लखनऊ

अखिलेश यादव का स्मृति ईरानी पर शायराना पलटवार, बोले- अवाम से दोस्ती निभाई होती, तो विदाई नहीं होती

महिला आरक्षण विधेयक को लेकर समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव और भाजपा की पूर्व सांसद स्मृति ईरानी के बीच टकराव बहस छिड़ गई है।

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Apr 17, 2026
अखिलेश vs स्मृति की जुबानी जंग हुई तेज
अखिलेश vs स्मृति की जुबानी जंग हुई तेज

Smriti Irani vs Akhilesh Yadav : महिला आरक्षण विधेयक को लेकर राजनीति में नई बहस शुरू हो गई है। लोकसभा में गुरुवार को इस विधेयक को पास कर दिया गया है, लेकिन उत्तर प्रदेश की सियासत गरमा गई है। समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव और भाजपा की पूर्व सांसद स्मृति ईरानी के बीच आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला तेज हो गया है। अखिलेश ने बिना नाम लिए तंज कसा, तो स्मृति ईरानी ने भी करारा जवाब दिया। बाद में अखिलेश ने चार लाइन की शायरी कर फिर हमला बोला।

अखिलेश यादव का पहला हमला

संसद के विशेष सत्र में महिला आरक्षण विधेयक पर बोलते हुए अखिलेश यादव ने कहा कि अगर सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित कर दी जाएंगी तो महिलाएं आपस में ही चुनाव लड़ेंगी। उन्होंने पार्टी के आधार पर आरक्षण देने की मांग की। इसी दौरान उन्होंने बिना नाम लिए स्मृति ईरानी पर तंज कसते हुए कहा कि सास-बहू वाली तो हार गई हैं आपकी। उनका इशारा स्मृति ईरानी के टीवी सीरियल 'क्योंकि सास भी कभी बहू थी' की ओर था। अखिलेश ने कहा कि महिलाओं को असली मौका तभी मिलेगा जब आरक्षण सही तरीके से लागू किया जाए।

स्मृति ईरानी का पलटवार

स्मृति ईरानी भी चुप नहीं रहीं। उन्होंने सोशल मीडिया पर अखिलेश यादव पर जोरदार हमला बोला। स्मृति ने लिखा कि सुना है आज अखिलेश जी ने संसद में मुझे याद किया। अच्छा है। जिन्हें राजनीति धरोहर में मिली, वे उन लोगों को भी याद करते हैं जो अपने दम पर काम करते हैं। उन्होंने अखिलेश पर परिवारवाद का आरोप लगाया और कहा कि जो खुद कभी नौकरी नहीं की, वे कामकाजी महिलाओं पर टिप्पणी करते हैं। स्मृति ने आगे कहा कि सीरियल से हटकर संसद पर ध्यान लगाएं और महिलाओं के लिए अहम बिल पास कराने में मदद करें।

अखिलेश यादव की शायरी और तंज

इसके बाद अखिलेश यादव ने एक बार फिर पलटवार किया। उन्होंने चार लाइन की शायरी के जरिए स्मृति ईरानी पर तंज कसा। अखिलेश ने कहा कि-
हर बात से अगर साजिश की बू आई न होती,
यकीन करते लोग अगर बात जुमलाई न होती,
दरअसल अगर अवाम से दोस्ती निभाई होती,
तो इतनी जल्दी विदाई की घड़ी आई न होती।

इस शायरी में अखिलेश ने स्मृति ईरानी और भाजपा पर जनता से दूर होने का आरोप लगाया। उनकी यह शायरी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है।

वार-पलटवार का दौर जारी

यह बहस महिला आरक्षण विधेयक के पास होने के बाद शुरू हुई है। अखिलेश यादव विधेयक का समर्थन करते हुए भी कुछ शर्तें रख रहे हैं, जैसे पहले जाति जनगणना कराना। वहीं स्मृति ईरानी ने अखिलेश को परिवारवाद और सीरियल देखने का मजाक उड़ाया। दोनों नेताओं के बीच यह तीखा संवाद यूपी की राजनीति को और गर्मा रहा है।

Updated on:
17 Apr 2026 01:53 pm
Published on:
17 Apr 2026 01:21 pm