
Uttar Pradesh News: नेपाल में आई भयानक बाढ़ से बचकर गोरखपुर लौटे आशुतोष उपाध्याय ने आपदा के दौरान का खौफनाक मंजर सुनाया। उन्होंने बताया कि 26 अगस्त की सुबह अचानक पानी आने से अफरा-तफरी मच गई। जान बचाने के लिए वह पहाड़ पर चढ़ गए, लेकिन उनकी आंखों के सामने करीब 30 से 40 लोग पानी में बह गए। बाढ़ में उनके जरूरी दस्तावेज भी बह गए। तीन दिन तक मुश्किल हालात में रहने के बाद 28 अगस्त को हेलीकॉप्टर से उनका रेस्क्यू किया गया और वह भारत लौट सके।
आशुतोष ने बताया कि 26 अगस्त की सुबह करीब 9.30 बजे अचानक शोर सुनाई देने लगा। लोग चीखते हुए एक-दूसरे से भागने के लिए कह रहे थे। हालात बिगड़ते देख वह कंपनी से निकलकर सुरक्षित जगह की ओर भागे और किसी तरह पहाड़ पर चढ़ गए। उस समय उन्हें खुद भी भरोसा नहीं था कि वह जिंदा बच पाएंगे। जिस जगह पर कुछ देर पहले लोग सामान्य तरीके से काम कर रहे थे, वहां अचानक बाढ़ का पानी पहुंच गया। देखते ही देखते हालात बदल गए और लोगों की हंसी चीख-पुकार में बदल गई।
आशुतोष ने बताया कि कंपनी में उनके साथ रहने वाले करीब 30 से 40 लोग उनकी आंखों के सामने पानी में बह गए। वह चाहकर भी उन्हें बचा नहीं सके। चारों तरफ पानी, घायल लोग और तबाही का मंजर था। बाढ़ में आशुतोष के जरूरी दस्तावेज भी बह गए। हालात इतने खराब थे कि उन्हें लगा अब शायद परिवार से दोबारा मुलाकात नहीं हो पाएगी। हालांकि बाद में नेपाल प्रशासन ने हेलीकॉप्टर से लोगों को निकालना शुरू किया। राहत के साथ खाना और पानी पहुंचने लगा तो आशुतोष और वहां फंसे अन्य लोगों को कुछ उम्मीद जगी।
आशुतोष ने बताया कि खाना-पानी पहुंचने के करीब 24 घंटे बाद 28 अगस्त को उन्हें हेलीकॉप्टर के जरिए रेस्क्यू किया गया। इसके बाद उन्हें आर्मी कैंप लाया गया। काठमांडू में उनका मेडिकल हुआ और वह दो दिन वहीं रहे। इसी दौरान भारत की एमबीसी के दो से तीन लोग वहां पहुंचे। बातचीत में सामने आया कि कई लोगों के दस्तावेज बाढ़ में बह चुके थे। ऐसे में उनके लिए भारत लौटना और बॉर्डर पार करना मुश्किल लग रहा था। लेकिन एमबीसी टीम ने उन्हें भरोसा दिया कि घबराने की जरूरत नहीं है और दस्तावेज दोबारा सत्यापित कर निकाले जाएंगे।
आशुतोष की मां मंजू देवी ने बताया कि तबाही की खबर मिलने के बाद परिवार ने कई लोगों से संपर्क किया। हर व्यक्ति अलग-अलग जानकारी दे रहा था। कोई कह रहा था कि बेटा सुरक्षित है तो कोई कह रहा था कि अभी उसकी जानकारी नहीं मिली है। ऐसे में परिवार की चिंता लगातार बढ़ती जा रही थी। उन्होंने कहा कि बेटे के वापस आने के बाद सारी परेशानी और डर पीछे छूट गया। आशुतोष के माता-पिता ने कहा कि उन्हें उम्मीद नहीं थी कि बेटा वापस लौट पाएगा। अब वह घर आ गया है तो उनके लिए यही सबसे बड़ी खुशी है।