
UP BJP Core Committee: उत्तर प्रदेश में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले भारतीय जनता पार्टी ने चुनावी तैयारियों को तेज कर दिया है। इसी क्रम में लखनऊ स्थित मुख्यमंत्री आवास पर भाजपा की कोर कमेटी की बैठक शुरू हुई। बैठक में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य, उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक, प्रदेश भाजपा अध्यक्ष पंकज चौधरी और प्रदेश महामंत्री संगठन धर्मपाल सिंह सहित पार्टी के प्रमुख नेता मौजूद रहे। बैठक में आगामी राज्यसभा और विधान परिषद चुनावों को लेकर उम्मीदवारों के नामों पर मंथन किया जा रहा है।
उत्तर प्रदेश की राजनीति में इस समय सबसे अधिक चर्चा राज्यसभा चुनाव को लेकर है। निर्वाचन आयोग ने उत्तर प्रदेश की 10 राज्यसभा सीटों के लिए 16 अक्टूबर को मतदान की तारीख तय की है। इनमें से आठ सीटें फिलहाल भाजपा के पास हैं, जबकि एक-एक सीट समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी के पास है। ऐसे में विधानसभा में मौजूदा संख्याबल के आधार पर भाजपा के लिए आठ सीटों का दावा मजबूत माना जा रहा है।
कोर कमेटी की बैठक में इन्हीं आठ सीटों के लिए संभावित उम्मीदवारों के नामों पर गंभीर चर्चा की जा रही है। पार्टी के भीतर कई स्तरों पर दावेदारों के नामों पर विचार हो चुका है। अब प्रदेश स्तर पर तैयार होने वाले पैनल को केंद्रीय नेतृत्व के पास भेजे जाने की तैयारी है। अंतिम निर्णय भाजपा का केंद्रीय नेतृत्व करेगा। हालिया रिपोर्टों के मुताबिक प्रत्येक सीट के लिए संभावित नामों का पैनल तैयार किए जाने की प्रक्रिया पर भी पार्टी में मंथन चल रहा है।
राज्यसभा चुनाव के लिए उम्मीदवारों के चयन में केवल चुनावी जीत का गणित ही महत्वपूर्ण नहीं होगा, बल्कि सामाजिक और क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व पर भी पार्टी की नजर रहेगी। उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य में जातीय और क्षेत्रीय संतुलन का चुनावी राजनीति में खास महत्व है। ऐसे में भाजपा के संभावित उम्मीदवारों में अलग-अलग सामाजिक वर्गों और क्षेत्रों को प्रतिनिधित्व देने की कोशिश दिखाई दे सकती है। आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए राज्यसभा के लिए चुने जाने वाले नामों का राजनीतिक संदेश भी महत्वपूर्ण होगा। पार्टी किस क्षेत्र से किस चेहरे को आगे करती है, किन सामाजिक समूहों को प्रतिनिधित्व देती है और पुराने चेहरों पर कितना भरोसा करती है, इन सभी पहलुओं पर राजनीतिक हलकों की नजर रहेगी।
बैठक का दूसरा बड़ा एजेंडा उत्तर प्रदेश विधान परिषद की शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों की 11 सीटें हैं। इनमें पांच सीटें स्नातक और छह सीटें शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों की हैं। इन सीटों के लिए 23 अक्टूबर को मतदान होना है। भाजपा इन चुनावों को भी 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले संगठन की चुनावी तैयारियों के महत्वपूर्ण परीक्षण के रूप में देख रही है।
भाजपा ने शिक्षक और स्नातक सीटों को लेकर संगठनात्मक स्तर पर पहले से तैयारी शुरू कर दी है। पार्टी के प्रदेश महामंत्री संगठन धर्मपाल सिंह ने हाल में कार्यकर्ताओं से मतदाता सूची के प्रत्येक पन्ने तक पहुंच बनाने, मतदाताओं से लगातार संपर्क रखने और मतदान केंद्र स्तर तक संगठन को सक्रिय करने पर जोर दिया था। इससे स्पष्ट है कि पार्टी इन चुनावों को केवल विधान परिषद की कुछ सीटों तक सीमित नहीं मान रही, बल्कि इसे व्यापक संगठनात्मक अभ्यास के तौर पर भी देख रही है।
कोर कमेटी की बैठक ऐसे समय हो रही है जब विधानसभा चुनाव के लिए राजनीतिक गतिविधियां लगातार तेज हो रही हैं। इससे पहले भी भाजपा की कोर कमेटी की बैठकों में सरकार और संगठन के बीच बेहतर समन्वय, जमीनी स्तर पर संगठन की सक्रियता और सरकार की योजनाओं को जनता तक पहुंचाने पर चर्चा हो चुकी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और प्रदेश भाजपा संगठन के प्रमुख नेताओं की मौजूदगी में होने वाली बैठक इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि आने वाले महीनों में पार्टी को एक साथ कई चुनावी मोर्चों पर काम करना है। राज्यसभा और विधान परिषद चुनावों के अलावा 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियां भी संगठन के एजेंडे में प्रमुखता से शामिल हैं।
प्रदेश स्तर पर चर्चा के बाद संभावित उम्मीदवारों का पैनल भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व को भेजा जाएगा। अंतिम नामों पर फैसला केंद्रीय स्तर पर होने की संभावना है। यही वजह है कि कोर कमेटी की बैठक को उम्मीदवार चयन की प्रक्रिया का महत्वपूर्ण पड़ाव माना जा रहा है। राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन की प्रक्रिया 29 सितंबर से शुरू होगी और 6 अक्टूबर नामांकन की अंतिम तारीख है। 7 अक्टूबर को नामांकन पत्रों की जांच होगी, जबकि 9 अक्टूबर तक उम्मीदवार नाम वापस ले सकेंगे। 16 अक्टूबर को मतदान के बाद उसी दिन मतगणना होगी।
भाजपा के लिए राज्यसभा और विधान परिषद चुनाव केवल संवैधानिक संस्थाओं के प्रतिनिधियों के चयन तक सीमित नहीं हैं। दोनों चुनावों में पार्टी का संगठनात्मक प्रबंधन, उम्मीदवारों का चयन और सामाजिक प्रतिनिधित्व 2027 की बड़ी राजनीतिक तैयारी का हिस्सा बन सकता है। विशेषकर शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों में भाजपा की रणनीति पर नजर इसलिए भी रहेगी क्योंकि इन क्षेत्रों में शिक्षित और संगठित मतदाता वर्ग की भूमिका होती है। पार्टी संगठन ने इन चुनावों के लिए बूथ स्तर तक संपर्क और मतदाता प्रबंधन पर जोर देना शुरू कर दिया है।
कोर कमेटी की बैठक के साथ ही भाजपा के भीतर संभावित उम्मीदवारों को लेकर उत्सुकता बढ़ गई है। राज्यसभा के लिए कई नाम राजनीतिक गलियारों में चर्चा में हैं, जबकि विधान परिषद की शेष सीटों पर भी पार्टी अपने उम्मीदवारों को लेकर अंतिम रणनीति बनाने में जुटी है। हालांकि अंतिम फैसला केंद्रीय नेतृत्व की मंजूरी के बाद ही स्पष्ट होगा। ऐसे में कोर कमेटीकी बैठक से निकलने वाला पैनल आने वाले दिनों में भाजपा की चुनावी दिशा का महत्वपूर्ण संकेत माना जाएगा।
उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव से पहले राज्यसभा और विधान परिषद चुनाव भाजपा के लिए लगातार सक्रिय चुनावी दौर की शुरुआत हैं। एक तरफ राज्यसभा की 10 सीटों के लिए 16 अक्टूबर को मतदान होगा, तो दूसरी तरफ 23 अक्टूबर को शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों की 11 विधान परिषद सीटों के लिए चुनाव होगा।
ऐसे में लखनऊ में चल रही भाजपा कोर कमेटी की बैठक पर राजनीतिक नजरें टिकी हैं। उम्मीदवारों के नाम, सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन, संगठन और सरकार के बीच समन्वय तथा केंद्रीय नेतृत्व की मंजूरी—इन सभी पहलुओं के बीच भाजपा की अगली चुनावी रणनीति का खाका तैयार होगा। राज्यसभा से लेकर विधान परिषद और फिर 2027 के विधानसभा चुनाव तक पार्टी के फैसले यह बताएंगे कि वह अपने संगठन और राजनीतिक आधार को किस तरह आगे बढ़ाने की तैयारी कर रही है।