
Awadhesh Prasad Slams OP Rajbhar: सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने हाल ही में उत्तर प्रदेश के विभाजन पर बयान दिया था। अब समाजवादी पार्टी के सांसद अवधेश प्रसाद ने राजभर के बयान पर तीखा हमला बोलते हुए कहा है कि उनके हाथ में क्या है, उनकी हैसियत क्या है? चलिए जानते हैं मंत्री ओपी राजभर के बयान पर सपा सांसद ने क्या कुछ कहा।
मंत्री ओम प्रकाश राजभर के बयान पर समाजवादी पार्टी के सांसद अवधेश प्रसाद ने कहा, उत्तर प्रदेश का एक गौरवशाली इतिहास रहा है। उत्तराखंड कभी उत्तर प्रदेश का हिस्सा था, लेकिन अलग हो गया और उसका विकास रुक गया। किसी भी राज्य के विकास के लिए विभाजन जरूरी नहीं है, विकास जरूरी है। आज हमें उत्तर प्रदेश में किसानों के विकास पर ध्यान देना होगा और शिक्षित युवाओं को सरकारी नौकरियां देनी होंगी। हमें उत्तर प्रदेश के गौरवशाली इतिहास और परंपराओं को संरक्षित और स्थापित करने की भी जरूरत है। विभाजन का सवाल कहां से आया, उन्हें यह सुझाव किसने दिया, उनकी हैसियत क्या है? ऐसी बातों के बारे में सोचना दिवास्वप्न के अलावा कुछ नहीं है।
दरअसल, देवरिया में रविवार को आयोजित सुभासपा की सामाजिक समरसता महारैली में ओम प्रकाश राजभर ने कहा था कि आने वाले समय में उत्तर प्रदेश 4 हिस्सों में बंटेगा। उन्होंने यह भी कहा था कि अगर पूर्वांचल अलग राज्य बनता है तो वहां राजभर समाज का बेटा मुख्यमंत्री बनेगा। राजभर ने 27 फीसदी OBC आरक्षण में आबादी के हिसाब से हिस्सेदारी की मांग भी उठाई थी। उनके इस बयान के बाद उत्तर प्रदेश के विभाजन और अलग पूर्वांचल राज्य की पुरानी मांग को लेकर राजनीतिक चर्चा फिर तेज हो गई हैं।
कांग्रेस सांसद इमरान मसूद के सपा प्रमुख अखिलेश यादव पर दिए गए बयान पर भी सपा सांसद ने अपना मत रखा। उन्होंने कहा कि, "राज्य के सम्मानित मतदाताओं ने BJP को सत्ता से हटाने का मन बना लिया है। भाजपा के प्रति उनका विश्वास और लगाव समाप्त हो गया है। वहीं दूसरी ओर यह खुशी की बात है कि PDA और आदरणीय अखिलेश यादव के प्रति विश्वास और भरोसा बढ़ा है। लोगों ने ठान लिया है कि वे भारतीय जनता पार्टी को सत्ता से हटाना चाहते हैं। राज्य और देश में हर कोई जानता है कि किस पार्टी में BJP को सत्ता से हटाने की ताकत और क्षमता है। वह कोई और नहीं बल्कि समाजवादी पार्टी और अखिलेश यादव हैं। यह समाजवादी पार्टी और PDA ही हैं। भाजपा को सत्ता से हटाने की ताकत और क्षमता किसी अन्य पार्टी में नहीं है।"
उत्तर प्रदेश को छोटे राज्यों में विभाजित करने की मांग कोई नई नहीं है। राज्य के राजनीतिक इतिहास में समय-समय पर अलग राज्यों के गठन की आवाज उठती रही है। इसका सबसे प्रमुख उदाहरण साल 2011 का है, जब तत्कालीन मुख्यमंत्री मायावती की सरकार ने उत्तर प्रदेश विधानसभा में प्रदेश के पुनर्गठन का एक आधिकारिक प्रस्ताव पास किया था। तत्कालीन सरकार द्वारा पेश किए गए इस प्रस्ताव में उत्तर प्रदेश को चार अलग-अलग हिस्सों यानी पूर्वांचल, बुंदेलखंड, पश्चिम प्रदेश और अवध प्रदेश में बांटने की बात कही गई थी। विधानसभा से यह प्रस्ताव पारित होने के बाद इसे केंद्र सरकार के पास भेजा गया था, लेकिन यह प्रस्ताव आगे चलकर राज्य के औपचारिक पुनर्गठन में तब्दील नहीं हो सका।
इसके अलावा, पूर्वी उत्तर प्रदेश के कई इलाकों को मिलाकर एक अलग राज्य बनाने की मांग भी उत्तर प्रदेश की राजनीति में समय-समय पर उठती रही है। इस मांग को लेकर विभिन्न राजनीतिक और सामाजिक संगठनों की ओर से लगातार आवाज बुलंद की जाती रही है। ओम प्रकाश राजभर के ताजा बयान के बावजूद फिलहाल उत्तर प्रदेश को चार हिस्सों में बांटने को लेकर कोई नया प्रशासनिक या सरकारी फैसला सामने नहीं आया है। ऐसे में देवरिया की रैली में दिया गया बयान फिलहाल राजनीतिक दावे और मांग के तौर पर ही देखा जा रहा है।