विपक्षी दल इस बात पर सहमत हैं कि विपक्ष की संयुक्त ताकत के सामने भारतीय जनता पार्टी कहीं नहीं टिक सकेगी...
लखनऊ. 2019 के लोकसभा चुनाव में संयुक्त विपक्ष उत्तर प्रदेश और बिहार में भारतीय जनता पार्टी को पांच सीटें भी जीतने नहीं देना चाहता है। सूत्रों की मानें तो उत्तर प्रदेश में भाजपा से मुकाबले को समाजवादी पार्टी, बहुजन समाज पार्टी, कांग्रेस और रालोद के बीच डील फाइनल हो गई है। रणनीति के तहत ये दल बीजेपी को उत्तर प्रदेश में पांच सीटें भी नहीं जीतने देंगे।
सूत्रों की मानें तो शुक्रवार को विपक्षी दलों की हुई बैठक में इस बात पर सभी दल एकमत हैं कि विपक्ष की संयुक्त ताकत के सामने भारतीय जनता पार्टी कहीं नहीं टिक सकेगी। इस बात पर भी सहमति बन गई है कि चुनाव परिणाम के बाद सभी दल मिलकर पीएम प्रत्याशी घोषित करेंगे। सीटों के बंटवारे की बात चल रही है, माना जा रहा है कि जल्द ही सीटों का बंटवारा फाइनल हो जाएगा। कांग्रेस पार्टी के सूत्रों का दावा है कि उत्तर प्रदेश में अगर सही ढ़ंग से महागठबंधन हो गया तो सूबे में बीजेपी को पांच से ज्यादा सीटें नहीं मिलने वालीं। महागठबंधन के बाद बीजेपी का ऐसा ही हाल बिहार में भी होने वाला है।
सीटों के बंटवारे पर फंसा पेंच
गोरखपुर-फूलपुर के बाद कैराना और नूरपुर उपचुनाव में जीत से उत्साहित सपा-बसपा महागठबंधन बनाने की बात कर रहे हैं। यूपी में इसे लेकर लंबे समय से बातचीत चल रही है। महागठबंधन पर सभी दल सहमत हैं, लेकिन मामला सीटों के बंटवारे पर अटका है। बसपा सुप्रीमो मायावती पहले ही कह चुकी हैं कि वह महागठबंधन के साथ हैं, लेकिन सम्मानजनक सीटें मिलने पर ही वह गठबंधन में शामिल होंगी। हालांकि, अखिलेश यादव गठबंधन पर नरम रुख अपनाये हैं। उन्होंने सीटें कम मिलने की दशा में भी गठबंधन को तैयार हैं।
मायावती मांग पर अड़ीं!
सूत्रों की मानें तो बहुजन समाज पार्टी यूपी की 80 लोकसभा सीटों में से 40 सीटें मांग रही है। इसके अलावा मायावती कांग्रेस से राजस्थान, मध्य प्रदेश और झारखंड में भी गठबंधन करना चाहती हैं। गौरतलब कि राजस्थान, मध्य प्रदेश और झारखंड में इसी वर्ष विधानसभा चुनाव होने हैं। इन राज्यों में उत्तर प्रदेश के मुकाबले कांग्रेस का प्रभाव काफी ज्यादा है। मायावती चाहती हैं यहां भी कांग्रेस पार्टी बसपा से गठबंधन करे और ठीक-ठाक सीटें शेयर करें।