
लखनऊ : आम आदमी पार्टी (AAP) के प्रदेश प्रभारी और राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने राम मंदिर निर्माण और जमीन खरीद से जुड़े कथित भ्रष्टाचार के मुद्दे पर उत्तर प्रदेश सरकार और केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि राम मंदिर से जुड़े निर्माण कार्यों और जमीन खरीद मामलों की जांच को सीमित कर भ्रष्टाचार पर पर्दा डालने की कोशिश की जा रही है। संजय सिंह ने दावा किया कि उनके पास ऐसे 26 दस्तावेज हैं, जिनके आधार पर वह अदालत का दरवाजा खटखटाएंगे।
संजय सिंह ने कहा कि जब राम मंदिर से जुड़े कथित वित्तीय अनियमितताओं का मामला सामने आया था, तब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई का भरोसा दिया था। उन्होंने आरोप लगाया कि अब जांच के दायरे से निर्माण कार्यों और जमीन खरीद से जुड़े मामलों को बाहर रखा जा रहा है, जिससे सरकार की मंशा पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
उन्होंने कहा कि यदि जांच सभी पहलुओं को शामिल किए बिना की जाएगी, तो सच्चाई सामने नहीं आ पाएगी। उनके मुताबिक, यह कदम भ्रष्टाचार के आरोपों की निष्पक्ष जांच के बजाय उन्हें सीमित करने जैसा दिखाई देता है।
AAP सांसद ने आरोप लगाया कि राम मंदिर निर्माण कार्यों में बड़े पैमाने पर कमीशनखोरी हुई है। उन्होंने कहा कि कुछ इंजीनियरों और निर्माण कार्य से जुड़े लोगों द्वारा पहले भी इस तरह के आरोप लगाए गए हैं। संजय सिंह ने मांग की कि निर्माण कार्यों से जुड़े सभी वित्तीय लेनदेन और ठेकों की स्वतंत्र जांच कराई जानी चाहिए।
उन्होंने कहा कि यदि निर्माण कार्यों में किसी भी स्तर पर अनियमितता हुई है तो उसकी जवाबदेही तय होनी चाहिए, क्योंकि यह करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ा विषय है।
संजय सिंह ने राम मंदिर ट्रस्ट द्वारा की गई जमीन खरीद को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ जमीनों की खरीद में बाजार मूल्य और खरीद मूल्य के बीच भारी अंतर था।
उन्होंने दावा किया कि कई मामलों में जमीनों की कीमत कुछ ही मिनटों में कई गुना बढ़ा दी गई और बाद में उन्हें ट्रस्ट को ऊंचे दामों पर बेचा गया। उन्होंने कहा कि इन सौदों से जुड़े दस्तावेज सार्वजनिक किए जाने चाहिए और उनकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
AAP नेता ने आरोप लगाया कि जमीन खरीद और निर्माण कार्यों से जुड़े मामलों में कुछ प्रभावशाली लोगों की भूमिका की जांच नहीं की जा रही है। उन्होंने कहा कि यदि निष्पक्ष जांच कराई जाए तो कई बड़े नामों की भूमिका सामने आ सकती है।
हालांकि, इन आरोपों पर संबंधित पक्षों की ओर से पहले भी कई बार इनकार किया जा चुका है और ट्रस्ट से जुड़े पदाधिकारियों ने सभी आरोपों को निराधार बताया है।
संजय सिंह ने कहा कि राम मंदिर ट्रस्ट का गठन केंद्र सरकार की पहल पर हुआ था और इसी वजह से राज्य सरकार उसके खिलाफ कठोर कदम उठाने से बच रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि जांच को सीमित रखने के पीछे राजनीतिक कारण हो सकते हैं।
उन्होंने कहा कि यदि सरकार वास्तव में पारदर्शिता चाहती है तो निर्माण कार्य, जमीन खरीद, दान राशि के उपयोग और वित्तीय निर्णयों से जुड़े सभी मामलों की स्वतंत्र जांच करानी चाहिए।
संजय सिंह ने कहा कि वह कथित अनियमितताओं से जुड़े 26 दस्तावेजों के साथ अदालत जाएंगे और न्यायिक हस्तक्षेप की मांग करेंगे। उन्होंने दावा किया कि उनके पास ऐसे दस्तावेज हैं जो कथित वित्तीय गड़बड़ियों की ओर संकेत करते हैं।
उन्होंने कहा कि राम मंदिर करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र है और इससे जुड़े किसी भी वित्तीय मामले में पारदर्शिता सुनिश्चित होना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि यदि जरूरत पड़ी तो इस मुद्दे को कानूनी और जन आंदोलन दोनों स्तरों पर उठाया जाएगा।