही। उन्होंने कहा कि इन चुनावों में भी बसपा का पहले की तुलना में बेहतर परिणाम आया है। उन्होंने संबंधित राज्यों के पार्टी पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं को भी बधाई का पात्र बताया।

बसपा अध्यक्ष के इस बयान से स्पष्ट है कि पार्टी स्थानीय स्तर पर मिले चुनावी परिणामों को संगठन के विस्तार के संकेत के तौर पर देख रही है। अलग-अलग राज्यों में स्थानीय निकाय चुनावों के दौरान मिली सफलता पार्टी के लिए आगामी बड़े चुनावों में कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ाने का काम कर सकती है।

आगे विधानसभा और लोकसभा चुनाव पर नजर

मायावती ने अपने संदेश में भविष्य की चुनावी रणनीति की ओर भी संकेत किया। उन्होंने उम्मीद जताई कि राजस्थान सहित अन्य राज्यों में पार्टी के कार्यकर्ता आगे होने वाले विधानसभा आम चुनावों और देश में होने वाले लोकसभा आम चुनाव में बेहतर परिणाम लेकर आएंगे।

स्थानीय निकाय चुनाव किसी भी राजनीतिक दल के लिए सीधे तौर पर विधानसभा या लोकसभा चुनाव के परिणामों की गारंटी नहीं होते, लेकिन इन चुनावों से संगठन की सक्रियता, स्थानीय जनाधार और कार्यकर्ताओं की चुनावी तैयारियों का अंदाजा जरूर लगाया जाता है। बसपा के लिए राजस्थान जैसे राज्य में स्थानीय स्तर पर अपनी मौजूदगी बनाए रखना आगामी राजनीतिक गतिविधियों के लिहाज से महत्वपूर्ण हो सकता है।

संगठन को मजबूत करने की चुनौती

राजस्थान में 19 पार्षदों की जीत के बाद बसपा के सामने अब इस राजनीतिक आधार को व्यापक जनसमर्थन में बदलने की चुनौती होगी। स्थानीय निकायों में निर्वाचित प्रतिनिधियों की भूमिका अपने-अपने क्षेत्रों में पार्टी की सक्रियता बढ़ाने में महत्वपूर्ण हो सकती है। यदि पार्टी इन प्रतिनिधियों के जरिए स्थानीय समस्याओं और जनता के मुद्दों को प्रभावी ढंग से उठाती है, तो इससे संगठन को आगे मजबूती मिल सकती है।

वरिष्ठ राजनीतिक विश्लेषक राघवेंद्र उपाध्याय का कहना है कि मायावती के बयान से यह भी संकेत मिलता है कि पार्टी स्थानीय चुनावों के परिणामों को आगामी राजनीतिक मुकाबलों की तैयारी के संदर्भ में देख रही है। राजस्थान और अन्य राज्यों में कार्यकर्ताओं को सक्रिय रखने, संगठनात्मक ढांचे को मजबूत करने और मतदाताओं के बीच जनसंपर्क बढ़ाने पर आने वाले समय में जोर रहने की संभावना है।

बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद, कार्यकर्ताओं में उत्साह

बसपा प्रमुख ने राजस्थान और अन्य राज्यों में हुए स्थानीय निकाय चुनावों के परिणामों को कार्यकर्ताओं के लिए उत्साहवर्धक बताते हुए भविष्य में बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद जताई है। 19 पार्षदों की जीत को पार्टी ने अपनी राजनीतिक मौजूदगी के रूप में रेखांकित किया है। साथ ही पुनर्मतगणना से जुड़े आरोपों के जरिए मायावती ने यह संदेश भी दिया है कि पार्टी अपने उम्मीदवारों के प्रदर्शन और चुनावी प्रक्रिया पर नजर रख रही है।

राघवेंद्र उपाध्याय ने कहा कि अब निगाह इस बात पर होगी कि स्थानीय निकाय चुनाव में मिली सफलता को बसपा किस तरह आगे विधानसभा और लोकसभा चुनाव की तैयारियों में इस्तेमाल करती है। पार्टी के लिए सबसे बड़ी प्राथमिकता स्थानीय स्तर पर मिले समर्थन को संगठनात्मक मजबूती में बदलना और कार्यकर्ताओं को लगातार सक्रिय बनाए रखना होगी। मायावती का ताजा संदेश इसी दिशा में कार्यकर्ताओं का उत्साह बढ़ाने और आगामी चुनावों के लिए बेहतर प्रदर्शन का लक्ष्य तय करने वाला माना जा रहा है।

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