
Satish Mahana Statement:उत्तर प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र में मंगलवार को हुए हंगामे के बाद बुधवार को विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने सदन में अपनी नाराजगी और पीड़ा खुलकर जाहिर की। उन्होंने कहा कि मंगलवार की घटना से उन्हें गहरा दुख पहुंचा है और सभी सदस्यों से सदन की गरिमा तथा भाषा की मर्यादा बनाए रखने की अपील की।
सदन की कार्यवाही शुरू होते ही सतीश महाना ने कहा कि मंगलवार की घटनाओं ने उन्हें व्यक्तिगत रूप से आहत किया है। उन्होंने कहा कि उन्हें पहली बार ऐसा महसूस हुआ कि अगर कहीं कमी है तो वह संविधान में नहीं, बल्कि उसे लागू करने वाले लोगों के व्यवहार में है। महाना ने कहा, "कल सदन में जो हुआ, उससे मैं दुखी और निराश हूं। डॉ. भीमराव आंबेडकर ने कहा था कि अगर कहीं कमी होगी तो वह संविधान में नहीं, बल्कि व्यक्तियों में होगी। कल की घटना के बाद मुझे उनकी बात याद आई।"
विधानसभा अध्यक्ष ने बिना किसी सदस्य का नाम लिए कहा कि जिस विधायक को वह सदन का रोल मॉडल मानते थे, उसी के व्यवहार से उन्हें सबसे ज्यादा पीड़ा हुई। उन्होंने कहा कि सदन के अंदर की गई हरकत और उसके बाद बाहर इस्तेमाल की गई भाषा दोनों ही निराशाजनक थीं। उनके मुताबिक, लोकतंत्र में मतभेद हो सकते हैं, लेकिन सदन की गरिमा और भाषा की मर्यादा हर हाल में बनी रहनी चाहिए।
अपने संबोधन के दौरान सतीश महाना भावुक भी नजर आए। उन्होंने कहा कि उनकी राजनीतिक यात्रा अब अंतिम दौर में है और वह चाहते हैं कि विधानसभा की गरिमा हमेशा बनी रहे। उन्होंने सभी दलों के विधायकों से अपील करते हुए कहा कि राजनीतिक मतभेद अपनी जगह हैं, लेकिन सदन की कार्यवाही के दौरान संयम और शालीनता बनाए रखना सभी जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारी है।
मंगलवार को समाजवादी पार्टी के विधायकों ने श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे से जुड़े कथित चोरी के मामले को लेकर सदन में जोरदार विरोध प्रदर्शन किया था। विपक्ष ने इस मुद्दे पर चर्चा की मांग की और नारेबाजी करते हुए वेल तक पहुंच गया। हंगामे के दौरान विधानसभा अध्यक्ष ने विपक्षी सदस्यों से कहा था कि यदि उन्होंने मंदिर में चंदा दिया है तो उसकी रसीद भी दिखाएं। इस टिप्पणी के बाद सदन का माहौल और गरमा गया।
हंगामे के बीच समाजवादी पार्टी के जसराना विधायक सचिन यादव मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की तस्वीर लेकर सदन में विरोध प्रदर्शन करते नजर आए। विधानसभा अध्यक्ष ने इसे सदन की कार्यवाही में बाधा और नियमों का उल्लंघन मानते हुए सचिन यादव को पूरे मानसून सत्र की शेष अवधि के लिए निलंबित कर दिया।
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इस कार्रवाई का विरोध किया। उन्होंने सोशल मीडिया पर कहा कि विधानसभा में विपक्ष की आवाज दबाई जा रही है। साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि सत्ता पक्ष लोकतांत्रिक तरीके से उठाए जा रहे मुद्दों पर चर्चा से बच रहा है। वहीं, सत्ता पक्ष का कहना है कि विधानसभा की कार्यवाही नियमों के तहत चलती है और सदन की मर्यादा बनाए रखना सभी सदस्यों की सामूहिक जिम्मेदारी है।