लखनऊ

यूपी में भरे पड़े हैं गैर मान्यता प्राप्त मदरसे, 22 जिलों में 535 संचालित मिले

उत्तर प्रदेश के 22 जिलों के करीब चार हजार मदरसों में सर्वे अभियान में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। इन मदरसों में 535 मदरसे ऐसे मिले हैं, जो बिना मान्यता के संचालित किए जा रहे हैं। सर्वे के दौरान ऐसे कई जिले हैं, जहां ऐसे मदरसे पाए गए जिनके बारे में विभाग को कोई जानकारी नहीं है।
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Updated: 22 Sep 2022, 11:25 AM IST
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Survey revealed 535 unrecognized madrasas in 22 districts of UP

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के आदेश के बाद उत्तर प्रदेश में स्थित मदरसों पर अल्पसंख्यक कल्याण विभाग की टीम द्वारा सर्वे अभियान चलाया जा रहा है। इसी कड़ी में प्रदेश के अब तक 22 जिलों के करीब चार हजार मदरसों में सर्वे अभियान में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। इन मदरसों में 535 मदरसे ऐसे मिले हैं, जो बिना मान्यता के संचालित किए जा रहे हैं। सर्वे के दौरान ऐसे कई जिले हैं, जहां ऐसे मदरसे पाए गए जिनके बारे में विभाग को कोई जानकारी नहीं है। जिसके बाद इन मदरसों की फंडिंग कहां से और कौन कर रहा है, इस बारे में विभाग द्वारा जानकारी जुटाई जा रही है। वहीं बाकी के मदरसों में सर्वे अभियान के बाद भी आगे की कार्रवाई की जाएगी। बता दें कि सर्वे अभियान पांच अक्टूबर तक चलाया जाएगा।

मदरसों में फंडिंग की स्पष्ट जानकारी नहीं

इसी कड़ी में सर्वे टीम जब कानपुर में स्थित मदरसों के सर्वे करने पहुंची तो यहां जांच टीम को दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए गए। ऐसा ही मामला पश्चिमी यूपी के सहारनपुर जिले में देखने को मिला। यहां मदरसों में फंडिंग की स्पष्ट जानकारी नहीं देने के बाद नौ मदरसों के फंड पर रोक लगा दी गई है। उधर, प्रयागराज में पिछले 10 दिनों में 70 मदरसों में सर्वे हुआ जिनमें 25 ऐसे मिले जो बिना मान्यता के चलाए जा रहे हैं। जब टीम ने इन मदरसों में पहुंची तो बताया गया कि यहां बच्चों को दीनी तालीम दी जा रही है। जबकि फंडिंग के बारे में कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई। वहीं पीलीभीत में संचालित 220 में से 8 मदरसों की मान्यता से जुड़ी जांच वाराणसी ट्रस्ट से चल रही थी। जिनमें से 6 मदरसों को क्लीन चिट मिल चुकी है।

प्रदेश के मदरसों में 11 बिंदुओं पर सर्वे

बता दें कि सीएम योगी के आदेश के बाद प्रदेश के मदरसों में 11 बिंदुओं पर सर्वे किया जा रहा है। ये बिंदु मदरसा कितना पुराना है, किस संस्था से संचालित है, अपना भवन है या किरए का, पाठ्यक्रम क्या है, आधुनिक सुविधाओं की स्थिति, मदरसे से कौन.कौन लोग जुड़े हैं, वित्तीय प्रबंधन कैसे हो रहा है आदि हैं। वहीं सर्वे के दौरान ज्यादातर लोग स्थानीय स्तर पर फंड मिलने की बात कह रहे हैं। फंड कहां से और कितना मिला, इसकी जानकारी नहीं दे रहे हैं। गौरतलब है कि सर्वे 5 अक्टूबर तक चलेगा जबकि 15 अक्टूबर तक एडीएम डीएम को रिपोर्ट भेजेंगे। जिसके बाद डीएम शासन को 25 अक्टूबर तक रिपोर्ट सौंपेगे।

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