लखनऊ

UP चुनाव की तैयारी तेज: EVM-VVPAT की जांच होगी पारदर्शी, अधिकारियों की ट्रेनिंग से मजबूत होगी चुनावी व्यवस्था

UP Assembly Polls: उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियां तेज हो गई हैं। ईवीएम-वीवीपैट की एफएलसी को पारदर्शी बनाने के लिए निर्वाचन अधिकारियों को विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
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Sep 14, 2026
पारदर्शिता और तय मानकों के तहत होगी फर्स्ट लेवल चेकिंग (फोटो सोर्स : Ritesh Singh )
पारदर्शिता और तय मानकों के तहत होगी फर्स्ट लेवल चेकिंग (फोटो सोर्स : Ritesh Singh )

UP Election:आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर उत्तर प्रदेश में निर्वाचन तैयारियों को तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है। इसी क्रम में इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) और वोटर वेरिफिएबल पेपर ऑडिट ट्रेल (वीवीपैट) की फर्स्ट लेवल चेकिंग यानी FLC की प्रक्रिया को लेकर तैयारियां तेज कर दी गई हैं। निर्वाचन विभाग की ओर से FLC को पूरी पारदर्शिता और निर्धारित मानकों के अनुरूप संपन्न कराने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। इसके लिए जिला निर्वाचन अधिकारियों, उप जिला निर्वाचन अधिकारियों और एफएलसी सुपरवाइजरों को विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

FLC प्रक्रिया में पारदर्शिता पर जोर

निर्वाचन विभाग का उद्देश्य है कि ईवीएम-वीवीपैट की फर्स्ट लेवल चेकिंग के दौरान तकनीकी गुणवत्ता के साथ-साथ प्रशासनिक पारदर्शिता भी पूरी तरह सुनिश्चित की जाए। FLC के प्रत्येक चरण की जानकारी राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों को दी जाएगी और उनकी जानकारी एवं सहभागिता के साथ पूरी प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाएगा। निर्वाचन अधिकारियों को निर्देशित किया जा रहा है कि FLC के दौरान भारत निर्वाचन आयोग की ओर से जारी दिशा-निर्देशों और निर्धारित प्रक्रियाओं का पूरी तरह पालन सुनिश्चित किया जाए।

FLC चुनाव प्रक्रिया का एक महत्वपूर्ण चरण माना जाता है। इसमें चुनाव में इस्तेमाल होने वाली ईवीएम और वीवीपैट मशीनों की तकनीकी स्थिति तथा कार्यप्रणाली की जांच की जाती है। ऐसे में इस प्रक्रिया में किसी भी तरह की लापरवाही की गुंजाइश नहीं रखी जा रही है। अधिकारियों को प्रशिक्षण के माध्यम से तकनीकी और प्रशासनिक दोनों पहलुओं की जानकारी दी जा रही है।

लखनऊ में 33 जनपदों के अधिकारियों की कार्यशाला

इसी सिलसिले में राजधानी लखनऊ में एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया जा रहा है। इसमें सात मंडलों—लखनऊ, कानपुर, मुरादाबाद, झांसी, चित्रकूट, अयोध्या और देवीपाटन से जुड़े 33 जनपदों के जिला निर्वाचन अधिकारियों, उप जिला निर्वाचन अधिकारियों और एफएलसी सुपरवाइजरों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है। प्रशिक्षण कार्यक्रम रूपाम यानी डॉ. राम मनोहर लोहिया उत्तर प्रदेश प्रशासन एवं प्रबंधन अकादमी, सुल्तानपुर रोड, लखनऊ में आयोजित किया जा रहा है। कार्यशाला सुबह 10 बजे से शाम चार बजे तक चल रही है। इसका मुख्य उद्देश्य अधिकारियों को FLC की प्रक्रिया, निर्धारित मानकों और निर्वाचन आयोग के दिशा-निर्देशों के अनुरूप काम करने के लिए तैयार करना है।

वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में प्रशिक्षण

कार्यशाला में भारत निर्वाचन आयोग के वरिष्ठ उप निर्वाचन आयुक्त मनीष गर्ग और उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा की उपस्थिति में अधिकारियों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है। वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में आयोजित इस कार्यशाला को आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

प्रशिक्षण के दौरान अधिकारियों को FLC से संबंधित तकनीकी और प्रशासनिक प्रक्रियाओं की विस्तृत जानकारी दी जा रही है। साथ ही यह भी बताया जा रहा है कि चेकिंग के दौरान निर्धारित प्रोटोकॉल का पालन किस तरह किया जाना है और प्रत्येक चरण में पारदर्शिता को कैसे सुनिश्चित किया जाए।

राजनीतिक दलों की सहभागिता रहेगी महत्वपूर्ण

FLC प्रक्रिया में राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों की सहभागिता को भी महत्वपूर्ण रखा गया है। निर्वाचन विभाग की ओर से यह सुनिश्चित किया जाएगा किFLC  के अलग-अलग चरणों की जानकारी राजनीतिक दलों के अधिकृत प्रतिनिधियों को उपलब्ध रहे। इसका उद्देश्य पूरी प्रक्रिया में विश्वास और पारदर्शिता को मजबूत करना है।

निर्वाचन अधिकारियों को यह भी समझाया जा रहा है कि FLC के दौरान अपनाई जाने वाली प्रक्रिया निर्धारित नियमों के अनुसार हो और राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों को आवश्यक जानकारी समय पर उपलब्ध कराई जाए। इससे ईवीएम-वीवीपैट की जांच प्रक्रिया को लेकर सभी संबंधित पक्षों के बीच स्पष्टता बनी रहेगी।

पहले गौतमबुद्ध नगर और वाराणसी में भी प्रशिक्षण

लखनऊ में आयोजित प्रशिक्षण से पहले निर्वाचन विभाग की ओर से गौतमबुद्ध नगर और वाराणसी में भी अधिकारियों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जा चुके हैं। गौतमबुद्ध नगर में 21 जनपदों के अधिकारियों को प्रशिक्षण दिया गया, जबकि वाराणसी में भी 21 जनपदों के निर्वाचन अधिकारियों को FLC से संबंधित प्रशिक्षण प्रदान किया जा चुका है। इस तरह प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में अधिकारियों को चरणबद्ध तरीके से प्रशिक्षित किया जा रहा है। निर्वाचन विभाग का प्रयास है कि FLC शुरू होने से पहले संबंधित अधिकारियों को तकनीकी, प्रशासनिक और प्रक्रिया संबंधी सभी आवश्यक जानकारियां उपलब्ध करा दी जाएं।

मशीनों की गुणवत्ता जांच को अहम माना गया

ईवीएम और वीवीपैट की FLC के दौरान मशीनों की तकनीकी गुणवत्ता और कार्यप्रणाली की जांच पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। अधिकारियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि जांच की पूरी प्रक्रिया निर्धारित मानकों के अनुरूप हो। तकनीकी प्रक्रिया के साथ आवश्यक प्रशासनिक औपचारिकताओं को भी पूरा करना होगा। निर्वाचन विभाग की ओर से अधिकारियों को यह भी बताया जा रहा है कि FLC के दौरान भारत निर्वाचन आयोग के दिशा-निर्देशों का अनुपालन सर्वोच्च प्राथमिकता के साथ किया जाए। किसी भी स्तर पर प्रक्रिया से संबंधित कोई सवाल या तकनीकी समस्या सामने आने पर निर्धारित प्रोटोकॉल के तहत उसका समाधान किया जाएगा।

निष्पक्ष चुनाव के लिए अहम कदम

उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने निष्पक्ष एवं पारदर्शी चुनाव के लिए ईवीएम-वीवीपैट की एफएलसी पर विशेष जोर दिया है। उनका कहना है कि निर्वाचन प्रक्रिया में तकनीकी व्यवस्था की विश्वसनीयता बेहद महत्वपूर्ण है।ऐसे में FLC की प्रक्रिया को गुणवत्ता, पारदर्शिता और निर्धारित मानकों के साथ पूरा करना जरूरी है।

आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए निर्वाचन विभाग की तैयारियां लगातार आगे बढ़ रही हैं। मतदाता सूची से लेकर मतदान केंद्रों और निर्वाचन कर्मियों की तैयारियों के साथ ईवीएम-वीवीपैट से जुड़ी व्यवस्थाओं को भी व्यवस्थित किया जा रहा है। एफएलसी इसी व्यापक तैयारी का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

प्रशिक्षण के बाद बढ़ेगी तैयारियों की गति

अधिकारियों का प्रशिक्षण पूरा होने के बाद जिलों में FLC से संबंधित तैयारियों को और गति मिलने की उम्मीद है। प्रशिक्षित अधिकारी अपने-अपने जिलों में निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार आगे की कार्रवाई सुनिश्चित करेंगे। निर्वाचन विभाग की कोशिश है कि चुनाव से पहले मशीनों की जांच और अन्य तकनीकी तैयारियां समयबद्ध तरीके से पूरी कर ली जाएं।

राज्य में विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच ईवीएम-वीवीपैट की FLC को लेकर जिस तरह से अधिकारियों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है, उससे स्पष्ट है कि निर्वाचन विभाग तकनीकी व्यवस्था के साथ पारदर्शिता को भी प्राथमिकता दे रहा है। राजनीतिक दलों की जानकारी और सहभागिता के साथ प्रक्रिया पूरी कराने पर जोर देकर चुनावी व्यवस्था में भरोसा और निष्पक्षता बनाए रखने की कोशिश की जा रही है।