
Priyanka Gandhi Controversy: कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा की ओर से IIT मद्रास के निदेशक प्रो. वी. कामाकोटी पर की गई टिप्पणी को लेकर कई कुलपतियों ने आपत्ति जताई है। महाराजा सुहेलदेव यूनिवर्सिटी के पूर्व कुलपति डॉ. प्रदीप शर्मा ने कहा कि इस तरह की टिप्पणी ठीक नहीं है। उनका कहना है कि संसद और सार्वजनिक जीवन में वैज्ञानिकों और शिक्षाविदों का सम्मान होना चाहिए। उन्होंने कहा कि ऐसी टिप्पणियों का असर समाज, युवाओं, शिक्षा व्यवस्था और शोध कार्य पर भी पड़ता है।
बुंदेलखंड युनिवर्सिटी के कुलपति डॉ. मुकेश पांडेय ने कहा कि डॉ. वी. कामाकोटी देश के बड़े संस्थानों में से एक आईआईटी मद्रास के सम्मानित निदेशक हैं। उनके खिलाफ की गई इस तरह की टिप्पणी सही नहीं है। उन्होंने कहा कि संसद और सार्वजनिक जीवन में बोली जाने वाली भाषा का समाज और युवाओं पर असर पड़ता है। वैज्ञानिकों और शिक्षाविदों का सम्मान होना चाहिए। उन्होंने कहा कि अच्छी और सम्मानजनक भाषा से विज्ञान और शिक्षा के प्रति लोगों का भरोसा बढ़ता है।
उन्होंने आगे कहा कि जब शोध करने वाले लोगों, संस्थानों के प्रमुखों या शिक्षा से जुड़े लोगों के बारे में ऐसी बातें कही जाती हैं तो इससे शिक्षा जगत के लोगों को दुख होता है।
डॉ. मुकेश पांडेय ने कहा कि जब शोध करने वाले लोगों, संस्थानों के प्रमुखों या शिक्षा से जुड़े लोगों के खिलाफ ऐसी बातें कही जाती हैं तो इससे शिक्षा जगत में निराशा और चिंता का माहौल बनता है। उन्होंने कहा कि ऐसी टिप्पणियों का असर शोध कार्य और शिक्षा व्यवस्था पर भी पड़ता है। इससे शिक्षा और शोध के माहौल पर भी गलत प्रभाव पड़ सकता है।
आईआईटी मद्रास के निदेशक प्रो. वी. कामाकोटी को लेकर कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी वाड्रा की गई टिप्पणी पर विवाद खड़ा हो गया है। आरोप है कि प्रियंका गांधी ने एक बयान में प्रो. कामाकोटी को गोमूत्र विशेषज्ञ कहा था, जिस पर देशभर के कई कुलपतियों और शिक्षा जगत से जुड़े लोगों ने इस टिप्पणी पर आपत्ति जताई है। 215 लोगों ने प्रियंका गांधी को खुला पत्र लिखकर कहा कि वैज्ञानिकों और शिक्षाविदों के लिए सम्मानजनक भाषा का इस्तेमाल किया जाना चाहिए। उन्होंने प्रो. कामाकोटी की उपलब्धियों का जिक्र करते हुए कहा कि वे देश के प्रमुख तकनीकी विशेषज्ञों में शामिल हैं।
देश के 215 कुलपतियों शिक्षा जगत से जुड़े लोगों ने प्रियंका गांधी वाड्रा को लिखे खुले पत्र में कहा कि प्रो. वी. कामाकोटी समेत हर शिक्षाविद को अपने विचार रखने, शोध और वैज्ञानिक विषयों पर चर्चा करने का अधिकार है। उन्होंने कहा कि किसी विद्वान को किसी नाम या टिप्पणी से खारिज करने के बजाय उसके विचारों और तर्कों पर चर्चा होनी चाहिए।
पत्र में लिखा कि ऐसी टिप्पणियों से वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं और शिक्षकों के बीच गलत संदेश जाता है। उन्होंने अपील की कि असहमति जरूर हो सकती है, लेकिन किसी व्यक्ति का अपमान नहीं किया जाना चाहिए। लोकतंत्र में बहस जरूरी है, लेकिन वह सम्मान और तर्क के साथ होनी चाहिए।