अखिलेश यादव के खाली बंगले में तोड़फोड़ पर यूपी की सियासत में उबाल आ गया है
लखनऊ. अखिलेश यादव के खाली बंगले में तोड़फोड़ पर यूपी की सियासत में उबाल आ गया है। समाजवादी पार्टी जहां इसे बीजेपी की साजिश बता रही है, वहीं भाजपा नेता इसे अखिलेश यादव की कुंठा करार दे रहे हैं। यूपी सरकार में मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह ने तो यहां तक कह दिया कि आवास तोड़ना उनके डीएनए का असर है। गौरतलब है कि शनिवार को सपा प्रमुख अखिलेश यादव राज्य संपत्ति विभाग को सरकारी बंगले की चाबी सौंपी। राज्य संपत्ति विभाग ने मीडिया को ले जाकर बंगले का कोना-कोना दिखाते हुए कहा कि आलीशान बंगले में कई जगह तोड़फोड़ की गई है। सरकारी आवास में भगवान के मंदिर के अलावा सबकुछ तहस-नहस कर दिया गया था।
चार-विक्रमादित्य स्थित पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के खाली आवास में जब राज्य संपत्ति विभाग के अधिकारियों समेत मीडिया ने एंट्री की, बंगला तहस-नहस था। अपनी चकाचौंध के लिये मशहूर ये बंगला खंडहर नजर आ रहा था। बंगले में बने स्विमिंग पूल को पाट दिया गया था। एसी व सजावट का सामान गायब था। शीशे तक नहीं थे। हरा-भरा गार्डेन उजाड़ हो चुका था। गार्डेन किनारे बना साइकिल ट्रैक पैदल चलने लायक भी नहीं बचा था। बंगले में बना बैडमिंटन कोर्ट में भी छत और फर्श उखड़ी पड़ी थी। कीमती व खूबसूरत लाइटें भी गायब थीं। भले ही बंगले में सबकुछ तहस-नहस हो चुका था, लेकिन बंगले के प्रथम तल पर बने मंदिर के दोनों ओर शानदार मार्बल की नक्काशीदारी दीवारें सुरक्षित थीं। साथ ही बच्चों के कमरे से भी छेड़छाड़ नहीं की गई थी। बच्चों के कमरे में एक दीवार पर दो पेड़ बनाए हुए थे, वहीं दूसीर दीवार पर एक खूबसूरत फूल बना था। साथ ही कागज पर बनाये गये घोड़े की तस्वीर भी दीवार पर चस्पा थी।
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सपाई बोले- अखिलेश को बदनाम करने की साजिश
बंगले में तोड़फोड़ की खबरों का खंडन करते हुए अखिलेश यादव कहा कि भारतीय जनता पार्टी उन्हें बदनाम करने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा कि जो बंगले में नुकसान हुआ है, सरकार उसकी लिस्ट दें, हम उन्हें उन्हें ठीक करा देंगे। समाजवादी पार्टी के एमएलसी सुनील सिंह यादव ने बीजेपी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि फूलपुर, गोरखपुर के बाद कैराना और नूरपुर उपचुनाव में मिली हार से हताश बीजेपी बंगले में तोड़फोड़ कर अखिलेश यादव को बदनाम करने की कोशिश कर रही है। इससे पहले शनिवार को अखिलेश यादव कहा था कि राज्य संपत्ति विभाग के अधिकारियों को उनके और बच्चों के कमरे के साथ-साथ मंदिर भी दिखना चाहिये। जररूत पड़े तो शौचालय भी दिखा दें।