
Ram Mandir donation Theft Controversy: उत्तर प्रदेश में राम मंदिर मामले को लेकर सियासी पारा एक बार फिर चढ़ गया है। समाजवादी पार्टी (सपा) के वरिष्ठ नेता और विधायक रविदास मेहरोत्रा ने राम मंदिर में कथित चोरी के मामले को लेकर प्रदेश की भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार और मुख्यमंत्री पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने मुख्यमंत्री से तुरंत इस्तीफे की मांग करते हुए पूरे मामले की उच्च स्तरीय न्यायिक जांच कराने की पैरवी की है।
विधायक रविदास मेहरोत्रा ने सरकार को घेरते हुए कहा कि राम मंदिर में जो चोरी हुई है, उस पर मुख्यमंत्री सुप्रीम कोर्ट या हाई कोर्ट के किसी मौजूदा न्यायाधीश से जांच क्यों नहीं करा रहे हैं? इस संवेदनशील और पवित्र स्थान पर हुई चोरी के बाद प्रदेश के मुख्यमंत्री को अपने पद पर बने रहने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है। उन्हें एक दिन भी सत्ता में नहीं रहना चाहिए।
सपा विधायक ने दावा किया कि इस घटना के बाद से प्रदेश की जनता में राज्य सरकार के खिलाफ जबरदस्त जन आक्रोश व्याप्त है। उन्होंने कहा कि लोग मुख्यमंत्री से इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। मंदिर जैसी सुरक्षित और आस्था से जुड़ी जगह पर ऐसी घटना होना कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है, जिससे आम जनता बेहद आहत है।
रविदास मेहरोत्रा ने मुख्यमंत्री पर जनता को गुमराह करने का आरोप भी लगाया। उन्होंने कहा कि जब चोरी की पोल पूरी तरह से खुल चुकी है, तो अपनी नाकामियों को छिपाने के लिए मुख्यमंत्री लगातार झूठे बयान दे रहे हैं। सरकार असल मुद्दों से जनता का ध्यान भटकाने की कोशिश कर रही है और विपक्ष पर झूठे आरोप मढ़ने का काम कर रही है।
दरअसल, यह पूरा मामला सात जून को उस वक्त सुर्खियों में आया, जब समाजवादी पार्टी प्रमुख और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर एक पोस्ट कर दावा किया कि राम मंदिर के चढ़ावे से करोड़ों रुपये की रकम गायब हो गई है। उन्होंने इसे दुनियाभर में मौजूद भगवान राम के भक्तों के लिए बेहद गंभीर और चिंता की बात करार दिया था।
अखिलेश यादव के इस दावे के सामने आते ही यह मुद्दा तेजी से सार्वजनिक चर्चा का विषय बन गया। इसके बाद हरकत में आई उत्तर प्रदेश सरकार ने तीन सदस्यों की एक एसआईटी बनाकर औपचारिक तौर पर जांच शुरू करवा दी। पुलिस ने अब तक इस मामले में कुल आठ आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। इनमें राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय के निजी चालक का नाम भी दर्ज है। चंपत राय और ट्रस्टी डॉक्टर अनिल मिश्रा पहले ही इस्तीफा दे चुके हैं।