
Shahin Bano Death Justice Demand: संडीला के प्राथमिक विद्यालय टिमरुख की सहायक अध्यापिका शाहीन बानो की मौत का मामला अब राजनीतिक रूप लेता जा रहा है। वरिष्ठ कांग्रेस नेता, पूर्व पार्षद एवं पार्टी प्रवक्ता शैलेन्द्र तिवारी ने शिक्षिका की मौत को सुनियोजित हत्या बताते हुए जिम्मेदार खंड शिक्षा अधिकारी के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज कर तत्काल जेल भेजने की मांग की है। उन्होंने कहा कि शाहीन बानो को अवकाश के दौरान फोन कर कथित रूप से मानसिक दबाव में डाला गया और इसी दबाव के चलते उनकी तबीयत बिगड़ी, जिसके बाद इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।
शाहीन बानो के प्रकरण में परिजनों और शिक्षक संगठनों की ओर से पहले भी खंड शिक्षा अधिकारी पर गंभीर आरोप लगाए गए थे। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक शाहीन बानो बाल देखभाल अवकाश पर थीं। 21 सितंबर को प्राथमिक विद्यालय टिमरुख में गैस पाइप में रिसाव के बाद आग लगने की घटना हुई थी, जिसमें दो रसोइये झुलस गए थे। इसी घटनाक्रम के बाद बीईओ की ओर से शाहीन बानो को फोन किए जाने और बातचीत के बाद उनकी तबीयत बिगड़ने का आरोप लगाया गया था।
परिजनों के मुताबिक, विद्यालय में हुई घटना को लेकर शाहीन बानो से फोन पर बातचीत हुई। परिवार का आरोप है कि बातचीत के दौरान उन्हें कार्रवाई और अन्य मामलों को लेकर दबाव का सामना करना पड़ा। इसके बाद उनकी तबीयत अचानक बिगड़ गई और वह बेहोश होकर गिर पड़ीं। उन्हें पहले स्थानीय स्तर पर उपचार दिलाया गया और बाद में लखनऊ के अस्पताल में भर्ती कराया गया। मीडिया रिपोर्टों में यह भी सामने आया कि शाहीन बानो पिछले करीब पांच वर्षों से डायलिसिस पर थीं। बीमारी के बावजूद उनके परिवार के अनुसार उन्हें विद्यालय का प्रभार दिया गया था। इस पूरे घटनाक्रम ने शिक्षकों के बीच भी नाराजगी पैदा की और शिक्षक संगठनों ने मामले की निष्पक्ष जांच तथा जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।
शाहीन बानो की हालत लगातार गंभीर बनी रही। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार उन्हें लखनऊ के निजी अस्पताल में उपचार के बाद वेंटिलेटर पर रखा गया था। चिकित्सकीय स्थिति बिगड़ने के बाद रविवार शाम डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। उनकी मौत की खबर सामने आने के बाद परिवार में कोहराम मच गया और मामले में कार्रवाई की मांग और तेज हो गई। शाहीन बानो की मौत के बाद अब यह मामला केवल विभागीय कार्रवाई तक सीमित नहीं रहा है। परिवार, शिक्षक संगठनों और राजनीतिक दलों की ओर से जिम्मेदारी तय करने तथा मुकदमा दर्ज करने की मांग उठाई जा रही है।
कांग्रेस नेता शैलेन्द्र तिवारी ने आरोप लगाया कि शाहीन बानो को लगातार मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा था। उनका कहना है कि शिक्षिका ने लंबे समय तक कथित दबाव को सहन किया, लेकिन अवकाश के दिन भी फोन करके दबाव बनाए जाने की घटना ने स्थिति को गंभीर बना दिया।
तिवारी ने कहा कि किसी कर्मचारी को उसके अवकाश के दौरान इस तरह मानसिक दबाव में डालना गंभीर विषय है। उनके मुताबिक, यदि जांच में यह तथ्य सामने आता है कि अधिकारी के व्यवहार और दबाव का शिक्षिका की तबीयत बिगड़ने तथा मृत्यु से सीधा संबंध था, तो संबंधित अधिकारी के खिलाफ कठोर आपराधिक कार्रवाई होनी चाहिए। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। प्रशासनिक स्तर पर मामले की जांच जारी है और अंतिम जिम्मेदारी जांच रिपोर्ट तथा उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही तय हो सकेगी। बीईओ को फिलहाल उनके पद से हटाकर जिला मुख्यालय कार्यालय से संबद्ध किया जा चुका है।
शाहीन बानो प्रकरण सामने आने के बाद बेसिक शिक्षा विभाग ने खंड शिक्षा अधिकारी डॉ. ब्रजेश कुमार त्रिपाठी को संडीला और कछौना के कार्यभार से हटाकर जिला मुख्यालय से संबद्ध कर दिया। उनके स्थान पर दूसरे अधिकारी को अतिरिक्त जिम्मेदारी दी गई है। विभागीय स्तर पर जांच की प्रक्रिया भी शुरू की गई है। इसके अलावा जिलाधिकारी की ओर से गठित टीम ने प्राथमिक विद्यालय टिमरुख पहुंचकर मौके का निरीक्षण किया। टीम ने विद्यालय की रसोई, गैस पाइप और अन्य संबंधित पहलुओं की जानकारी जुटाई तथा ग्रामीणों और रसोइयों से भी बातचीत की। अधिकारियों ने जांच के दौरान प्राप्त तथ्यों को सार्वजनिक नहीं किया है।
इस घटना को लेकर शिक्षक संगठनों में भी नाराजगी सामने आई। रिपोर्टों के अनुसार शिक्षकों ने बीआरसी कार्यालय पर धरना दिया और बीईओ समेत अन्य लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। बाद में परिजन और शिक्षक प्रतिनिधि संडीला कोतवाली तक भी पहुंचे थे। इस दौरान पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई। शिक्षक संगठनों का कहना है कि विभागीय अधिकारियों और शिक्षकों के बीच संवाद तथा प्रशासनिक कार्रवाई की एक निर्धारित प्रक्रिया होनी चाहिए। किसी भी शिक्षक को अनावश्यक मानसिक दबाव में डालने के आरोपों की गंभीरता से जांच की जानी चाहिए, ताकि भविष्य में ऐसी परिस्थितियां दोबारा न बनें।
शैलेन्द्र तिवारी ने कहा कि कांग्रेस पार्टी शाहीन बानो को न्याय दिलाने के लिए आंदोलन करेगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक जिम्मेदार अधिकारी के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज नहीं किया जाता और मामले में कठोर कार्रवाई नहीं होती, तब तक कांग्रेस इस मुद्दे को उठाती रहेगी। उन्होंने इस मामले को केवल एक शिक्षिका की मौत का मामला न बताते हुए सरकारी कर्मचारियों और शिक्षकों पर कथित प्रशासनिक दबाव से जोड़कर भी सवाल उठाए। उनका कहना है कि यदि किसी कर्मचारी को विभागीय स्तर पर प्रताड़ना का सामना करना पड़ता है तो उसकी शिकायत सुनने और सुरक्षा देने की व्यवस्था प्रभावी होनी चाहिए।
फिलहाल शाहीन बानो की मौत के मामले में सबसे महत्वपूर्ण पहलू जांच का निष्कर्ष है। एक तरफ परिवार और कांग्रेस नेता बीईओ पर गंभीर आरोप लगाते हुए हत्या का मुकदमा दर्ज करने की मांग कर रहे हैं, वहीं प्रशासनिक स्तर पर जांच की प्रक्रिया जारी है। बीईओ को पद से हटाकर मुख्यालय से संबद्ध किया जाना विभागीय स्तर पर उठाया गया कदम है, लेकिन आपराधिक जिम्मेदारी का निर्धारण जांच और साक्ष्यों के आधार पर ही होगा। मामले में गैस पाइप लीकेज की घटना, शिक्षिका की बीमारी, अवकाश की स्थिति, बीईओ से हुई कथित फोन बातचीत, उसके बाद तबीयत बिगड़ना और इलाज के दौरान मौत-इन सभी कड़ियों की जांच महत्वपूर्ण होगी। यही जांच यह स्पष्ट करेगी कि घटना के अलग-अलग पहलुओं के बीच क्या संबंध था और किसी अधिकारी की जिम्मेदारी किस स्तर तक बनती है।
कांग्रेस नेता शैलेन्द्र तिवारी ने कहा कि शाहीन बानो को न्याय दिलाने की लड़ाई जारी रहेगी। उन्होंने सरकार और प्रशासन से मांग की कि मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित अधिकारी के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए। शाहीन बानो की मौत ने संडीला के शिक्षा विभाग के कामकाज और अधिकारियों की जवाबदेही को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। अब परिवार, शिक्षक संगठनों और राजनीतिक दलों की निगाह जांच रिपोर्ट पर है। जांच में सामने आने वाले तथ्य ही यह तय करेंगे कि इस पूरे घटनाक्रम में जिम्मेदारी किसकी बनती है और आगे किस तरह की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।