लखनऊ

Lucknow हादसा: जर्जर मंदिर की दीवार गिरने से 6 माह के बच्चे की दर्दनाक मौत

Tragedy in Lucknow: लखनऊ के अलीगंज में जर्जर मंदिर की दीवार गिरने से मलबे में दबे छह माह के मासूम की इलाज के दौरान मौत हो गई, जिससे इलाके में शोक फैल गया।
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Apr 09, 2026
अलीगंज के डंडहिया बाजार स्थित पुराने हनुमान मंदिर की दीवार ढही, मलबे में दबा बच्चा; अस्पताल में उपचार के दौरान तोड़ा दम  (फोटो सोर्स : भाषा WhatsApp News Group)
अलीगंज के डंडहिया बाजार स्थित पुराने हनुमान मंदिर की दीवार ढही, मलबे में दबा बच्चा; अस्पताल में उपचार के दौरान तोड़ा दम  (फोटो सोर्स : भाषा WhatsApp News Group)

Lucknow के अलीगंज इलाके में गुरुवार को एक दर्दनाक हादसा हो गया, जहां डंडहिया बाजार स्थित पुराने हनुमान मंदिर की जर्जर दीवार अचानक भरभराकर गिर गई। इस हादसे में मलबे के नीचे दबकर एक छह माह के मासूम की मौत हो गई। घटना के बाद इलाके में शोक और आक्रोश का माहौल है।

मलबे में दबा मासूम, डेढ़ घंटे चला रेस्क्यू

प्राप्त जानकारी के अनुसार, हादसे के समय छह माह का बच्चा झोपड़ी के अंदर सो रहा था, जबकि परिवार के अन्य सदस्य बाहर मौजूद थे। तभी अचानक मंदिर की पुरानी और जर्जर दीवार गिर गई, जिससे बच्चा मलबे के नीचे दब गया।

घटना के बाद आसपास मौजूद लोगों में अफरा-तफरी मच गई। स्थानीय लोगों ने तुरंत बच्चे को निकालने की कोशिश शुरू की, लेकिन भारी मलबे के कारण उन्हें काफी कठिनाई का सामना करना पड़ा। करीब 50-60 लोगों ने मिलकर मलबा हटाने का प्रयास किया। इसी बीच पुलिस और नगर निगम की टीम भी मौके पर पहुंच गई। करीब डेढ़ घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद बच्चे को मलबे से बाहर निकाला जा सका।

अस्पताल में तोड़ा दम

मलबे से बाहर निकालने के बाद बच्चे को तुरंत भाऊराव देवरस अस्पताल ले जाया गया, जहां उसकी हालत गंभीर बताई गई। डॉक्टरों ने प्राथमिक उपचार के बाद उसे किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) रेफर कर दिया। परिजन बच्चे को तत्काल KGMU लेकर पहुंचे, लेकिन इलाज के दौरान मासूम ने दम तोड़ दिया। इस खबर के बाद परिवार में कोहराम मच गया।

मिसरिख सीतापुर निवासी था परिवार

पुलिस के अनुसार, मृतक की पहचान रूप लाल के रूप में हुई है, जो मिसरिख (सीतापुर) निवासी गजोधर का छह माह का बेटा था। गजोधर अपने परिवार के साथ मंदिर के पास झुग्गी डालकर रह रहे थे। परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर बताई जा रही है और वे दिहाड़ी मजदूरी कर अपना जीवन यापन करते हैं।

बाबा का दर्द छलका

बच्चे के दादा मेवालाल ने बताया कि हादसे के वक्त बच्चा झोपड़ी के अंदर सो रहा था। उन्होंने भावुक होते हुए कहा कि अचानक दीवार गिर गई और उनका पोता मलबे के नीचे दब गया। उन्होंने बताया कि जब तक लोग मलबा हटाकर बच्चे को बाहर निकालते, तब तक काफी देर हो चुकी थी।

तीन बेटियों के बाद हुआ था बेटा

स्थानीय निवासी फूल कुमार ने बताया कि गजोधर के परिवार में पहले से तीन बेटियां हैं और काफी इंतजार के बाद यह बेटा हुआ था। बच्चे के जन्म पर परिवार ने करीब एक से डेढ़ लाख रुपये का कर्ज लिया था, जिसे वे अभी तक चुका नहीं पाए हैं।इस हादसे ने पूरे परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया है।

घटना के बाद पुलिस और प्रशासन सक्रिय

घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस तुरंत मौके पर पहुंची और राहत कार्य शुरू कराया। साथ ही, इलाके में सुरक्षा के मद्देनजर पुलिस बल तैनात कर दिया गया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले में आवश्यक विधिक कार्रवाई की जा रही है और घटना की जांच की जा रही है।

जर्जर भवनों पर उठे सवाल

इस हादसे के बाद शहर में मौजूद जर्जर इमारतों और धार्मिक स्थलों की स्थिति पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि कई पुराने भवन और दीवारें लंबे समय से खराब हालत में हैं, लेकिन उनकी मरम्मत या हटाने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए जाते।

प्रशासन से कार्रवाई की मांग

स्थानीय निवासियों ने प्रशासन से मांग की है कि ऐसे जर्जर ढांचों की पहचान कर उन्हें जल्द से जल्द ठीक कराया जाए या हटाया जाए, ताकि भविष्य में इस तरह के हादसों से बचा जा सके।